पंजाब में 8 जून को किसानों ने यूरिया की कथित कमी को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था, लेकिन इसके जवाब में केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने दावा किया है कि राज्य में खरीफ 2026 सीजन के लिए यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता है। मंत्रालय का कहना है कि केंद्र सरकार ने आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखा है।
उर्वरक विभाग का दावा है कि यह मजबूत स्टॉक स्थिति खरीफ सीजन शुरू होने से पहले केंद्र सरकार द्वारा अपनाई गई आक्रामक पूर्व-भंडारण (प्री-पोजिशनिंग) रणनीति का परिणाम है। जनवरी से मार्च 2026 के बीच पंजाब की अनुमानित आवश्यकता 3.50 लाख टन थी, लेकिन उर्वरक विभाग ने 6.08 लाख टन यूरिया की आपूर्ति की, जिससे 2.58 लाख टन का अतिरिक्त भंडार तैयार हो गया।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय का दावा
उर्वरक विभाग ने कहा है कि पंजाब में यूरिया का भंडार आवश्यकता से अधिक है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खरीफ 2026 सीजन के लिए पंजाब की कुल यूरिया आवश्यकता 14.50 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है। 9 जून तक राज्य की प्रोराटा आवश्यकता 9.0 लाख टन थी, जबकि केंद्र सरकार ने 10.71 लाख टन की उपलब्धता सुनिश्चित की है।
इस उपलब्ध मात्रा में से राज्य में अब तक 6.25 लाख टन यूरिया की बिक्री हुई है, जिसके बाद भी 4.46 लाख टन का स्टॉक किसानों के लिए उपलब्ध है। इसके अलावा 39,167 मीट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया वर्तमान में पंजाब के लिए परिवहन में है और जल्द ही वितरण केंद्रों तक पहुंच जाएगा।
केंद्र ने यह भी कहा कि राज्य में धान की रोपाई अभी पूरी तरह शुरू नहीं हुई है, इसलिए मौजूदा भंडार वर्तमान मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। अमृतसर जिले में ही खरीफ सीजन के दौरान कुल 64,720 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से लगभग 32,956 मीट्रिक टन का स्टॉक अभी भी उपलब्ध है।
यूरिया की कमी को लेकर राज्य में प्रदर्शन
अखिल भारतीय किसान मजदूर मोर्चा (एआईकेएमएम) के नेतृत्व में 8 जून को पंजाब के 22 जिलों में लगभग 74 स्थानों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि यूरिया या तो उपलब्ध नहीं है या फिर निजी दुकानों और सहकारी समितियों के माध्यम से ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ उर्वरक विक्रेता किसानों को सामान्य यूरिया देने के बदले नैनो यूरिया खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
आंदोलन के दौरान किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि राज्य के कई जिलों में धान की रोपाई शुरू होने के बावजूद किसानों को जरूरत के अनुसार यूरिया नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर उचित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने की मांग की।
यूरिया की खपत में वृद्धि
पंजाब में इस वर्ष यूरिया की खपत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 1 मार्च से 9 जून 2026 के बीच प्रदेश में यूरिया की बिक्री 7.86 लाख टन रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 7.10 लाख टन थी। यानी बिक्री में 0.76 लाख टन की वृद्धि दर्ज की गई।
यह प्रवृत्ति रबी 2025-26 सीजन के दौरान भी देखी गई थी। उस समय राज्य की अनुमानित आवश्यकता 15 लाख टन थी, जबकि केंद्र सरकार ने 19.43 लाख टन की उपलब्धता सुनिश्चित की थी। रबी सीजन में वास्तविक बिक्री 15.45 लाख टन रही, जो प्रारंभिक अनुमान से 45,000 मीट्रिक टन अधिक थी।
डीलरों के चक्कर लगा रहे हैं किसान
भले ही राज्य स्तर पर यूरिया का भंडार पर्याप्त दिखाई देता हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर वितरण संबंधी बाधाएं अस्थायी कमी की स्थिति पैदा कर सकती हैं, विशेष रूप से धान रोपाई के चरम समय में। किसानों द्वारा कई डीलरों के चक्कर लगाने की शिकायतें इस बात का संकेत हैं कि राज्य के कुल भंडार और खुदरा स्तर पर उपलब्धता के बीच अंतर हो सकता है।
पंजाब में लगभग 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है, जिसके लिए पूरे सीजन में करीब 15 लाख टन यूरिया की आवश्यकता होती है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में, जब रोपाई का काम तेज होगा, तब केंद्र और राज्य सरकारों के लिए उर्वरक की अंतिम छोर तक निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।