वीबी-जी राम जी के तहत शिकायत निवारण नियम अधिसूचित, 15 दिन में करना होगा शिकायतों का निपटारा

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वीबी-जी राम जी शिकायत निवारण नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था होगी। जांच सात कार्यदिवसों में और शिकायत का समाधान 15 दिनों में करना अनिवार्य होगा। डिजिटल निगरानी, उच्च स्तर पर शिकायत भेजने और अपील का प्रावधान भी किया गया है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वीबी-जी राम जी (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन-ग्रामीण) शिकायत निवारण नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। इन नियमों के तहत ग्रामीण रोजगार और आजीविका योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था बनाई की गई है। नियमों के अनुसार, शिकायतों की जांच सात कार्यदिवसों के भीतर पूरी करनी होगी और शिकायत मिलने के 15 दिनों के भीतर उसका निपटारा करना अनिवार्य होगा।

नियमों में ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर शिकायत निवारण व्यवस्था स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। संबंधित स्तर पर नामित शिकायत निवारण अधिकारी शिकायतें प्राप्त करने, उनका पंजीकरण करने, जांच करने और निपटारा करने के लिए जिम्मेदार होंगे। जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम समन्वयक शिकायत निवारण व्यवस्था की निगरानी करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि शिकायतों का समाधान निर्धारित संस्थागत तंत्र और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हो।

2 नवंबर को जारी अधिसूचना का उद्देश्य शिकायत निवारण प्रक्रिया को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है, ताकि नागरिकों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

शिकायत दर्ज कराने के कई माध्यम

नियमों के तहत कोई भी व्यक्ति वीबी-जी राम जी योजना के क्रियान्वयन से संबंधित किसी भी मामले में शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके लिए कई माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें नामित अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से शिकायत करना, डिलीवरी के प्रमाण के साथ स्पीड पोस्ट से शिकायत भेजना, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित डिजिटल शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म का उपयोग करना तथा राज्य सरकार द्वारा निर्धारित हेल्पलाइन या अन्य माध्यमों से शिकायत दर्ज कराना शामिल हैं।

ग्राम पंचायत, ब्लॉक या जिला स्तर पर भौतिक रूप से प्राप्त शिकायतों को उसी दिन निर्धारित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करना होगा। यदि ऐसा संभव नहीं हो तो अगले कार्यदिवस तक उनका पंजीकरण करना अनिवार्य होगा।

शिकायत दर्ज होने के बाद शिकायतकर्ता को एक पावती दी जाएगी, जिसमें रजिस्ट्रेशन संख्या, शिकायत प्राप्त होने की तारीख और शिकायत प्राप्त करने वाले अधिकारी का पदनाम होगा। डिजिटल माध्यम से प्राप्त शिकायतों के लिए इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक रूप से प्राप्त शिकायतों के लिए लिखित पावती दी जाएगी।

महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायत के प्रारूप, भाषा, प्रस्तुत करने के तरीके या किसी प्रक्रियागत कमी के आधार पर उसका पंजीकरण करने से इनकार नहीं किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी या प्रक्रियागत आवश्यकताओं के कारण ग्रामीण नागरिक शिकायत निवारण व्यवस्था से वंचित न रहें।

सात कार्यदिवसों में जांच अनिवार्य

शिकायत निवारण अधिकारी को प्रत्येक पंजीकृत शिकायत की जांच करनी होगी। इसके लिए अधिकारी संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों से आवश्यक रिकॉर्ड, रजिस्टर, दस्तावेज, रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और अन्य सूचनाएं मांग सकते हैं। जहां आवश्यक हो, शिकायत का निपटारा करने से पहले शिकायतकर्ता को व्यक्तिगत रूप से या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देना होगा।

शिकायत प्राप्त होने के सात कार्यदिवसों के भीतर जांच पूरी करनी होगी, जबकि 15 दिनों के भीतर शिकायत का निपटारा करना अनिवार्य होगा। जांच पूरी होने के बाद अधिकारी निष्कर्ष दर्ज करेंगे और अधिनियम तथा नियमों के अनुरूप उचित सुधारात्मक या उपचारात्मक कार्रवाई करेंगे। जांच के निष्कर्ष और की गई कार्रवाई को निर्धारित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करना होगा तथा शिकायतकर्ता को इसकी जानकारी देनी होगी।

अनसुलझी शिकायतें उच्च स्तर पर भेजी जाएंगी

डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिकायत दर्ज होने से लेकर अंतिम निपटारे तक उसकी पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जा सकेगी। निर्धारित 15 दिनों के भीतर जिन शिकायतों का निपटारा नहीं होगा, उन्हें राज्य सरकार द्वारा स्थापित शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत अगले उच्च स्तर पर भेजा जाएगा।

उच्च स्तर पर शिकायत प्राप्त करने वाला अधिकारी मामले की जांच करेगा और उसके निपटारे के लिए उचित कार्रवाई करेगा। ऐसी शिकायतों की निगरानी उनके समाधान होने तक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जारी रहेगी।

नियमों में शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत पारित आदेशों के खिलाफ अपील का भी प्रावधान किया गया है। अपील दायर करने और उसके निपटारे की प्रक्रिया वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की अनुसूची-I के अनुरूप होगी।

इन नियमों के माध्यम से सरकार योजना के क्रियान्वयन में प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत करने और शिकायतों के प्रति व्यवस्था को अधिक संवेदनशील बनाने का प्रयास कर रही है। साथ ही, ग्रामीण परिवारों के अधिकारों और पात्रता के तहत मिलने वाले लाभों को सुनिश्चित करने की दिशा में भी इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।