यूके फार्मिंग रोडमैप 2050 में निवेश और नवाचार का वादा, लेकिन किसानों से सब्सिडी पर निर्भरता घटाने की अपेक्षा
ब्रिटेन सरकार ने वर्ष 2050 तक के लिए कृषि का रोडमैप जारी किया है। इसमें बताया गया है कि किस साल क्या कदम उठाए जाएंगे। रोडमैप में अरबों पाउंड के निवेश, नवाचार, बेहतर आपूर्ति श्रृंखला और पर्यावरणीय योजनाओं का वादा है। हालांकि, किसानों से प्रत्यक्ष सब्सिडी पर निर्भरता कम करने और नई तकनीक तथा निजी निवेश पर अधिक भरोसा करने की अपेक्षा की गई है।
ब्रिटेन सरकार ने कृषि क्षेत्र को अधिक लाभकारी, उत्पादक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए एक दीर्घकालिक रोडमैप जारी किया है। हालांकि, यह रणनीति किसानों की आय के मॉडल में भी एक बड़ा बदलाव लाने का संकेत देती है। रोडमैप में सार्वजनिक निवेश के रूप में अरबों पाउंड की सहायता, आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने और कृषि आपूर्ति श्रृंखला में किसानों की स्थिति मजबूत करने का वादा किया गया है। वहीं, सरकार चाहती है कि कृषि क्षेत्र प्रत्यक्ष सरकारी सब्सिडी पर कम निर्भर होकर बाजार और निजी निवेश के जरिए अधिक आय अर्जित करे।
यह रोडमैप वर्ष 2050 तक के लिए सरकार की कृषि संबंधी रणनीति प्रस्तुत करता है, जिसका केंद्र खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण है। इसके तहत कम से कम 2029 तक एनवायरनमेंटल लैंड मैनेजमेंट (ELM) योजनाओं के लिए प्रतिवर्ष 2 अरब पाउंड का बजट बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई गई है। साथ ही, प्रिसिजन फार्मिंग, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए फार्मिंग इनोवेशन प्रोग्राम के तहत 20 करोड़ पाउंड आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा वृक्षारोपण और वानिकी के लिए 1 अरब पाउंड तथा प्राकृतिक बाढ़ प्रबंधन के लिए 30 करोड़ पाउंड का प्रावधान किया गया है, ताकि कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक रूप से अधिक सक्षम बनाया जा सके।
यह रोडमैप यूरोपीय संघ की कॉमन एग्रीकल्चरल पॉलिसी (CAP) से मिली सब्सिडी व्यवस्था से आगे बढ़ने का एक और कदम है। अब भूमि के आधार पर मिलने वाली सब्सिडी की जगह सरकार का जोर ऐसी योजनाओं पर होगा, जिनमें किसानों को बेहतर मृदा स्वास्थ्य, जैव विविधता संरक्षण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी जैसे पर्यावरणीय परिणाम हासिल करने पर भुगतान मिलेगा। इससे किसानों के लिए आय के नए स्रोत खुल सकते हैं, लेकिन इसके साथ उन्हें अधिक कठोर पर्यावरणीय मानकों का पालन करना होगा और नई कृषि पद्धतियों में निवेश भी करना पड़ेगा। इससे विशेष रूप से छोटे किसानों के लिए लागत और वित्तीय जोखिम बढ़ने की आशंका है।
सरकार का तर्क है कि किसानों की आय का मुख्य आधार सब्सिडी नहीं, बल्कि कुशलतापूर्वक खाद्य उत्पादन होना चाहिए। इसी उद्देश्य से कृषि आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता बढ़ाने, अनुचित व्यापारिक गतिविधियों पर रोक लगाने और प्रोसेसर तथा खुदरा कंपनियों के मुकाबले किसानों की सौदेबाजी क्षमता मजबूत करने के लिए सुधार प्रस्तावित किए गए हैं। साथ ही, कृषि निर्यात बढ़ाने और ब्रिटिश कृषि उत्पादों की घरेलू खरीद को प्रोत्साहित कर किसानों की आय बढ़ाने की भी योजना है।
इस रणनीति में तकनीक को केंद्रीय भूमिका दी गई है। रोबोटिक्स, सैटेलाइट निगरानी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रिसिजन न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट जैसी तकनीकों के व्यापक उपयोग से उत्पादकता बढ़ाने, उत्पादन लागत घटाने और पर्यावरणीय प्रभाव कम करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि इन तकनीकों को अपनाने के लिए शुरुआती निवेश काफी अधिक होगा।
श्रमिकों की कमी दूर करने के लिए सरकार ने सीजनल वर्कर वीजा योजना जारी रखने की बात कही है, जिसके तहत वर्तमान में 41,000 मौसमी श्रमिकों को अनुमति दी जाती है। साथ ही, दीर्घकाल में श्रमिकों पर निर्भरता कम करने के लिए कृषि के मशीनीकरण को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से कृषि को सुरक्षित बनाना भी इस रोडमैप का प्रमुख उद्देश्य है। इसके तहत सूखा-सहिष्णु फसलों को बढ़ावा देने, जल प्रबंधन में सुधार, पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और बाढ़ सुरक्षा उपायों पर जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि मृदा स्वास्थ्य में सुधार से उत्पादन लागत घटेगी, जल संरक्षण बेहतर होगा और किसान चरम मौसम की घटनाओं का अधिक प्रभावी ढंग से सामना कर सकेंगे।
इस रोडमैप की एक महत्वपूर्ण विशेषता निजी निवेश पर बढ़ता जोर भी है। सरकार का अनुमान है कि कार्बन बाजार, जैव विविधता क्रेडिट और अन्य प्राकृतिक पूंजी निवेश भविष्य में किसानों की आय के महत्वपूर्ण स्रोत बन सकते हैं। हालांकि ये बाजार अभी शुरुआती दौर में हैं और उनकी पारदर्शिता, विश्वसनीयता तथा दीर्घकालिक लाभप्रदता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, विशेषकर छोटे किसानों के लिए।
रणनीति में किसानों को रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रामीण पर्यटन और अन्य गैर-कृषि गतिविधियों के जरिए आय के स्रोत बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है। हालांकि ऐसी संभावनाएं सभी क्षेत्रों या सभी प्रकार के किसानों के लिए समान रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या छोटे पारिवारिक किसान इन बदलावों के साथ उतनी आसानी से तालमेल बिठा पाएंगे, जितना बड़े व्यावसायिक कृषि उद्यम करते हैं।
हालांकि सरकार का कहना है कि घरेलू खाद्य उत्पादन बढ़ाना उसकी प्राथमिकता बना रहेगा, लेकिन उसने उत्पादन बढ़ाने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी कोई लक्ष्य तय नहीं किया है। सरकार का तर्क है कि नवाचार, उत्पादकता में वृद्धि और बेहतर बाजार व्यवस्था के जरिए खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।
ब्रेक्जिट के बाद यह रोडमैप ब्रिटेन की सबसे व्यापक कृषि रणनीतियों में से एक है। इसमें बड़े पैमाने पर सार्वजनिक निवेश, नवाचार, आपूर्ति श्रृंखला सुधार और पर्यावरणीय बाजारों के जरिए नए अवसरों का वादा किया गया है। वहीं दूसरी ओर, किसानों से यह अपेक्षा भी की गई है कि वे धीरे-धीरे प्रत्यक्ष सब्सिडी पर अपनी निर्भरता कम करें, नई तकनीकों को अपनाएं और अधिक कड़े पर्यावरणीय मानकों का पालन करें। अब यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार का वादा किया गया निवेश, उभरते पर्यावरणीय बाजार और उत्पादकता में अपेक्षित वृद्धि किसानों के लिए इस बदलाव की लागत की भरपाई कर पाते हैं या नहीं। अन्यथा, यह बदलाव पहले से ही बाजार की अनिश्चितताओं और जलवायु संबंधी जोखिमों से जूझ रहे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव भी डाल सकता है।

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