भारतीय किसानों को जल्द ही मूंगफली की दो नई हाई-ओलिक किस्मों का लाभ मिलने की संभावना है। ये किस्में अधिक उपज, बेहतर तेल गुणवत्ता और बेहतर बाजार मूल्य प्रदान कर सकती हैं। इन किस्मों की पहचान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तहत अखिल भारतीय समन्वित मूंगफली अनुसंधान परियोजना (AICRP-G) की वैरायटी आइडेंटिफिकेशन कमेटी (VIC) ने की है। इनसे देश के खाद्य तेल क्षेत्र को मजबूती मिलने और खाद्य तेल आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को भी बल मिलेगा।
आईसीजीवी 201214 और आईसीजीवी 181030 नामक इन दोनों किस्मों को राष्ट्रीय स्तर पर रिलीज किया जाएगा। इसके लिए इन किस्मों की पहचान 21 से 23 अप्रैल, 2026 के दौरान पुणे में आयोजित AICRP-G की वार्षिक बैठक में की गई। इन किस्मों का विकास इक्रीसैट (ICRISAT), धारवाड़ स्थित कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय तथा जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से किया गया है।
आईसीजीवी 181030 देश की पहली हाई-ओलिक मूंगफली किस्म है, जिसे ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में खेती के लिए अनुशंसित किया गया है। यह मध्यम अवधि की स्पेनिश बंच किस्म खरीफ मौसम में गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड और पश्चिम बंगाल के किसानों के लिए भी उपयुक्त है। इक्रीसैट के अनुसार, इस किस्म में लगभग 78 प्रतिशत ओलिक एसिड है। तीन वर्षों के परीक्षण में इसने जोन-4 में मानक किस्म गिरनार-3 की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक फली उत्पादन तथा जोन-2 में टीजी-37ए की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक उपज दर्ज की।
दूसरी किस्म आईसीजीवी 201214 को गुजरात और राजस्थान के लिए अनुशंसित किया गया है। इसमें 81 प्रतिशत ओलिक एसिड, 53 प्रतिशत तेल और 27 प्रतिशत प्रोटीन है। इसके दाने बड़े और आकर्षक हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग रहती है। तीन वर्षों के मल्टी-लोकेशन परीक्षणों में इस किस्म ने व्यापक रूप से उगाई जाने वाली जेएल-501 की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक गिरी (कर्नेल) उपज दी और सभी परीक्षणों में मानक किस्मों से अधिक तेल प्रतिशत दर्ज किया।
हाई-ओलिक मूंगफली से प्राप्त तेल की शेल्फ लाइफ अधिक होती है, इसमें ऑक्सीकरण के प्रति अधिक स्थिरता होती है और इसे पोषण की दृष्टि से भी बेहतर माना जाता है। इसलिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग बढ़ रही है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये नई किस्में किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के साथ राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन (NMEO-Oilseeds) के तहत मूंगफली की खेती के विस्तार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।