राजस्थान बजट 2026: कृषि, पशुपालन और ग्रामीण विकास से जुड़ी कई घोषणाएं

राजस्थान सरकार ने बजट को ‘ग्रामीण समृद्धि और किसानों की आय बढ़ाने वाला’ बताते हुए कृषि क्षेत्र में 7.59 प्रतिशत वृद्धि का दावा किया है। हालांकि विपक्ष और किसान नेताओं ने इसे जमीनी हकीकत से दूर बताते हुए क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं।

राजस्थान की उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दीया कुमारी ने राज्य विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3 लाख 50 हजार 54 करोड़ रुपये के व्यय का बजट पेश किया। बजट में 3 लाख 25 हजार 740 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्तियों का अनुमान है। राज्य का राजस्व घाटा 24 हजार 313 करोड़ 93 लाख रुपये रहने का अनुमान है।

वित्त मंत्री ने बजट को ‘ग्रामीण समृद्धि और किसानों की आय बढ़ाने वाला’ बताते हुए कृषि बजट के तहत 69 हजार 4 सौ 22 करोड़ रुपये का व्यय प्रस्तावित किया है जो राज्य के कुल बजट का 11. 36 फीसदी और गत वर्ष से 7.59 फीसदी अधिक है। 

राज्य सरकार का कहना है कि बजट का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना तथा कृषि और पशुपालन को टिकाऊ बनाना है। हालांकि विपक्ष ने बजट को घोषणाओं तक सीमित बताते हुए जमीनी हकीकत से दूर करार दिया है।

सिंचाई, सौर पंप और भूमि पट्टा राहत

बजट में सिंचाई से जुड़े कार्यों पर 11 हजार 300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। आगामी वित्त वर्ष के दौरान 50 हजार सौर पंप स्थापित करने का लक्ष्य है, जिन पर लगभग 1 हजार 500 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा। कृषि भूमि पट्टों की बकाया किस्तें 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक एकमुश्त जमा कराने पर ब्याज में शत-प्रतिशत छूट दी जाएगी।

कृषि यंत्रीकरण और बीज स्वावलंबन

कृषि यंत्रीकरण के लिए पावर टिलर, डिस्क हल, कल्टीवेटर, हैरो और रीपर जैसे उपकरणों पर 160 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा, जिससे करीब 50 हजार किसान लाभान्वित होंगे। 96 करोड़ रुपये की लागत से 500 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना के तहत 90 प्रतिशत अनुदान पर 70 हजार क्विंटल बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पर 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे और लगभग 3 लाख किसानों को लाभ मिलेगा। 5 हजार किसानों को नेपियर घास का नि:शुल्क वितरण भी किया जाएगा।

एग्री स्टैक और संरक्षित खेती

किसानों को डेटा आधारित परामर्श, फसल योजना और बाजार सूचना उपलब्ध कराने के लिए एग्री स्टैक परियोजना प्रबंधन इकाई का गठन किया जाएगा। 3 हजार 300 किसानों को राज्य से बाहर अध्ययन भ्रमण पर भेजा जाएगा।

संरक्षित खेती के तहत ग्रीनहाउस, पॉलीहाउस, शेडनेट और लो टनल के लिए 4 हजार किसानों को 200 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। वर्टिकल सपोर्ट सिस्टम आधारित खेती के लिए 5 हजार किसानों को सहायता प्रदान की जाएगी तथा 500 सोलर फसल ड्रायर भी वितरित किए जाएंगे। 

ऋण और ब्याज अनुदान

ब्याज मुक्त अल्पकालीन फसली ऋण योजना के तहत 35 लाख से अधिक किसानों को 25 हजार करोड़ रुपये का ऋण दिया जाएगा। इस पर 800 करोड़ रुपये का ब्याज अनुदान प्रस्तावित है। दीर्घकालीन सहकारी ऋणों पर 590 करोड़ रुपये के ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाएगा, जिससे लगभग 26 हजार किसान और लघु उद्यमी लाभान्वित होंगे।

विपणन और भंडारण

‘भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश में 250 और 500 टन क्षमता के 50-50 गोदामों का निर्माण किया जाएगा, जिस पर लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा 200 नवगठित गोदाम-विहीन ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 100 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम और कार्यालय भवन का निर्माण 30 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा।

पशुपालन और डेयरी क्षेत्र

200 ग्राम पंचायतों में पशु चिकित्सा उपकेंद्र खोले जाएंगे, 25 उपकेंद्रों को पशु चिकित्सालय और 50 पशु चिकित्सालयों को प्रथम श्रेणी में क्रमोन्नत किया जाएगा। राजस्थान सहकारी डेयरी संरचना विकास कोष को 1 हजार करोड़ से बढ़ाकर 2 हजार करोड़ रुपये किया गया है।

मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना के तहत 700 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा, जिससे लगभग 5 लाख पशुपालक लाभान्वित होंगे। एनसीआर, उत्तरप्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सरस उत्पादों के बिक्री केंद्र स्थापित करने पर 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

ग्रामीण क्षेत्रों में 1 हजार नए दुग्ध संग्रह केंद्र स्थापित किए जाएंगे। अलवर में 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र 200 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 500 डेयरी बूथों का आवंटन किया जाएगा। 

विशेष उत्पादों के लिए 'राज गिफ्ट'

राजस्थान के विशिष्ट कृषि-प्रसंस्कृत उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा उनसे जुड़े किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के उद्देश्य से राज गिफ्ट (जियोग्राफिकल इंडिकेशन फॉर ट्रांसफ़ॉर्मेशन ऑफ प्रोडक्शन एंड लाइवलीहुड्स)’ मिशन शुरू किया गया है।

प्याज, किन्नू और आम उत्कृष्टता केंद्र

अलवर में प्याज और सब्जियों, श्रीगंगानगर में किन्नू तथा बांसवाड़ा में आम के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। जोधपुर, कोटा और उदयपुर में जैविक खाद्य बाजार शुरू किए जाएंगे। चयनित जिलों में 2 हजार किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं, व्यापारियों और निर्यातकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

नई मंडियों का ऐलान 

बजट में प्रावधान किया गया है कि राज्य में नई कृषि उपज मंडियों, सब्ज़ी मंडियों, जिला सहकारी उपभोक्ता भंडार और उपहार विक्रय केंद्रों की स्थापना की जाएगी। बागीदौरा-बांसवाड़ा, सिकराय-दौसा, राजियासर स्टेशन (सूरतगढ़)-श्रीगंगानगर में नवीन कृषि उपज अनाज मण्डी एवं सवाई माधोपुर व बयाना-भरतपुर में सब्जी मण्डी स्थापित की जाएगी।

नए जिलों में सहकारी उपभोक्ता भंडार

वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि नवगठित जिलों में जिला सहकारी उपभोक्ता भण्डार खोले जाएगे। इसी के साथ समस्त जिलों में नवीन उपहार विक्रय केन्द्र खुलेंगे।  किसानों को गर्मी एवं बरसात से बचाव के लिए शैड निर्माण सहित मण्डियों तक पहुंच मार्ग एवं यार्डों का निर्माण सहित अन्य आधारभूत कार्यों के लिए 350 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे।  

सियासी प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे "विकसित राजस्थान 2047" की दिशा में ऐतिहासिक बजट बताया। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को मजबूती देने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। राजस्थान के कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने दावा किया कि यह बजट किसानों, पशुपालकों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण वर्ग के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

वहीं, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि यह डबल इंजन सरकार का जनता पर दोहरा कुठाराघात है। किसान नेता रामपाल जाट ने कहा कि पिछले वर्ष के बजट की घोषणाएं आज तक जमीन पर नहीं उतरीं और इस बार फिर नई घोषणाओं की बौछार कर दी गई। यह सरकार की नीयत नहीं, किसानों को भ्रमित करने की नीति को दिखाता है।