तेलंगाना सरकार ने कम और असमान बारिश, लंबे समय तक शुष्क मौसम तथा मिट्टी में नमी की कमी को देखते हुए 2026 के खरीफ सीजन के लिए 31 जिलों के 365 मंडलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इनमें 111 मंडलों को गंभीर और 254 को मध्यम सूखा प्रभावित श्रेणी में रखा गया है। राज्य के 33 जिलों में से सिर्फ हैदराबाद और पेद्दापल्ली इस अधिसूचना से बाहर हैं।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य में सूखे की स्थिति के वैज्ञानिक आकलन और अल नीनो के प्रभाव तथा बारिश की स्थिति की समीक्षा के लिए गठित कैबिनेट उपसमिति की सिफारिशों के बाद यह आदेश जारी किया। उपसमिति ने 23 अक्टूबर को स्थिति की समीक्षा की थी।
इस अधिसूचना में तेलंगाना के कुल 621 मंडलों में से 365 मंडल शामिल हैं, जो कुल संख्या का लगभग 58.8 प्रतिशत है। राज्य सरकार का कहना है कि सूखे का आकलन राष्ट्रीय सूखा प्रबंधन नियमावली, 2016 के निर्धारित मानकों के अनुसार किया गया। इसमें बारिश की स्थिति, बुवाई वाले क्षेत्र, मिट्टी में नमी, भूजल की स्थिति और अन्य संकेतकों को ध्यान में रखा गया है।
राज्य में 1 जून से 30 सितंबर के बीच 615.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 740.6 मिमी होती है। इस तरह बारिश में 17 प्रतिशत की कमी रही। सरकार ने प्रतिकूल मानसून परिस्थितियों के लिए मजबूत होते अल नीनो प्रभाव, बंगाल की खाड़ी में कमजोर निम्न दबाव प्रणालियों और फसलों की महत्वपूर्ण विकास अवस्थाओं के दौरान लंबे शुष्क दौर को जिम्मेदार बताया है।
बारिश की कमी से फसली क्षेत्र घटा
बारिश की कमी ने राज्य के कई हिस्सों में कृषि गतिविधियों को प्रभावित किया है। खरीफ फसलों का कुल क्षेत्रफल 139.28 लाख एकड़ से घटकर 126.06 लाख एकड़ रह गया है। वहीं, धान का रकबा 18 प्रतिशत घटकर 69.19 लाख एकड़ से 57 लाख एकड़ रह गया।
पानी की उपलब्धता भी चिंता का विषय बन गई है। आकलन के अनुसार, राज्य के प्रमुख और मध्यम जलाशयों में उपलब्ध जल भंडारण 179.63 टीएमसी (हजार मिलियन घन फुट) रहा, जबकि इन जलाशयों की कुल क्षमता 585 टीएमसी है। इससे सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, पशुधन और बिजली उत्पादन के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
जिलों में सूखे की गंभीरता अलग-अलग है। नलगोंडा और संगारेड्डी में सबसे अधिक 28-28 मंडल सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं। इसके बाद सूर्यापेट में 23 मंडल प्रभावित हैं। आदिलाबाद और विकाराबाद में 20-20 मंडल सूखाग्रस्त हैं। मेडक में सबसे कम एक मंडल प्रभावित है, जबकि राजन्ना सिरसिल्ला में दो मंडल सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं। जगतियाल, करीमनगर और मुलुगु में तीन-तीन मंडल प्रभावित हैं।
सरकार ने जिला कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों के राजपत्रों में सूखे की अधिसूचना प्रकाशित करने का निर्देश दिया है। अधिसूचित नगरपालिका और शहरी क्षेत्रों को मंडल स्तर की सूखा सूची में शामिल नहीं किया जाएगा। हालांकि, पेयजल आपूर्ति के संदर्भ में इन क्षेत्रों को सूखा प्रभावित माना जाएगा।
राहत उपाय और कृषि ऋण के पुनर्गठन की तैयारी
सरकारी आदेश के अनुसार जिला प्रशासन को सूखे से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। इनमें प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से फसल नुकसान के लिए इनपुट सब्सिडी, पेयजल आपूर्ति बढ़ाना, चारे की व्यवस्था करना और जरूरत पड़ने पर पशु शिविर स्थापित करना शामिल हैं। अधिकारियों को वीबी-जी राम जी (मनरेगा की जगह) कार्यक्रम के तहत रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए भी कहा गया है।
जिला कलेक्टरों को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) के साथ समन्वय कर कृषि ऋणों के पुनर्गठन की संभावनाओं पर काम करने और भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के तहत कर्ज वसूली के लिए दबाव नहीं डालने का निर्देश दिया गया है।
कृषि एवं सहकारिता विभाग को निर्देश दिया गया है कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) से केंद्रीय सहायता प्राप्त होने के एक महीने के भीतर पात्र किसानों को डीबीटी के माध्यम से इनपुट सब्सिडी उपलब्ध कराई जाए। लाभार्थियों की सूची संबंधित जिला कलेक्टरों और राज्य सरकार की वेबसाइटों पर प्रकाशित की जाएगी।
योजना विभाग को केंद्रीय सहायता की मांग से संबंधित ज्ञापन तैयार कर सात दिनों के भीतर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को सौंपने के लिए कहा गया है। इसके बाद इसे संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों को भेजा जाएगा।
राज्य ने मांगा 20,000 करोड़ रुपये का राहत पैकेज
तेलंगाना में सूखे की घोषणा से पहले राज्य विधानसभा ने 18 सितंबर को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी। राज्य ने 20,000 करोड़ रुपये के विशेष सूखा राहत पैकेज, एनडीआरएफ से सहायता और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) में अपने हिस्से की राशि जारी करने की मांग की है।
राज्य की मांगों में फसल नुकसान का मुआवजा, इनपुट सब्सिडी, पेयजल और पशु चारे की व्यवस्था तथा जल निकायों के पुनरुद्धार के लिए सहायता भी शामिल है। तेलंगाना ने वीबी-जी राम जी कार्यक्रम के तहत 50 दिन का अतिरिक्त रोजगार देने की मांग की है, जिसका पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करे। इसके अलावा, राज्य ने उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाने और 1,500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली देने का भी अनुरोध किया है।
तेलंगाना ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) व्यवस्था के तहत उधारी सीमा को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत करने की मांग भी की है। राज्य ने केंद्रीय और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत पात्रता मानकों में ढील देकर अतिरिक्त सहायता देने का अनुरोध किया है।
केंद्र से मिलने वाली सहायता और किसानों को उपलब्ध कराए जाने वाले राहत उपायों का अंतिम दायरा आकलन और मंजूरी की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल राज्य के सामने फसल नुकसान की भरपाई, ग्रामीण आजीविका की सुरक्षा और जल संसाधनों का प्रबंधन करने की चुनौती है, क्योंकि मानसून की कमी का असर खरीफ सीजन के बाद भी बना रह सकता है।