भारत में सतत (सस्टेनेबल) अरंडी बीज उत्पादन ने 1.70 लाख टन के स्तर को छू लिया है। यह गुजरात में किसानों की भागीदारी से संचालित पहल का नतीजा है, जिसका नेतृत्व जयंत एग्रो-ऑर्गेेनिक्स (Jayant Agro-Organics Limited) द्वारा उसके प्रमुख प्रोजेक्ट ‘प्रगति’ के माध्यम से किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के नौ वर्ष पूरे हो गए हैं और अब यह वैश्विक स्तर पर टिकाऊ और ट्रेसेबल आपूर्ति श्रृंखला का मॉडल बन चुका है।
साल 2016 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम को आरकेमा (Arkema) और बीएएसएफ (BASF) के साथ मिलकर, तथा विकास संगठन सॉलिडेरिडैड (Solidaridad) के सहयोग से लागू किया गया। इसके साथ ही इहसेदु एग्रोकेम (Ihsedu Agrochem) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित ‘आई-प्रगति’ परियोजना ने किसानों तक इसकी पहुंच को और विस्तार दिया है।
वर्ष 2025 तक दोनों परियोजनाओं के तहत 13,500 से अधिक किसानों को प्रमाणित किया जा चुका है और 16,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि को सक्सेस (SuCCESS®) सस्टेनेबिलिटी कोड के अंतर्गत लाया गया है। इन पहलों के माध्यम से कुल मिलाकर लगभग 1.70 लाख टन प्रमाणित कैस्टर बीज का उत्पादन हुआ है, जिससे वैश्विक स्पेशलिटी रसायन बाजार में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है।
खेत स्तर पर इसका प्रभाव भी उल्लेखनीय रहा है। प्रगति से जुड़े किसानों ने सरकारी मानकों की तुलना में 32% अधिक उत्पादन दर्ज किया, जबकि डेमो प्लॉट में पारंपरिक खेती के मुकाबले लगभग 30% कम पानी का उपयोग हुआ। सस्टेनेबल खेती के तहत बढ़ता रकबा इस बात का संकेत है कि किसान अरंडी को एक लाभकारी और जलवायु-अनुकूल फसल के रूप में अपना रहे हैं, खासकर अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में।
जयंत एग्रो समूह के चेयरमैन अभय वी. उदेशी के अनुसार, यह पहल दर्शाती है कि टिकाऊ कृषि पद्धतियां किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक उद्योगों के लिए विश्वसनीय आपूर्ति भी सुनिश्चित कर सकती हैं। प्रमाणित किसानों की बढ़ती संख्या इस मॉडल पर किसानों के विश्वास को भी दर्शाती है।
गुजरात भारत का प्रमुख अरंडी उत्पादन का केंद्र है। यहां से शुरू हुई पहल अब एक वैश्विक ढांचे में विकसित हो चुकी है। किसानों ने बेहतर कृषि प्रथाओं और प्रमाणित बीजों के उपयोग से लागत में 20-25% तक कमी और उत्पादन में वृद्धि का अनुभव किया है।
उत्पादन बढ़ाने के अलावा यह कार्यक्रम किसानों के क्षमता निर्माण पर भी ध्यान दे रहा है। वर्ष के दौरान 450 से अधिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए और 500 से अधिक लीड किसानों को अन्य किसानों का मार्गदर्शन करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। साथ ही 10,000 से अधिक सुरक्षा किट वितरित किए गए और 150 से अधिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए, जिनसे हजारों ग्रामीण परिवारों को लाभ मिला।
कार्यक्रम महिलाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा दे रहा है। इसके तीसरे चरण में 1,150 से अधिक महिलाओं को सस्टेनेबल खेती, डिजिटल और वित्तीय साक्षरता का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे निर्णय लेने की उनकी क्षमता और ग्रामीण समुदायों की मजबूती में सुधार हुआ है।