यूपी में पांचवें चरण में 12 जिलों की 61 सीटों पर शाम पांच बजे तक 54 फीसदी मतदान

पांचवें चरण में के प्रमुख उम्मीदवारों में सिराथु से उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य, इलाहाबाद पश्चिम से सिद्धार्थ नाथ सिंह और कुंडा से राजा भैया शामिल हैं। इस चरण में प्रदेश के सात मंत्री चुनाव लड़ रहे हैं

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण में रविवार को 12 जिलों की 61 सीटों पर शाम पांच बजे तक 53.93 फीसदी मतदान हुआ। ये सीटें उत्तर में तराई से लेकर दक्षिण में बुंदेलखंड और अवध क्षेत्र में हैं। यहां कुल 693 उम्मीदवार हैं जिनमें 90 महिलाएं हैं। मतदाताओं की संख्या 2.2 करोड़ है। 61 सीटों में से 13 अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित हैं। पांचवें चरण में के प्रमुख उम्मीदवारों में सिराथु से उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य, इलाहाबाद पश्चिम से सिद्धार्थ नाथ सिंह और कुंडा से राजा भैया शामिल हैं। इस चरण में प्रदेश के सात मंत्री चुनाव लड़ रहे हैं।

2012 के विधानसभा चुनाव में 61 में से 41 सीटें समाजवादी पार्टी को और 5 सीटें भारतीय जनता पार्टी को मिली थीं। बहुजन समाज पार्टी को 7 और कांग्रेस को 6 सीटों पर जीत मिली थी। वोट शेयर देखें तो समाजवादी पार्टी को 30.8 फीसदी, बहुजन समाज पार्टी को 24.8 फीसदी, भाजपा को 13.1 फीसदी और कांग्रेस को 12.8 फीसदी वोट मिले थे।

सीटों की संख्या 2017 में बिल्कुल उलट गई। 61 सीटों में से भाजपा को 47 तो समाजवादी पार्टी को सिर्फ 5 सीटें मिली थीं। बहुजन समाज पार्टी तीन और कांग्रेस एक सीट पर सिमट कर रह गई। वोट प्रतिशत की बात करें तो भाजपा को 37.3 फ़ीसदी, सपा को 21.7 फीसदी, बसपा को भी 21.7 फ़ीसदी वोट मिले थे। कांग्रेस को सिर्फ 6.4 फीसदी मतदाताओं ने वोट दिए।

2019 के लोकसभा चुनाव में भी विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से देखें तो सीटों की संख्या 2017 के आसपास ही थी। भाजपा 45 विधानसभा क्षेत्रों में आगे थी। सपा 4, बसपा 7 और कांग्रेस सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र में आगे थी। उस चुनाव में भाजपा और सपा दोनों का वोट प्रतिशत बढ़ा। भाजपा को 49.9 फ़ीसदी और सपा को 22.5 फ़ीसदी वोट पड़े। बहुजन समाज पार्टी का वोट प्रतिशत घटकर 13.1 रह गया। कांग्रेस का वोट प्रतिशत भी थोड़ा बढ़कर 8.1 हो गया।