राज्य वित्त आयोगों के लिए डेटा का नया ढांचा जारी, पंचायतों और ग्रामीण विकास को मजबूती देना है मकसद

केंद्र सरकार ने राज्य वित्त आयोगों के लिए आवश्यक पंचायत स्तरीय डेटा सेट पर एक रिपोर्ट जारी की है। पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार इसका उद्देश्य वित्तीय विकेंद्रीकरण को मजबूत करना, पंचायतों की वित्तीय क्षमता बढ़ाना, संसाधनों का बेहतर आवंटन सुनिश्चित करना और साक्ष्य आधारित निर्णयों के माध्यम से ग्रामीण विकास एवं स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाना है।

पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने और ग्रामीण विकास की योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने राज्य वित्त आयोगों के लिए आवश्यक डेटा सेट्स पर एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट वित्तीय विकेंद्रीकरण को मजबूत करने, पंचायतों को अधिक संसाधन उपलब्ध कराने और स्थानीय स्तर पर साक्ष्य आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायक होगी।

राज्य वित्त आयोगों के लिए डेटा सेट संबंधी समिति की रिपोर्ट का विमोचन भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया। रिपोर्ट में पंचायतों की वित्तीय स्थिति, सेवा वितरण, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक प्रदर्शन से संबंधित डेटा को व्यवस्थित और सुलभ बनाने की सिफारिश की गई है।

अपने संबोधन में डॉ. नागेश्वरन ने कहा कि नागरिकों को सरकार का अनुभव पेयजल, सड़क, स्ट्रीट लाइट और आंगनवाड़ी जैसी बुनियादी सेवाओं के माध्यम से होता है, इसलिए प्रभावी शासन के लिए पंचायतों का सशक्त होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वित्तीय विकेंद्रीकरण का वास्तविक उद्देश्य शासन को लोगों के करीब लाना है और यह तभी संभव है जब राज्य वित्त आयोगों के पास विश्वसनीय, समयबद्ध और सूक्ष्म स्तर का डेटा उपलब्ध हो।

उन्होंने कहा कि संसाधनों के आवंटन से जुड़े निर्णयों की गुणवत्ता उपलब्ध आंकड़ों और विश्लेषण की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। बेहतर डेटा से बेहतर शासन और बेहतर ग्रामीण विकास सुनिश्चित किया जा सकता है। डॉ. नागेश्वरन ने रिपोर्ट की उस सिफारिश का भी उल्लेख किया जिसमें नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की तरफ से 73वें संविधान संशोधन के क्रियान्वयन का परफॉर्मेंस ऑडिट कराने का सुझाव दिया गया है। इससे राज्यों में पंचायती राज संस्थाओं को मिले वित्तीय, प्रशासनिक और कार्य संबंधी अधिकारों का आकलन किया जा सकेगा।

पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने राज्य वित्त आयोगों और केंद्रीय वित्त आयोग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत डेटा तंत्र पंचायतों को मिलने वाले वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और अधिक प्रभावी सिफारिशों के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में स्वर्ण पुरस्कार मिला है तथा इस वर्ष घोषित 16 पुरस्कारों में से चार पंचायतों से जुड़ी पहलों को दिए गए हैं। यह देश के विकास में पंचायतों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

विवेक भारद्वाज ने 16वें वित्त आयोग की दो महत्वपूर्ण सिफारिशों का भी उल्लेख किया। पहली, तेजी से विकसित हो रहे अर्ध-शहरी क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थानीय निकायों को 10,000 करोड़ रुपये का अर्बनाइजेशन प्रीमियम प्रस्तावित किया गया है। दूसरी, पंचायतों के लिए 87,000 करोड़ रुपये की प्रदर्शन आधारित अनुदान व्यवस्था को पुनः शुरू करने की सिफारिश की गई है। यह अनुदान पंचायतों की स्वयं के स्रोतों से होने वाली आय में कम से कम 2.5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि से जुड़ा होगा।

रिपोर्ट में पंचायत-स्तरीय वित्तीय डेटाबेस विकसित करने, मानकीकृत लेखांकन प्रणाली अपनाने, राज्यों में समर्पित राज्य वित्त आयोग प्रकोष्ठ स्थापित करने, समान रिपोर्टिंग प्रारूप लागू करने, डेटा हैंडबुक प्रकाशित करने और राज्य वित्त आयोगों के लिए एक विस्तृत मैनुअल तैयार करने की सिफारिश की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत स्तर पर मानकीकृत और विस्तृत डेटा की उपलब्धता से वित्तीय संसाधनों का बेहतर वितरण संभव होगा, स्थानीय सरकारों की क्षमता बढ़ेगी और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की प्रभावशीलता में सुधार आएगा।

मंत्रालय का कहना है कि यह रिपोर्ट राज्य सरकारों, राज्य वित्त आयोगों और अन्य संवैधानिक संस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज के रूप में काम करेगी तथा भारत में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को मजबूत करने, पंचायतों को सशक्त बनाने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में ग्रामीण विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।