हिमाचल प्रदेश में नए एथनॉल प्लांट लगाने पर रोक, पानी की खपत को लेकर सरकार का बड़ा फैसला

हिमाचल प्रदेश सरकार ने पर्यावरण और जल संसाधनों पर पड़ने वाले दबाव को देखते हुए राज्य में नए एथनॉल प्लांट लगाने की मंजूरी नहीं देने का फैसला किया है। सरकार अत्यधिक बिजली-पानी की खपत और खतरनाक कचरा पैदा करने वाले उद्योगों पर भी सख्ती करेगी।

हिमाचल सरकार ने राज्य में नए एथनॉल संयंत्रों की स्थापना को मंजूरी नहीं देने का फैसला किया है। साथ ही, अत्यधिक बिजली की खपत करने और खतरनाक कचरा पैदा करने वाले उद्योगों पर भी अंकुश लगाया जाएगा।

हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने विधानसभा में यह जानकारी दी। नालागढ़ से कांग्रेस विधायक हरदीप सिंह बावा द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान चौहान ने कहा कि एथनॉल प्लांट में पानी की अत्यधिक खपत होती है और ऐसे उद्योग पर्यावरण और स्थानीय जनता के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर रहे हैं।

यही वजह है कि प्रदेश सरकार ने न केवल नए प्लांट लगाने पर रोक लगाई है, बल्कि पहले से स्थापित ऐसी इकाइयों के विस्तार के प्रस्तावों को भी खारिज कर दिया है।

रोजाना 5 से 10 लाख लीटर पानी की खपत

मंत्री हर्षवर्धन चौहान के अनुसार, एथनॉल संयंत्र प्रतिदिन करीब 5 लाख से 10 लाख लीटर पानी की खपत करते हैं। हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य में जल संसाधनों पर पड़ने वाले दबाव को देखते हुए सरकार ने नए एथनॉल प्लांट नहीं लगाने का निर्णय लिया है।

सरकार का कहना है कि औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी। अत्यधिक पानी या बिजली की खपत करने वाले तथा गंभीर पर्यावरणीय खतरा पैदा करने वाले उद्योगों को भविष्य में मंजूरी नहीं देने की नीति अपनाई जाएगी।

मौजूदा प्लांट को लेकर भी उठे सवाल

विधानसभा में नालागढ़ के मौजूदा एथनॉल प्लांट से निकलने वाली दुर्गंध और प्रदूषण का मुद्दा भी उठाया गया। स्थानीय लोगों की शिकायतों पर सरकार ने कहा कि संयंत्र को तत्काल बंद करना व्यावहारिक नहीं है। हालांकि, इसके लिए दीर्घकालिक समाधान तलाशने की योजना पर काम किया जाएगा।

प्रदेश के संसारपुर टेरेस और नालागढ़ में चल रहे इथेनाल प्लांट के कारण आस-पास के इलाकों में भूजल का स्तर तेजी से गिरा है, जिससे स्थानीय लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

ज्यादा बिजली खपत वाले उद्योगों पर भी सख्ती

हिमाचल में अत्यधिक बिजली-पानी की खपत तथा खतरनाक कचरा पैदा करने वाले उद्योगों पर भी सख्त रुख अपनाया जाएगा। स्टील री-बार (सरिया) इकाइयों का उदाहरण देते हुए मंत्री चौहान ने कहा कि केंद्र के औद्योगिक पैकेज के तहत स्थापित कुछ इकाइयां 50 से 100 मेगावाट तक बिजली की खपत करती हैं, जबकि राज्य के पास ऐसे उद्योगों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं है।

हिमाचल सरकार अब ऐसे उद्योगों को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है जो पर्यावरण और राज्य के अनुकूल हों। भविष्य में केवल उन्हीं निवेशकों को प्राथमिकता दी जाएगी जो कम संसाधनों में अधिक निवेश लाएं और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अधिकतम अवसर पैदा कर सकें।