तराई में बासमती और जैविक खेती को मिलेगी वैश्विक पहचान, पीलीभीत में प्रशिक्षण केंद्र का शिलान्यास

पीलीभीत में वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र-सह-प्रदर्शन फार्म का शिलान्यास किया गया। यह केंद्र किसानों को उन्नत बासमती खेती, जैविक कृषि और निर्यात संबंधी प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हुए उन्हें वैश्विक बाजार से जोड़ने में मदद करेगा।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में बासमती चावल और जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा किसानों को निर्यात बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। पीलीभीत जिले के टांडा बिजैसी में वीरांगना अवंतीबाई लोधी बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र-सह-प्रदर्शन फार्म का शिलान्यास बुधवार को केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और जिले के प्रभारी मंत्री बलदेव सिंह औलख ने किया। यह केंद्र कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) और बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन (BEDF) का संयुक्त प्रयास है।

राजकीय इंटर कॉलेज, न्यूरिया कॉलोनी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि यह केंद्र किसानों को बासमती और जैविक कृषि के वैश्विक मानकों से जोड़ेगी, जिससे स्थानीय उपज को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेगा और किसानों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। इसका लाभ पीलीभीत जिले के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अन्य जिलों को भी मिलेगा। बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र के अलाव वह जिले में उद्योग मंत्रालय की सहायता से एक एक औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए भी प्रयासरत हैं।  

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र पूरे क्षेत्र में किसानों के लिए तरक्की के रास्ते खोलेगा। इससे किसानों की वैज्ञानिक प्रशिक्षण और उन्नत कृषि पद्धतियों तक पहुंच मजबूत होगी। साथ ही, गुणवत्ता, प्रसंस्करण और पैकेजिंग की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। तराई के बासमती और जैविक उत्पाद दुनिया भर के बाजारों तक पहुंचेंगे, जिससे किसानों की आय बढ़ाने के नए रास्ते खुलेंगे।

एपीडा के चेयरमैन अभिषेक देव ने कहा कि बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र किसानों को उन्नत बीज, गुणवत्ता मानकों, परीक्षण सुविधाओं, पैकेजिंग और निर्यात प्रक्रियाओं तक पहुंच उपलब्ध कराएगा। प्रदर्शन फार्म के माध्यम से किसान बासमती और जैविक खेती की उन्नत पद्धतियों की व्यावहारिक जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत के खेतों से दुनिया की मेज तक बासमती” पहुंचाने के दृष्टिकोण को मजबूत करती है। इसका उद्देश्य कृषि निर्यात के विस्तार से होने वाले लाभों को जमीनी स्तर पर किसानों और ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाना है।

7 एकड़ में 15 करोड़ की लागत से बनेगा केंद्र

पीलीभीत जिले के टांडा बिजैसी में स्थापित होने वाले इस केंद्र के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 7 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई है। इस पर करीब 15 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसे केंद्र सरकार वहन करेगी। प्रस्तावित प्रदर्शन फार्म में बासमती किस्मों और बासमती उत्पादन से संबंधित तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही कीट एवं रोग प्रबंधन, जैविक खेती, जैविक कृषि इनपुट, एकीकृत कीट प्रबंधन तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन जैसी पद्धतियों का भी प्रदर्शन किया जाएगा।

यह केंद्र ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड राइस इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम (AICRIP) के तहत राष्ट्रीय बासमती परीक्षणों में भी सहयोग करेगा। इन परीक्षणों के माध्यम से क्षेत्र के लिए उपयुक्त किस्मों के मूल्यांकन और विकास में मदद मिलेगी।

किसानों को मिलेगा प्रमाणिक बासमती बीज

APEDA के अधिकारियों ने बताया कि केंद्र में एक समर्पित बीज संवर्धन केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से किसानों और अन्य हितधारकों को प्रमाणिक और गुणवत्तापूर्ण बासमती बीज किस्मों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। यहां बासमती की प्रमुख किस्मों के ब्रीडर सीड, फाउंडेशन सीड, सर्टिफाइड सीड और ट्रुथफुल सीड का उत्पादन एवं संवर्धन किया जाएगा। किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), बीज उत्पादकों और सरकारी एजेंसियों को भी सोर्स सीड उपलब्ध कराया जाएगा। बासमती किस्मों की शुद्धता बनाए रखने के लिए मेंटेनेंस ब्रीडिंग का काम भी किया जाएगा।

पीलीभीत में टांडा बिजैसी का राजकीय कृषि फार्म जहां बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र बनेगा 

FPO और स्टार्टअप को भी सहयोग

प्रशिक्षण केंद्र केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। FPOs, उद्यमियों और स्टार्टअप को उनके उत्पादों के निर्यात के लिए क्षमता निर्माण और सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। किसानों को केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें गुणवत्ता, मिलिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात से जोड़ा जाएगा। तराई क्षेत्र में बड़ी संख्या में राइस मिलें होने के बावजूद अधिकांश मिलों में मोटे धान की मिलिंग होती है। ऐसे में प्रशिक्षण केंद्र से क्षेत्र में बासमती की मिलिंग और निर्यात का ढांचा मजबूत होने की उम्मीद है।

जैविक खेती और निर्यात को प्रोत्साहन

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए नेशनल सेंटर फॉर ऑर्गेनिक एंड नेचुरल फार्मिंग (NCONF) के सहयोग से जैविक और जैव-इनपुट के उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह केंद्र जैविक प्रमाणन के लिए पंजीकरण प्रक्रिया और उससे संबंधित आवश्यकताओं पर भी प्रशिक्षण प्रदान करेगा।

शिलान्यास कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों और ग्रामीण की भागीदारी रही। इस अवसर पर एक कृषि प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत कृषि यंत्रों, जैविक उत्पादों एवं बासमती उत्पादन से संबंधित जानकारी दी गई। प्रदर्शनी में एपीडा, बीईडीएफ, एनसीओएल, नाबार्ड, टी बोर्ड, मसाला बोर्ड, डीजीएफटी, एफआईईओ और यूपी सरकार के कृषि, पशुपालन विभाग समेत विभिन्न संस्थाओं ने भाग लिया। 

कार्यक्रम में जिले के जनप्रतिनिधि बरखेड़ा विधायक स्वामी प्रवक्तानंद, पूरनपुर विधायक बाबूराम पासवान, बीसलपुर विधायक विवेक वर्मा, एमएलसी सुधीर गुप्ता, नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. आस्था अग्रवाल तथा एपीडा के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।