महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने की प्रस्तावों की समीक्षा

ग्रामीण विकास मंत्रालय की अधिकार प्राप्त समिति ने शनिवार को DAY-NRLM के तहत महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को बढ़ाने के प्रस्तावों की समीक्षा की। आईआईटी और आईआईएम के साथ मिलकर चार नए इनक्यूबेटर 600 से अधिक उद्यमों को सहयोग दे सकते हैं।

ग्रामीण विकास मंत्रालय की अधिकार प्राप्त समिति ने दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों के विस्तार और विकास को गति देने के प्रस्तावों की समीक्षा की है। इसका उद्देश्य छोटे स्तर के स्वयं सहायता समूह (SHG) उद्यमों को अधिक कारोबार वाले व्यवसायों में बदलने के लिए एक प्रभावी व्यवस्था तैयार करना है।

ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल की अध्यक्षता में 22 अगस्त को हुई बैठक में ग्रामीण महिलाओं के लिए उद्यमिता आधारित आजीविका के अवसरों को बढ़ाने और सरकार के 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने के व्यापक लक्ष्य में योगदान देने पर चर्चा हुई। समिति ने बिहार, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और गुजरात से चार नए इनक्यूबेटर प्रस्तावों पर विचार किया। इन राज्यों में प्रस्तावित इनक्यूबेशन साझेदार क्रमशः IIT पटना, IIM जम्मू, IIM लखनऊ और IIT गांधीनगर हैं।

चारों प्रस्तावित कार्यक्रमों के तहत 600 से अधिक उच्च क्षमता वाले ग्रामीण उद्यमों को सहयोग देने की योजना है। इसमें कारोबारी रणनीति, मार्गदर्शन, वित्तीय योजना, व्यवसाय को औपचारिक बनाने, तकनीक अपनाने, बाजार तक पहुंच और वित्तीय सहायता जैसी सेवाएं शामिल होंगी।

13 राज्यों में 14 इनक्यूबेटर कार्यक्रम सक्रिय

प्रस्तावित कार्यक्रम असम, बिहार, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में पूरे किए जा चुके चार इनक्यूबेटर कार्यक्रमों के अनुभव पर आधारित हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से 600 से अधिक SHG उद्यमों को सहायता दी गई थी। इसके बाद इनक्यूबेटर पहल का विस्तार हुआ है और वर्तमान में 13 राज्यों में 14 कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं। इनके माध्यम से करीब 2,100 ग्रामीण स्वयं सहायता समूह उद्यमों को IIM, IIT और अन्य प्रमुख इनक्यूबेशन संस्थानों के साथ साझेदारी में सहायता दी जा रही है।

मंत्रालय के अनुसार, पहले के इनक्यूबेटर कार्यक्रमों से उद्यमों के राजस्व में वृद्धि, कारोबार औपचारिक बनाने में सुधार और अतिरिक्त रोजगार सृजन जैसे ठोस परिणाम सामने आए हैं। इन अनुभवों के आधार पर अब इस पहल को और व्यापक बनाने की तैयारी है। नए इनक्यूबेटर कार्यक्रमों में खाद्य और कृषि-प्रसंस्करण, कपड़ा एवं हस्तशिल्प, मैन्युफैक्चरिंग, पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां और डिजिटल उद्यम जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से अन्य संभावनाशील क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

इन कार्यक्रमों की एक प्रमुख विशेषता उच्च विकास क्षमता वाले उद्यमों के चयन के लिए पारदर्शी और योग्यता आधारित चैलेंज फंड होगा। इसके अलावा, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों के भीतर उद्यमों को संस्थागत सहायता उपलब्ध कराने के लिए समर्पित राज्य इनक्यूबेशन सेल भी स्थापित किए जाएंगे।

दो राज्यों में SVEP का विस्तार

समिति ने पश्चिम बंगाल और गोवा में स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP) के विस्तार के प्रस्तावों पर भी विचार किया। इसका उद्देश्य ग्रामीण गैर-कृषि उद्यमिता के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और अधिक SHG सदस्यों को टिकाऊ व्यवसाय स्थापित करने और उन्हें आगे बढ़ाने में सक्षम बनाना है।

इन पहलों का उद्देश्य ग्रामीण महिला उद्यमियों को छोटे और केवल आजीविका चलाने वाले कारोबारों से आगे बढ़ाकर अधिक टर्नओवर, मजबूत बाजार संपर्क, बेहतर वित्तीय पहुंच और रोजगार सृजन की अधिक क्षमता वाले उद्यमों की ओर ले जाना है। समिति ने नवाचार, संस्थागत साझेदारी, विभिन्न योजनाओं के बीच समन्वय, डिजिटल तकनीक को अपनाने, बाजार तक पहुंच और परिणाम आधारित निगरानी पर जोर दिया।

सरकार DAY-NRLM के तहत इनक्यूबेशन और उद्यम विकास को महिला-नेतृत्व वाले आर्थिक विकास को मजबूत करने और लखपति दीदी पहल को आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देख रही है। इन उपायों का उद्देश्य ऐसा मजबूत राष्ट्रीय तंत्र तैयार करना है, जो ग्रामीण महिला उद्यमियों को केवल जीविका आधारित छोटे कारोबारों से आगे बढ़कर टिकाऊ और उच्च विकास वाले उद्यम खड़े करने में मदद कर सके।