महाराष्ट्र में सूखा राहत के लिए कैबिनेट उपसमिति का गठन, शनिवार तक प्रारंभिक अधिसूचना जारी होने की उम्मीद

महाराष्ट्र सरकार ने सूखे जैसी स्थिति से निपटने और प्रभावित किसानों को जल्द राहत देने के लिए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में कैबिनेट उपसमिति गठित की है। समिति फसल को होने वाले नुकसान और राहत जरूरतों की साप्ताहिक समीक्षा करेगी। प्रदेश में सोयाबीन, मक्का, कपास, धान और ज्वार की फसलें प्रभावित हुई हैं।

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में सूखे जैसी स्थिति से निपटने, फसल नुकसान का आकलन करने और प्रभावित किसानों तक राहत पहुंचाने में तेजी लाने के लिए मंगलवार को राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में कैबिनेट उपसमिति का गठन किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि इस उपसमिति को कैबिनेट के अधिकार दिए गए हैं। समिति हर सप्ताह सूखा प्रभावित क्षेत्रों से मिलने वाली रिपोर्ट की समीक्षा करेगी और जमीनी स्थिति के आधार पर आवश्यक फैसले लेगी। हालांकि, बड़े नीतिगत फैसले राज्य कैबिनेट के समक्ष ही रखे जाएंगे।

उपसमिति में गिरिश महाजन, गुलाबराव पाटिल, संजय राठौड़, पंकजा मुंडे, दत्तात्रय भरणे, जयकुमार गोरे, प्रताप सरनाईक, मकरंद पाटिल और बाबासाहेब पाटिल सहित अन्य मंत्री शामिल हैं। मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल समिति के सचिव होंगे।

फडणवीस ने कहा कि राज्य के बड़े हिस्से में सूखे जैसी स्थिति बनी है और तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। कई क्षेत्रों में सोयाबीन, मक्का और कपास की फसलों को काफी नुकसान हुआ है। कोंकण के कुछ हिस्सों में धान और अन्य क्षेत्रों में ज्वार की फसल भी प्रभावित हुई है।

सरकार ने फसल नुकसान का विस्तृत आकलन करने के लिए पंचनामा कराने के निर्देश दिए हैं। इसके आधार पर किसानों को आवश्यक सहायता का निर्धारण किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर इसी आकलन के आधार पर केंद्र सरकार से भी सहायता मांगी जाएगी।

मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से जारी कैबिनेट फैसलों के संक्षिप्त विवरण के अनुसार, शनिवार तक सूखा राहत को लेकर प्रारंभिक अधिसूचना जारी किए जाने की उम्मीद है। प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का मौके पर जायजा लेने के लिए मंत्री भी दौरे करेंगे, ताकि किसानों तक राहत पहुंचाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

फडणवीस ने कहा कि उपसमिति जमीनी स्तर से मिलने वाली शिकायतों की समीक्षा करेगी और परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगी। मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री भी समिति की रिपोर्ट की हर सप्ताह समीक्षा करेंगे और वरिष्ठ स्तर पर आवश्यक फैसले लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने खुद भी कुछ सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने की बात कही है।

सरकार ने पेयजल और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता को तत्काल प्राथमिकता दी है। प्रभावित इलाकों में स्थानीय निकायों के माध्यम से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जा रही है। पशुधन के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।