ड्यूटी-फ्री कपास आयात की समय-सीमा बुधवार को समाप्त हो गई, लेकिन इसे आगे बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार की ओर से कोई नई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। ऐसे में 1 जनवरी से कपास के आयात पर फिर से 11 प्रतिशत सीमा शुल्क लागू हो गया है।
कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर ललित कुमार गुप्ता ने रूरल वॉयस को बताया कि 1 जनवरी, 2026 से कॉटन आयात पर 10 फीसदी सीमा शुल्क और एक फीसदी उपकर समेत कुल 11 फीसदी का सीमा शुल्क लागू हो गया है। आर्थिक रूप से कमजोर देश (लिस्ट डेवलप्ड कंट्रीज) से आयात पर 5.5 फीसदी का कुल सीमा लागू है। इनमें कुछ अफ्रीकी देश आते हैं।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सीसीआई द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कॉटन की खरीद जारी है और एक जनवरी, 2026 तक सीसीआई ने 65 लाख गांठ (170 किलोग्राम) कॉटन की खरीद की है। उन्होंने बताया कि तय गुणवत्ता की कॉटन मिलने तक सीसीआई की खरीद जारी रहेगी।
इससे कपास उगाने वाले किसानों को राहत मिलेगी, हालांकि टेक्सटाइल उद्योग की ओर से ड्यूटी-फ्री आयात की समय-सीमा आगे बढ़ाने की कोशिशें की जा रही थीं। उद्योग जगत को आशंका है कि शुल्क लागू होने से आयात महंगा होगा, हालांकि इससे घरेलू बाजार में कपास की कीमतों को सहारा मिल सकता है।
अगस्त 2025 में एक अधिसूचना जारी कर केंद्र सरकार ने 30 सितंबर तक के लिए कपास आयात पर लागू 11 फीसदी सीमा शुल्क समाप्त कर दिया था, जिसे बाद में दिसंबर के अंत तक बढ़ाया गया। इस छूट का मकसद घरेलू आपूर्ति बढ़ाना और उन टेक्सटाइल इकाइयों को राहत देना था, जो अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण दबाव में थीं।
टेक्सटाइल मिलों की चिंता की बड़ी वजह कपास की घटती उपलब्धता है। इस साल कपास की आवक पिछले साल की तुलना में कम से कम 60 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलो) कम है। इसके साथ ही, इस वर्ष कुल उत्पादन भी 300 लाख गांठ से नीचे रहने का अनुमान है।
उद्योग का तर्क है कि सीमित घरेलू आपूर्ति और बढ़ती लागत के बीच शुल्क दोबारा लागू होने से स्पिनिंग और टेक्सटाइल इकाइयों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। यदि ड्यूटी-फ्री आयात को लेकर कोई नई अधिसूचना जारी नहीं होती है, तो आयातित कपास महंगी होगी, जिससे घरेलू कीमतों में मजबूती आ सकती है, लेकिन कपड़ा उद्योग के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ेगी।
पिछले कुछ महीनों में ड्यूटी-फ्री आयात के चलते चलते विदेशी कपास भारतीय बाजार में अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर पहुंच रही थी। इससे कपड़ा उद्योग को कच्चा माल आसानी से मिल रहा था, लेकिन घरेलू किसानों को कीमतों के दबाव का सामना करना पड़ा। अब छूट खत्म होने के बाद स्थिति बदल सकती है।
ड्यूटी-फ्री आयात के चलते किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दाम पर कपास बेचने को मजबूर हैं। बाजार में कपास की कीमतें 7,500 से 7,700 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बनी हुई हैं, जबकि सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8,110 रुपये प्रति क्विंटल है। इससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। किसान संगठनों की ओर से कपास आयात पर शुल्क दोबारा लागू करने की मांग की जा रही थी।
क्यों हटाई गई थी आयात ड्यूटी
अगस्त 2025 में अंतरराष्ट्रीय व्यापार तनाव, खासकर अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद के बीच भारत ने कपास आयात पर लगने वाला 11 प्रतिशत शुल्क हटा दिया था। इसका मकसद घरेलू उद्योग को राहत देना और कच्चे माल की कमी को पूरा करना था। अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर के मध्य तक भारत करीब 36 लाख गांठ कपास का आयात कर चुका था, जिसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी ब्राजील की थी। इसके बाद अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का स्थान रहा। दिसंबर के अंत तक करीब 50 लाख गांठ कॉटन का आयात होने का अनुमान उद्योग ने लगाया था।