पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने महाराष्ट्र में बारिश की कमी और किसानों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए राज्य में तत्काल सूखा घोषित करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखे पत्र में कहा कि जिन क्षेत्रों में स्थिति गंभीर है, वहां औपचारिक सूखा मानदंडों की प्रतीक्षा किए बिना राहत उपाय शुरू किए जाने चाहिए।
पवार ने मांग की कि गंभीर स्थिति वाले तालुका को तत्काल सूखाग्रस्त जैसी स्थिति वाला घोषित कर राहत उपाय लागू किए जाएं। उन्होंने प्रभावित किसानों को कम से कम 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की वित्तीय सहायता और कृषि मजदूर परिवारों को 25,000 रुपये की विशेष सहायता देने की मांग की।
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उन्होंने किसानों को आर्थिक संकट से राहत देने के लिए तत्काल कर्जमाफी योजना लागू करने और फसल ऋण उपलब्ध कराने की भी मांग की। नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन सब्सिडी को 50,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये करने की मांग की गई है। इसके अलावा, 2025-26 में फसल ऋण लेने वाले और इस वर्ष कर्ज नहीं चुका पाने वाले किसानों को भी कर्जमाफी योजना में शामिल करने की मांग की गई है।
फसल बीमा के संबंध में पवार ने एक रुपये वाली फसल बीमा योजना को पूर्व प्रभाव से लागू करने की भी मांग की। उन्होंने पिछले वर्ष बेमौसम बारिश से हुए नुकसान के लिए घोषित 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की फसल बीमा सहायता भी तत्काल वितरित करने को कहा। सूखा जैसी स्थिति वाले तालुका में रोजगार गारंटी योजना के तहत विशेष काम शुरू करने, कृषि एवं जल संरक्षण से जुड़े कार्य कराने और बागों को बचाने के लिए टैंकर व्यवस्था शुरू करने की मांग भी की गई है।
पानी, चारे और बिजली की व्यवस्था
पवार ने पेयजल की कमी वाले गांवों का तत्काल सर्वेक्षण कराने और जरूरत के अनुसार सरकारी टैंकर शुरू करने की मांग की। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में मांग के अनुसार तत्काल चारा शिविर शुरू करने तथा पशुओं के लिए पेयजल और आवश्यक पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने सूखे के दौरान बढ़ती बिजली कटौती की समस्या को देखते हुए ऊर्जा विभाग के माध्यम से विशेष अभियान चलाकर बिजली जनरेटर और संबंधित व्यवस्था की मरम्मत समय पर पूरी करने की मांग की।
जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष बनाने का सुझाव
पवार ने प्रत्येक जिले में बारिश, फसल की स्थिति, जल उपलब्धता, चारे की उपलब्धता और पशुधन की स्थिति की दैनिक निगरानी के लिए राज्य और जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने सूखा प्रभावित तालुकों के स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों की केवल परीक्षा फीस ही नहीं, बल्कि पूरी शैक्षणिक फीस माफ करने का भी तत्काल निर्णय लेने की मांग की।