नाइट्रोजन उर्वरकों में नरमी के बावजूद 2026 के अंत तक ऊंचे बने रह सकते हैं उर्वरकों के दामः एफएओ

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के अनुसार, नाइट्रोजन उर्वरकों की कीमतों में कुछ नरमी आने की संभावना है, लेकिन फॉस्फेट की सीमित उपलब्धता, भू-राजनीतिक तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान, ऊंची ऊर्जा लागत और निर्यात प्रतिबंधों के कारण 2026 के अंत तक वैश्विक उर्वरक कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने अपनी नवीनतम फूड आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2026 की दूसरी छमाही के दौरान वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतें ऊंची बने रहने की संभावना है। संगठन के अनुसार, नाइट्रोजन उर्वरकों की कीमतों में कुछ नरमी आने के संकेत हैं, इसके बावजूद उर्वरकों के दाम ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर बने रहने के आसार हैं।

एफएओ की फूड आउटलुक रिपोर्ट के फर्टिलाइजर मार्केट अपडेट के अनुसार, वैश्विक उर्वरक बाजार अभी भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा की ऊंची कीमतों और विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास शिपिंग बाधाओं से प्रभावित है। हालांकि जून 2026 के बाद आपूर्ति व्यवस्था में कुछ सुधार की संभावना जताई गई है, लेकिन नाइट्रोजन, फॉस्फेट और सल्फर आधारित उर्वरकों की आपूर्ति श्रृंखला सामान्य होने की प्रक्रिया धीमी और असमान रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अल्पकालिक परिदृश्य इस धारणा पर आधारित है कि होर्मुज से जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होगी, यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतों पर दबाव कम होगा और प्रमुख उत्पादक देशों द्वारा लगाए गए उर्वरक निर्यात प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील दी जाएगी। उर्वरकों की कीमतें हाल के उच्चतम स्तर से नीचे आने के बाद भी ऐतिहासिक रूप से ऊंची बनी रहने की संभावना है।

एफएओ ने चेतावनी दी है कि बाजार में अनिश्चितता अभी काफी अधिक है। निकट पूर्व क्षेत्र में संभावित युद्धविराम की गति, उर्वरक उत्पादन और बुनियादी ढांचे में नए व्यवधान, मौसम के कारण उर्वरकों की मांग में बदलाव तथा वैश्विक फसल कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे कारक वर्ष 2026 के शेष महीनों में उर्वरकों की उपलब्धता, उनकी कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं। संगठन के अनुसार, वैश्विक उर्वरक व्यापार केवल कीमतों पर नहीं बल्कि आपूर्ति की उपलब्धता और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।

एफएओ का अनुमान है कि सबसे पहले नाइट्रोजन उर्वरकों की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, जून के बाद फारस की खाड़ी से उर्वरकों की खेपों का निर्यात दोबारा शुरू होने तथा चीन द्वारा नए निर्यात कोटा जारी किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय यूरिया कीमतों में नरमी आने की संभावना है। ब्राजील और भारत की मौसमी मांग तथा यूरोप में खरीदारी के चलते नाइट्रोजन उर्वरकों का व्यापार सक्रिय बना रहेगा। यूरोप में गर्मियों के दौरान नाइट्रेट उर्वरकों की कीमतों में भी कमी आने का अनुमान है।

हालांकि एफएओ ने चेताया है कि नाइट्रोजन बाजार अभी जोखिमों से घिरा हुआ है। यदि रूस में उर्वरक उत्पादन या आपूर्ति व्यवस्था दोबारा बाधित होती है या वहां से निर्यात प्रभावित होता है, तो कीमतों में गिरावट का अनुमान पलट सकता है और नए निर्यात प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

फॉस्फेट उर्वरकों के लिए स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, तैयार उर्वरकों और उनके प्रमुख कच्चे माल की सीमित उपलब्धता के कारण अंतरराष्ट्रीय फॉस्फेट कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं और उनमें और बढ़ोतरी भी हो सकती है। चीन द्वारा डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) और एमएपी (मोनो-अमोनियम फॉस्फेट) उर्वरकों के निर्यात पर जारी प्रतिबंध तथा खाड़ी क्षेत्र में लॉजिस्टिक बाधाएं वैश्विक आपूर्ति को सीमित रखेंगी।

एफएओ के अनुसार, भारत वैश्विक फॉस्फेट मांग का प्रमुख कारक बना रहेगा। पिछले वर्ष की तुलना में डीएपी का भंडार बेहतर होने के बावजूद घरेलू उत्पादन सीमित है और आयात की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं ब्राजील में एमएपी की ऊंची कीमतें, कृषि ऋण की सख्त शर्तें और घटती वहनीयता के कारण किसानों की खरीदारी प्रभावित हो रही है।

पोटाश बाजार अपेक्षाकृत स्थिर रहने की संभावना है। एफएओ का अनुमान है कि एमओपी (म्यूरेट ऑफ पोटाश) की कीमतों में सीमित बढ़ोतरी होगी, क्योंकि इसकी वहनीयता अन्य उर्वरकों की तुलना में बेहतर बनी हुई है। हालांकि बढ़े हुए मालभाड़े, बीमा लागत और भू-राजनीतिक तनाव से जुड़े शिपिंग व्यवधान कीमतों पर दबाव बनाए रख सकते हैं।