मध्य प्रदेश के तीन जिलों की सिंचाई परियोजनाओं के लिए 3,378 करोड़ रुपये की स्वीकृति

मध्य प्रदेश कैबिनेट ने छिंदवाड़ा, मुरैना और सागर जिलों की सिंचाई परियोजनाओं के लिए 3,378.69 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसके अलावा, वन संरक्षण, क्षतिपूर्ति पौधारोपण, जलग्रहण क्षेत्र विकास और नदियों के पुनर्जीवन के लिए कैम्पा निधि से 2,050 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

मध्य प्रदेश कैबिनेट ने 8,225 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इनमें छिंदवाड़ा, मुरैना और सागर जिलों की सिंचाई परियोजनाओं के लिए स्वीकृति भी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

कैबिनेट ने छिंदवाड़ा, मुरैना और सागर की सिंचाई परियोजनाओं के वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए 3,378.69 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना के लिए 2,611.13 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना का मुख्य उद्देश्य छिंदवाड़ा जिले के 1,90,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप/स्प्रिंकलर) के माध्यम से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाना है।

इसके साथ ही पेंच वृहद परियोजना की निरंतरता के लिए 197 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसका मुख्य उ‌द्देश्य बांध निर्माण कर छिंदवाड़ा और सिवनी जिलों में कृषि के लिए पानी की आपूर्ति करना है। इससे छिंदवाड़ा जिले के 1,26,647 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित हो सकेगी। 

मुरैना जिले में चेंटीखेड़ा वृहद सिंचाई परियोजना के अन्तर्गत बांध निर्माण कर जिले के 15,300 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रणाली का निर्माण कार्य चल रहा है। चेंटीखेड़ा वृहद सिंचाई परियोजना के लिए 531 करोड़ 15 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

सागर में पंचमनगर सिंचाई कॉम्पलेक्स एक वृहद सिंचाई परियोजना है। इसके अन्तर्गत पगरा बांध एवं पंचमनगर बैराज का निर्माण किया जा चुका है। पगरा बांध से पाइप प्रणाली के माध्यम से सागर एवं दमोह जिले की 25,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जानी है। पंचमनगर सिंचाई कॉम्पलेक्स के कार्यों के लिए 39 करोड़ 41 लाख रूपये स्वीकृत किए गए हैं।

कैम्पा वन रोपण निधि के लिए 2,050 करोड़ रुपये

कैबिनेट ने प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि (कैम्पा निधि) अंतर्गत वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना के क्रियान्वयन के लिए 2050 करोड़ 3 लाख रुपये के उपयोग की स्वीकृति दी है। इस निधि का उपयोग बीते वर्षों के कार्यों के रख-रखाव, क्षतिपूर्ति पौधारोपण, लैण्डस्केप के आधार पर बिगड़े वनों का सुधार, नदियों के पुनर्जीवन के लिए जलग्रहण क्षेत्र के वनीकरण, मृदा एवं जल संरक्षण के कार्य आदि में किया जा सकता है।