सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहकारिता क्षेत्र के विस्तार के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि सरकार सहकारी क्षेत्र में एक जीवन बीमा कंपनी स्थापित करेगी, भारत टैक्सी पहल का विस्तार अगले दो वर्षों में 500 शहरों तक किया जाएगा और भारत बीज सहकारी समिति को अगले तीन वर्षों में देश की सबसे बड़ी बीज उत्पादन कंपनी बनाया जाएगा।
नई दिल्ली में आयोजित सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि मंत्रालय ने पिछले पांच वर्षों में सहकारिता क्षेत्र की चुनौतियों की पहचान कर उनके समाधान, भविष्य की संभावनाओं और क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है।
सहकारिता क्षेत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अमित शाह ने कहा कि आज देश में कृषि ऋण का लगभग 20 प्रतिशत, उर्वरकों के वितरण का 35 प्रतिशत और चीनी उत्पादन का 31 प्रतिशत कार्य सहकारी संस्थाओं के माध्यम से हो रहा है।
उन्होंने बताया कि सहकारी जीवन बीमा कंपनी की स्थापना से बीमा क्षेत्र में सहकारी संस्थाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उनके लिए नए अवसर पैदा होंगे। शाह ने कहा कि उर्वरक क्षेत्र की अग्रणी सहकारी संस्था इफको (IFFCO) पहले से ही एक जापानी कंपनी के साथ संयुक्त उद्यम के माध्यम से बीमा क्षेत्र में अपनी सफल उपस्थिति दर्ज करा चुकी है।
शाह ने भारत टैक्सी पहल की प्रगति का भी उल्लेख किया और कहा कि यह प्लेटफॉर्म शुरू होने के बाद से अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। इसी को देखते हुए अगले दो वर्षों में देश के 500 शहरों तक इसका विस्तार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान में लगभग 8.5 लाख सहकारी समितियां हैं, जिनसे 30 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। यह नेटवर्क ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण आधारशिला है। शाह ने कहा कि पांच वर्ष पहले स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की स्थापना ने लंबे समय से उपेक्षित सहकारिता आंदोलन को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान की।
सहकारिता मंत्री ने कहा कि मंत्रालय की पहल से लंबे समय बाद राष्ट्रीय स्तर पर नौ सहकारी समितियों का गठन हुआ है, जिनमें तीन नई राष्ट्रीय सहकारी समितियां भी शामिल हैं। इन नौ समितियों के माध्यम से सहकारिता को देश से लेकर गांव तक नौ अलग-अलग क्षेत्रों से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार इफको (IFFCO), कृभको (KRIBHCO), अमूल (Amul) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने सहकारिता आंदोलन को पहचान दिलाई और वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठा अर्जित की है, उसी तरह ये नौ राष्ट्रीय सहकारी समितियां भी भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर की बड़ी सहकारी संस्थाओं के रूप में विकसित होंगी।
उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता, पेशेवर प्रबंधन और बेहतर प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए कई सुधार लागू किए हैं। साथ ही, देशभर की सहकारी समितियों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, जिससे नीति निर्माण और क्षेत्र के विस्तार को गति मिलेगी।
सहकारिता क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करने के लिए गुजरात के आणंद में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की भी स्थापना की गई है। यह संस्थान सहकारी संस्थाओं की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
शाह ने कहा कि सहकारी आंदोलन अब केवल डेयरी, चीनी और उर्वरक तक सीमित नहीं है, बल्कि अनेक नए आर्थिक क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में सहकारिता आंदोलन की निर्णायक भूमिका होगी।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि भारत बीज सहकारी समिति को अगले तीन वर्षों में देश की सबसे बड़ी बीज उत्पादन कंपनी बनाया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक राज्य में नई उत्पादन इकाइयां स्थापित की जाएंगी, जिससे किसानों को शुद्ध, प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
शाह ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से अब किसानों के उत्पाद गांवों से सीधे वैश्विक बाजारों तक पहुंच रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। उन्होंने कहा कि जब भारत वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब समृद्ध भारत की मजबूत नींव सहकारिता आंदोलन ही होगा।
स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय के गठन के समय उठी आशंकाओं का उल्लेख करते हुए शाह ने स्पष्ट किया कि मंत्रालय का उद्देश्य राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि नीति निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में विपक्ष शासित राज्यों ने भी मंत्रालय पर किसी प्रकार के हस्तक्षेप का आरोप नहीं लगाया।
शाह ने कहा कि आज जैविक उत्पादन को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। हमें देश के 140 करोड़ नागरिकों के साथ-साथ दुनिया भर के लोगों के स्वास्थ्य की भी चिंता है। इसलिए भारत के किसानों को जैविक उत्पादन बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह धारणा गलत है कि रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करने से उत्पादन घट जाएगा। पिछले पांच वर्षों के अनुभव ने साबित किया है कि रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में कमी से उत्पादन कम नहीं होता, बल्कि उत्पादन बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरता भी सुरक्षित रहती है। उन्होंने कहा कि सरकार चीनी और डेयरी क्षेत्रों में 100 प्रतिशत सर्कुलर इकोनॉमी लागू कर रही है। इसके तहत ऐसा जैविक खाद तैयार किया जाएगा, जो डीएपी (DAP) का प्रभावी विकल्प होगा। यह स्वदेशी खाद डीएपी की तुलना में सस्ती, बेहतर गुणवत्ता वाली और खेतों के लिए अधिक लाभकारी होगी। इसके लिए देश के अनेक हिस्सों में सहकारी समितियां स्थापित की जा रही हैं।
शाह ने सभी राज्यों के डेयरी फेडरेशन से अगले दो वर्षों में दूध उत्पादक किसानों की संख्या में कम से कम 35 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित करने का आग्रह किया। इसके लिए 35 प्रतिशत अधिक गांवों में नई पैक्स गठित करनी होंगी, प्राथमिक डेयरी समितियों की स्थापना करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी किसान दूध आपूर्ति के लिए डेयरी नेटवर्क से बाहर न रहे। उन्होंने कहा कि सहकारी चीनी क्षेत्र में सरकार ने गन्ने से चीनी उत्पादन के साथ-साथ शीरे (मोलासेस) से एथेनॉल, बगास से ऊर्जा उत्पादन, प्रेसमड से जैविक खाद और सल्फर उत्पादन तक की पूरी व्यवस्था विकसित कर दी है। यह प्रयोग सफल रहा है और इसके लिए विशेष सहकारी समितियों का भी गठन किया गया है।
समारोह के दौरान सहकारिता क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से कई परियोजनाओं का शुभारंभ भी किया गया। इनमें 75 हजार टन क्षमता वाले 135 अनाज भंडारण गोदामों का हस्तांतरण, 85 नए गोदामों का उद्घाटन तथा 47 अतिरिक्त गोदामों का वर्चुअल शिलान्यास शामिल रहा।
अमित शाह ने अमूल और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) की ओर से विकसित किए जा रहे सहकार वन परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इसके साथ ही भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) के उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और महाराष्ट्र के जलगांव स्थित टिशू कल्चर केंद्रों का भी शुभारंभ किया गया।
इस मौके पर 50,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को ई-पैक्स में परिवर्तित करने की घोषणा की गई। कार्यक्रम के दौरान भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के बीच देश की बीज प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर भी किए गए। इस अवसर पर डेयरी सहकारी समितियों के लिए मॉडल उप-विधियों का विमोचन तथा सहकारिता मंत्रालय की पांच वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित एक स्मारिका भी जारी की गई।
कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि जितना मजबूत सहकारिता आंदोलन होगा, उतनी ही मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनेगी। उन्होंने बताया कि भारत 2024-25 में 24.8 करोड़ टन दूध उत्पादन के साथ दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF) के तहत 615 परियोजनाओं में 29,268 करोड़ रुपये के निवेश से निजी क्षेत्र और सहकारी संस्थाओं की भागीदारी के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 4 करोड़ लीटर दूध प्रसंस्करण क्षमता विकसित की गई है।