उत्तर प्रदेश में किसानों को अधिक उपज वाली गन्ने की नई किस्मों का विकल्प मिलने की उम्मीद जगी है। गन्ना एवं चीनी आयुक्त की अध्यक्षता में 29 सितंबर को हुई ‘बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति’ की बैठक में चार नई गन्ना किस्मों को प्रदेश में खेती के लिए मंजूरी दी गई है। इनमें उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर (UPCSR) द्वारा विकसित तीन गन्ना किस्में को.शा.23232, को.शा.19235 व को.शा.18232 तथा भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (ICAR-IISR), लखनऊ द्वारा विकसित गन्ना किस्म को.लख.21201 शामिल हैं। इन किस्मों में अधिक पैदावार और शुगर रिकवरी बेहतर होने का दावा किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के गन्ना किसान गत कई वर्षों से गन्ने की लोकप्रिय किस्म को.0238 के विकल्प का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि यह प्रजाति रोगग्रस्त हो चुकी है। इसका असर प्रदेश में गन्ना और चीनी उत्पादन के साथ-साथ किसानों की आय पर भी पड़ा है। उम्मीद है नई किस्में जारी होने से किसानों का इंतजार अब खत्म होगा।
को.शा. 23232 की उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, अगेती किस्म को.शा. 23232 के पौधा गन्ना की औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो गन्ने की मानक किस्म को.0238 की तुलना में 9.44 प्रतिशत अधिक है। इस किस्म में नवंबर, जनवरी और मार्च में शर्करा प्रतिशत क्रमशः 13.10, 13.77 और 14.05 रही, जो को.0238 से अधिक है।
गन्ना किस्म को.शा.23232 की पेड़ी फसल की औसत उपज 80.57 टन प्रति हेक्टेयर प्राप्त हुई, जो मानक किस्म को.0238 से 3.16 प्रतिशत अधिक है। यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रति प्रतिरोधक क्षमता वाली है और इसकी पेड़ी अच्छी होती है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के निदेशक ने बताया कि यह किस्म किसानों के लिए को.0238 का बेहतर विकल्प साबित होगी।
को.लख.21201 भी बेहतर उत्पादन वाली किस्म
भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ द्वारा विकसित अगेती गन्ना किस्म को.लख.21201 की औसत उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर है जो मानक किस्म को.0238 के लगभग समान है। यह लाल सड़न रोग के प्रति उच्च रोगरोधक क्षमता तथा अच्छी पेड़ी वाली किस्म है। इसे पूरे उत्तर प्रदेश में खेती के लिए जारी किया गया है।
मध्य एवं देर से पकने वाली किस्मों को भी मंजूरी
यूपी गन्ना शोध परिषद की मध्य एवं देर से पकने वाली दो किस्में को.शा.19235 और को.शा.18232 भी रिलीज की गई हैं। गन्ना किस्म को.शा.19235 में पौधा गन्ना की औसत उपज 87.58 टन प्रति हेक्टेयर है, जो मानक किस्म को.शा.767 की तुलना में 21.01 प्रतिशत अधिक है। इसमें शुगर कंटेंट अधिक पाया गया है और पेड़ी की औसत उपज 73.90 टन प्रति हेक्टेयर प्राप्त हुई, जो मानक किस्म से 11.36 प्रतिशत अधिक बताई गई है।
गन्ना किस्म को.शा.18232 में पौधा गन्ना की औसत उपज 92.38 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो मानक किस्म को.शा.767 से 26.51 प्रतिशत अधिक है। इसकी पेड़ी की उपज 82.06 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जो मानक किस्म की तुलना में 23.70 प्रतिशत अधिक है।
आठ नोटिफाइड किस्में भी अंगीकृत
बैठक में भारत सरकार द्वारा नोटिफाइड आठ गन्ना किस्मों को भी उत्तर प्रदेश में खेती के लिए अंगीकृत किया गया। इनमें को.पी.16437, को.पी.11438 और को.एल.16466 अगेती गन्ना किस्में हैं। वहीं को.16030, को.17018, को.18022, को.पी.17215 (को.पी.99) और को.पी.18213 (को.पी.100) मध्य एवं देर से तैयार होने वाली किस्में हैं।
को.पी.16437 और को.पी.11438 पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए उपयुक्त हैं, जबकि अन्य नोटिफाइड किस्मों को पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के लिए अंगीकृत किया गया है।
पुरानी छह किस्में अनुपयुक्त घोषित
उपसमिति ने अलोकप्रिय, नगण्य क्षेत्रफल वाली और पुरानी छह गन्ना किस्मों को.शा.95255, 97264, 96275, 97261, को.एस.96436 और 98231 को अनुपयुक्त घोषित किया है। इन किस्मों को अगले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से अस्वीकृत किया जाएगा।
गन्ना आयुक्त कार्यालय के अनुसार, उच्च उपज और बेहतर चीनी रिकवरी वाली नई गन्ना किस्मों के स्वीकृत होने से किसानों को अधिक विकल्प मिलेंगे। इससे गन्ने की पैदावार बढ़ने के साथ-साथ प्रदेश के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार और चीनी उद्योग को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।