मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि राज्य में अब धान की फसल पर भी भावांतर योजना का लाभ दिया जाएगा। राज्य सरकार धान उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और बाजार मूल्य के बीच के अंतर की राशि का भुगतान करेगी। मुख्यमंत्री सिवनी जिला मुख्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय धान महोत्सव को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि अब हमें सिर्फ पारंपरिक खेती के भरोसे नहीं बैठे रहना है। खेत में धान लगाइए, गेहूं उगाइए, लेकिन उसके साथ-साथ फसल विविधीकरण, पशुपालन और मछली पालन जैसे नए क्षेत्रों को भी अपनाइए। इससे कमाई के नए रास्ते खुलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष मानसून पर अलनीनो का प्रभाव नजर आ रहा है। अगर बारिश कम होती है तो किसानों को तैयार रहना चाहिए कि वे कोदो कुटकी सहित सभी फसलों को तैयार कर लें।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना अंतर्गत प्रदेश के 3,941 किसानों को 1 हजार रुपए प्रति क्विंटल की दर से कोदो-कुटकी के बोनस के रूप में 2.84 करोड़ रुपए किसानों के खातों में ट्रांसफर किए। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार श्रीअन्न उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ-साथ बोनस भी दे रही है। हमने प्रदेश में पहली बार शासकीय स्तर पर कोदो कुटकी खरीदने के लिए अभियान शुरू किया है।
उन्होंने कहा कि राज्य में कोदो कुटकी के ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के लिए भी काम जारी हैं। मुख्यमंत्री ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि डिंडोरी की सीताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर को भी जीआई टैग मिला है। रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के तहत वैल्यू चेन का निर्माण कर किसानों को मार्केट एक्सेस प्रदान किया जा रहा है। कोदो-कुटकी के प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन की व्यवस्था विकसित की जा रही है। 'नर्मदा मिलेट्स' ब्रांड के माध्यम से मध्यप्रदेश के श्रीअन्न को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत जी-राम-जी योजना (मनरेगा का नया स्वरूप) के तहत प्रदेश में विभिन्न श्रेणी के कार्यक्रम लगातार चलायें जाएंगे। किसानों और रोजगार के जरूरतमंदों को कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। इसके तहत प्रदेश के गांव-गांव में बहुतायत में अमृत सरोवरों का निर्माण कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष गेहूं खरीद का नया रिकॉर्ड बनाया है। प्रदेश के 13 लाख 46 हजार से अधिक किसानों से कुल 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदकर उन्हें 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया गया है। सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी भावांतर योजना के माध्यम से लाभ दिया है।
डॉ. यादव ने कहा कि एग्रीटेक सिस्टम से खाद वितरण में हो रही गड़बड़ियों पर सख्ती से अंकुश लगाया जा रहा है। सभी जिला कलेक्टर को खाद वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं। किसान कल्याण वर्ष में किसान मात्र 5 रुपए में बिजली का कनेक्शन ले सकते हैं।