कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स के इस्तेमाल को बढ़ावा देते हुए एग्रीटेक स्टार्टअप एग्रोग्रेड (Agrograde) ने सुपारी की छंटाई के लिए AI-आधारित ऑटोनॉमस ऑप्टिकल सॉर्टिंग प्रणाली विकसित की है। इस तकनीक की पहली व्यावसायिक स्थापना कर्नाटक के मैंगलोर स्थित सुपारी कारोबारी प्रतिष्ठान विकास ट्रेडर्स में की गई है। कंपनी का दावा है कि यह तकनीक सुपारी की गुणवत्ता जांच, छंटाई और प्रसंस्करण में लगने वाले श्रम को कम करने में मदद करेगी।
एग्रोग्रेड के अनुसार, यह मशीन एक घंटे में लगभग एक टन सुपारी की छंटाई कर सकती है। इसके जरिए मैंगलोर स्थित इकाई में प्रतिदिन करीब आठ टन सुपारी का प्रसंस्करण संभव है। मशीन कंप्यूटर विजन और AI तकनीक की मदद से प्रत्येक सुपारी की जांच करती है और उसमें मौजूद बाहरी दोषों की पहचान कर खराब सामग्री को अच्छी सुपारी से अलग करती है।
रंग के साथ बाहरी दोषों की भी पहचान
पारंपरिक कलर-सॉर्टिंग मशीनें मुख्य रूप से रंगों में अंतर के आधार पर कृषि उत्पादों की छंटाई करती हैं। इसके विपरीत, एग्रोग्रेड की नई तकनीक सुपारी की सतह का विश्लेषण कर ऐसे बाहरी दोषों की पहचान करने के लिए विकसित की गई है, जिन्हें केवल रंग के अंतर से पहचानना मुश्किल हो सकता है।
एग्रोग्रेड के सह-संस्थापक राकेशकुमार बरई ने कहा कि कंपनी की मशीनें विकसित करने से पहले संबंधित कृषि उत्पाद के आकार, सतह, गति, धूल, अवशेष और उसकी विभिन्न किस्मों की विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है। इसके साथ ही मौजूदा गुणवत्ता जांच प्रक्रिया को भी समझा जाता है, ताकि तकनीक को वास्तविक कारोबारी जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके।
उन्होंने बताया कि सुपारी के लिए इस ऑटोनॉमस ऑप्टिकल सॉर्टर को विकसित करने में करीब पांच महीने लगे और इस दौरान उत्पाद के तीन संस्करण तैयार किए गए। विकास ट्रेडर्स के सहयोग से तकनीक को सुपारी की आपूर्ति शृंखला की जरूरतों के अनुसार विकसित किया गया है।
वेक्टर आर्किटेक्चर पर आधारित
मशीन का डिजाइन एग्रोग्रेड की पेटेंट के लिए आवेदन की गई वेक्टर (Vector) आर्किटेक्चर पर आधारित है। कंपनी के मुताबिक, यह तकनीक मशीन के विजन सिस्टम से गुजरने वाले उत्पाद की सतह का व्यापक कवरेज सुनिश्चित करती है। साथ ही, यह आकार और आकृति में अधिक विविधता वाले कृषि उत्पादों की छंटाई में भी सक्षम है।
कंपनी के हेड ऑफ प्रोडक्ट इंजीनियरिंग अनिकेत घाडगे ने बताया कि वेक्टर आर्किटेक्चर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि जटिल तकनीक वाली मशीनों का संचालन और रखरखाव आसान रहे। इसे गर्मी, धूल और नमी जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने के लिए भी तैयार किया गया है।
इस तकनीक का विकास मैंगलोर स्थित विकास ट्रेडर्स के साथ मिलकर किया गया। सुपारी के कारोबार में दशकों का अनुभव रखने वाली इस कंपनी के साथ सहयोग का उद्देश्य मशीन को सुपारी की विशेषताओं और वास्तविक गोदामों में काम करने की परिस्थितियों के अनुकूल बनाना था। इसमें धूल, बाहरी अशुद्धियों और अधिक नमी जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखा गया।
AI मॉडल की सटीकता से बढ़कर 89% हुई
एग्रोग्रेड के मुताबिक, शुरुआती व्यावसायिक इस्तेमाल के दौरान मशीन की छंटाई सटीकता करीब 75% थी। संचालन से अधिक डेटा उपलब्ध होने और AI मॉडल को अपडेट किए जाने के बाद यह सटीकता बढ़कर लगभग 89% हो गई है। कंपनी को उम्मीद है कि अतिरिक्त डेटा के आधार पर मॉडल में आगे भी सुधार होगा।
मशीन की कार्यप्रणाली में प्रत्येक सुपारी की 10 से 12 तस्वीरें ली जाती हैं। कंपनी की पेटेंट के लिए आवेदन की गई वेक्टर तकनीक के जरिए तस्वीरें जुटाई जाती हैं, जिनका विश्लेषण कंपनी के विशेष AI मॉडल कुछ ही मिलीसेकंड में करते हैं। इसके बाद मशीन दोषपूर्ण सुपारी को अलग कर देती है।
कंपनी के अनुसार, इन AI मॉडल को कृषि उत्पादों की लाखों तस्वीरों के आधार पर प्रशिक्षित किया गया है। इनके संचालन के लिए NVIDIA के हार्डवेयर पर आधारित उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया जाता है।
मैनुअल छंटाई पर निर्भरता होगी कम
विकास ट्रेडर्स के अनुसार, ऑटोमेशन से पहले सुपारी की जांच और छंटाई के लिए मुख्य रूप से श्रमिकों पर निर्भर रहना पड़ता था। कंपनी के मुताबिक, एक श्रमिक प्रतिदिन लगभग दो बोरी सुपारी की मैनुअल जांच और छंटाई कर पाता था, जबकि करीब 15 श्रमिकों की टीम एक दिन में 40 से 45 बोरी तक प्रसंस्करण कर सकती थी।
इसके अलावा, मशीन प्रत्येक खेप की छंटाई के बाद गुणवत्ता संबंधी रिपोर्ट भी तैयार करती है। इसमें सुपारी के आकार के आधार पर वितरण, पहचाने गए दोष, दोषों की तीव्रता और पैक की गई सुपारी की संख्या जैसी जानकारियां शामिल होती हैं। इससे कारोबारियों को गुणवत्ता की निगरानी और प्रसंस्करण संबंधी फैसले लेने में मदद मिल सकती है।
विकास ट्रेडर्स के राज पडालिया ने कहा कि वह यह देखना चाहते थे कि सुपारी उद्योग में AI और रोबोटिक्स का इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने एग्रोग्रेड के साथ मिलकर मशीन के कई संस्करणों पर काम किया, जिसके बाद छंटाई प्रक्रिया को लगभग पूरी तरह स्वचालित बनाने में सफलता मिली। पडालिया के अनुसार, विकास ट्रेडर्स सुपारी उद्योग की पहली निजी कंपनियों में है, जिसने इस स्तर की AI तकनीक को अपनाया है। उन्होंने भारतीय स्टार्टअप द्वारा हार्डवेयर और ऑटोमेशन के क्षेत्र में किए जा रहे विकास की भी सराहना की।
कृषि उत्पादों की छंटाई में बढ़ रहा ऑटोमेशन
एग्रोग्रेड कंप्यूटर विजन, AI और रोबोटिक्स आधारित तकनीकों के जरिए कृषि उत्पादों की ग्रेडिंग, छंटाई, वजन और पैकिंग जैसी प्रक्रियाओं को स्वचालित करने पर काम कर रही है। कंपनी प्याज, आलू और सेब सहित विभिन्न कृषि उत्पादों के लिए भी समाधान विकसित कर रही है।
कंपनी के मुताबिक, हाल ही में उसने भारत के 15 राज्यों में अपनी 150वीं मशीन स्थापित की है। सुपारी उद्योग में नई तकनीक की शुरुआत ऐसे क्षेत्र में ऑटोमेशन के विस्तार का संकेत है, जहां गुणवत्ता जांच और छंटाई का काम अब तक काफी हद तक मैनुअल निरीक्षण पर निर्भर रहा है।