मानसून और खाद्य कीमतों के जोखिम के बीच ग्रामीण क्षेत्र की मांग मजबूत, FY27 में तेज गिरावट की आशंका कम: UBS

भारत में ग्रामीण मांग मजबूत बनी हुई है। बेहतर कृषि आय, सरकारी हस्तांतरण, ऋण में वृद्धि और मजबूत घरेलू वित्तीय स्थिति से खपत को सहारा मिल रहा है। मानसून में सुधार से खरीफ बुवाई बढ़ी है, लेकिन अल नीनो और खाद्य महंगाई का जोखिम अभी बना हुआ है। मौजूदा वित्त वर्ष में मांग की रफ्तार धीमी तो हुई है लेकिन तेज गिरावट की आशंका कम है।

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में अपनी मजबूती बरकरार रखी है और शहरी गतिविधियों से बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि, मौसम संबंधी अनिश्चितताओं और बढ़ती खाद्य कीमतों के कारण आगे ग्रामीण मांग की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है। यह आकलन यूबीएस इंडिया (UBS India) की एक रिपोर्ट में सामने आया है।

यूबीएस के ग्रामीण भारत आर्थिक इंडिकेटर (REI) के अनुसार, जून तिमाही के दौरान ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों में मजबूती आई और 2026 की शुरुआत से ग्रामीण क्षेत्र लगातार शहरी गतिविधियों से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण मांग मुख्य रूप से चार प्रमुख कारकों - कृषि आय, मजदूरी, सरकारी हस्तांतरण और ऋण की उपलब्धता से संचालित हो रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण मांग में सुधार व्यापक है। कंज्यूमर स्टेपल्स, विवेकाधीन उपभोग और कृषि से जुड़े क्षेत्रों में भी मांग मजबूत रहने के संकेत मिले हैं। कई कंपनियों ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए अपने वॉल्यूम ग्रोथ अनुमान बढ़ाए हैं और इसके पीछे ग्रामीण बाजारों में मजबूत मांग को प्रमुख कारण बताया है।

UBS के अनुसार, पिछले दो अपेक्षाकृत अच्छे मानसून वर्षों से बेहतर हुई कृषि आय, सरकारी हस्तांतरण, GST से जुड़े लाभ और मजबूत ऋण वृद्धि ने ग्रामीण परिवारों की क्रय शक्ति को बढ़ाया है। इससे उपभोग को मजबूती मिली है, हालांकि अल नीनो को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

मानसून में सुधार से खरीफ बुवाई को सहारा

जून में मानसून बेहद कमजोर रहने के बाद जुलाई में बारिश की गतिविधियों में उल्लेखनीय सुधार हुआ और अगस्त की शुरुआत तक स्थिति अनुकूल बनी रही। इससे कृषि उत्पादन को लेकर चिंताओं में कुछ कमी आई है। बेहतर बारिश से खरीफ फसलों की बुवाई में भी सुधार हुआ है। जुलाई की शुरुआत में कुल बुवाई क्षेत्र में सालाना आधार पर करीब 21 प्रतिशत की कमी थी, जो अगस्त के पहले सप्ताह तक घटकर 2 प्रतिशत से भी कम रह गई।

हालांकि, UBS ने चेताया है कि अल नीनो की स्थिति मजबूत होने से मानसून के बाकी हिस्से में बारिश के वितरण पर असर पड़ सकता है। सकारात्मक इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) इसके प्रभावों को कुछ कम कर सकता है। जलाशयों में पानी का स्तर भी फिलहाल सामान्य के करीब बना हुआ है।

फसल विविधीकरण, कम अवधि वाली और जलवायु-अनुकूल फसल किस्मों को बढ़ावा देने तथा सिंचाई का विस्तार करने वाली नीतियां बारिश की अनिश्चितता से कृषि आय पर पड़ने वाले असर को कम करने में मदद कर सकती हैं।

ग्रामीण परिवारों की वित्तीय स्थिति मजबूत

पिछले दो अच्छे फसल वर्षों के बाद ग्रामीण परिवारों के लिए मौजूदा वित्त वर्ष की शुरुआत अच्छी रही है। बेहतर बचत और कृषि आय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संभावित झटकों से बचाने में मदद कर सकती है। सरकारी सहायता भी ग्रामीण आय के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई है। कई राज्यों द्वारा लागू की गई बड़ी नकद हस्तांतरण योजनाएं, जिनका अनुमानित आकार करीब 20 अरब डॉलर है, लगातार जारी कल्याणकारी खर्च और ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश ग्रामीण आय और खपत को समर्थन दे सकते हैं।

1 जुलाई से मनरेगा की जगह लागू हुई नई रोजगार योजना वीबी जीराम जी (VB-GRAM-G) भी ग्रामीण आय के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कवच प्रदान कर सकती है। हालांकि, UBS के अनुसार इसके व्यापक आर्थिक प्रभाव का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि योजना को लागू हुए कुछ ही सप्ताह हुए हैं।

खाद्य महंगाई बनी चिंता

सकारात्मक परिदृश्य के बावजूद UBS का मानना है कि ग्रामीण मांग की मौजूदा रफ्तार FY27 के दौरान कायम रहना निश्चित नहीं है। मानसून के असमान वितरण से कृषि उत्पादन और आने वाली तिमाहियों में किसानों की आय प्रभावित हो सकती है। वहीं, खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी ग्रामीण परिवारों की वास्तविक क्रय शक्ति को कमजोर कर सकती है।

इसके बावजूद ग्रामीण मांग में तेज गिरावट की आशंका कम है। कुल मिलाकर, UBS का अनुमान है कि ग्रामीण मांग पिछले मानसून-संबंधी दबाव के दौर की तुलना में अधिक लचीली बनी रहेगी। हालांकि, मौजूदा स्तर से ग्रामीण मांग की वृद्धि दर में कुछ नरमी आ सकती है।