उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चुनाव मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत होंगे, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण शामिल है। पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट लंबित होने के आधार पर चुनाव टाले नहीं जा सकते। इस आदेश के बाद प्रदेश में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि, राज्य सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है।
न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने प्रयागराज के इम्तियाज हुसैन और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया। जब तक नए चुनाव संपन्न नहीं हो जाते, तब तक निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य करते रहेंगे।
पंचायत चुनाव में देरी की वजह?
पंचायत चुनाव में देरी का प्रमुख कारण अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण तय करने की प्रक्रिया है। राज्य सरकार ने इसके लिए 18 मई 2026 को समर्पित OBC आयोग का गठन किया था। पंचायत चुनाव से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट आनी है, जो अभी तक नहीं आई है। आयोग का सर्वेक्षण 75 में से 42 जिलों में पूरा हो चुका है। सरकार की दलील है कि आरक्षण की प्रक्रिया पूरी हुए बिना चुनाव कराना संभव नहीं है।
गौरतलब है कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 मई को समाप्त हो चुका है, जबकि जुलाई में ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल भी पूरा हो गया। पंचायत चुनाव कराने के बजाय राज्य सरकार ने ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त कर दिया। माना जा रहा है कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में अपील की संभावना
अगले तीन महीनों में जनगणना का दूसरा चरण चलेगा और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो जाएंगी। OBC आयोग का सभी जिलों में सर्वेक्षण पूरा करना और रिपोर्ट सौंपना भी बाकी है। ऐसे में राज्य सरकार के लिए अगले तीन महीनों में पंचायत चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण दिखाई देता है। संभावना है कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती है।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत किया है और चुनाव में देरी को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की है। दूसरी ओर, पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार अदालत का पूरा आदेश देखने के बाद अपना विस्तृत पक्ष रखेगी।