राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के सितंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण बेरोजगारी दर घटकर 4.2% रह गई। ग्रामीण महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर बढ़कर 38.9% हो गई, जबकि ग्रामीण रोजगार अनुपात में भी सालाना आधार पर सुधार दर्ज किया गया।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के मासिक बुलेटिन के अनुसार, सितंबर 2026 में ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) बढ़कर 58.0% हो गई। सितंबर 2025 में यह 57.4% थी। इस तरह इसमें सालाना आधार पर 0.6 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई।
ग्रामीण बेरोजगारी दर सितंबर 2026 में घटकर 4.2% रही, जो एक साल पहले इसी महीने में 4.6% थी। ग्रामीण महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर बढ़कर 38.9% हो गई, जो सितंबर 2025 के मुकाबले 1 प्रतिशत अधिक है। ग्रामीण महिलाओं की बेरोजगारी दर घटकर 3.9% रह गई, जो वर्ष 2026 के दौरान दर्ज किया गया अब तक का सबसे निचला स्तर है।
ग्रामीण पुरुषों की बेरोजगारी दर भी सालाना आधार पर 0.3 प्रतिशत अंक घटकर 4.4% रह गई। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार-जनसंख्या अनुपात (WPR) बढ़कर 55.5% हो गया, जबकि सितंबर 2025 में यह 54.8% था। इसमें 0.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
शहरी क्षेत्रों में भी श्रम बल भागीदारी में सुधार हुआ। शहरी LFPR सितंबर 2026 में बढ़कर 50.7% हो गई, जबकि अगस्त 2026 में यह 50.4% थी। शहरी महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर महीने-दर-महीने 0.5 प्रतिशत अंक बढ़कर 25.9% हो गई। यह अक्टूबर 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है।
शहरी क्षेत्रों में रोजगार-जनसंख्या अनुपात बढ़कर 47.2% हो गया, जो अक्टूबर 2025 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। शहरी पुरुषों का WPR 71.0% और महिलाओं का 23.5% रहा।
राष्ट्रीय स्तर पर सितंबर 2026 में श्रम बल भागीदारी दर 55.5% रही, जो सितंबर 2025 के मुकाबले 0.2 प्रतिशत अंक अधिक है।
रोजगार-जनसंख्या अनुपात भी सालाना आधार पर 0.3 प्रतिशत अंक बढ़कर 52.7% हो गया। देश की बेरोजगारी दर घटकर 5.0% रह गई, जो एक साल पहले के मुकाबले 0.2 प्रतिशत अंक कम है। सितंबर 2026 के सर्वेक्षण में कुल 3,70,513 लोगों को शामिल किया गया। इनमें 2,11,333 ग्रामीण और 1,59,180 शहरी क्षेत्रों के निवासी थे।