रूस-यूक्रेन युद्ध और यूरोप की भीषण गर्मी से वैश्विक अनाज आपूर्ति पर बढ़ा संकट
रूस-यूक्रेन युद्ध और यूरोप की भीषण गर्मी ने वैश्विक अनाज बाजार पर दोहरा दबाव बना दिया है। यूक्रेन की निर्यात क्षमता एक-तिहाई घट गई है तो यूक्रेन के हमलों के बाद रूस वैकल्पिक बंदरगाहों से निर्यात की तैयारी कर रहा है। यूरोप में गेहूं और मक्का उत्पादन के अनुमान में भारी कटौती से वैश्विक कीमतों और खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब अनाज आपूर्ति शृंखला पर सीधे असर डालने लगा है। यूक्रेन द्वारा आजोव सागर (Sea of Azov) में रूसी जहाजों पर हमलों के बाद रूस के कृषि मंत्रालय ने कहा है कि वह अनाज निर्यात के लिए वैकल्पिक बंदरगाहों का उपयोग करने की तैयारी कर रहा है। मंत्रालय के अनुसार, रूस के कुल अनाज निर्यात का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा आजोव सागर मार्ग से होता है, लेकिन देश के पास अन्य बंदरगाहों और परिवहन विकल्पों की पर्याप्त क्षमता होने के कारण निर्यात या घरेलू खाद्य आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी।
दुनिया के सबसे बड़े गेहूं निर्यातक रूस में नई फसल की कटाई शुरू हो चुकी है। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की विदेशी कृषि सेवा (FAS) के अनुसार, विपणन वर्ष 2026-27 में रूस का गेहूं उत्पादन 8.85 करोड़ टन और निर्यात लगभग 4.7 करोड़ टन रहने का अनुमान है। वैकल्पिक बंदरगाहों के उपयोग से रूस के वैश्विक गेहूं व्यापार में उसकी मजबूत स्थिति बनाए रखने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, रूस के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों ने यूक्रेन की अनाज निर्यात क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। यूक्रेन के प्रमुख किसान संगठनों के अनुसार, ब्लैक सी के जरिए अनाज निर्यात की क्षमता लगभग एक-तिहाई घट गई है। पहले जहां हर महीने लगभग 60 लाख टन माल का निर्यात हो रहा था, वह घटकर करीब 40 लाख टन रह गया है।
यूक्रेन के 90 प्रतिशत से अधिक अनाज और वनस्पति तेल का निर्यात ओडेसा क्षेत्र के तीन प्रमुख बंदरगाहों से होता है। रूस द्वारा बंदरगाहों, अनाज टर्मिनलों, गोदामों और लॉजिस्टिक ढांचे पर लगातार हमलों के कारण निर्यात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। देश की सबसे बड़ी अनाज निर्यातक कंपनी कर्नेल होल्डिंग ने चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर अपना परिचालन रोक दिया है, जबकि वहां के 13 बड़े अनाज टर्मिनलों में से चार ने खरीद बंद कर दी है। ओडेसा बंदरगाह की ओर जाने वाली अनाज रेल रैक की संख्या में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
रूस और यूक्रेन मिलकर वैश्विक गेहूं निर्यात में लगभग एक-चौथाई योगदान करते हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ते हमलों से वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जुलाई में हार्ड रेड विंटर (HRW) गेहूं की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी के पीछे यही प्रमुख कारण है और यदि हमले जारी रहे तो आने वाले महीनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं।
इस बीच यूरोप भी मौसम संबंधी संकट का सामना कर रहा है। यूरोपीय अनाज व्यापार संगठन कोसेरल (COCERAL) ने भीषण गर्मी को देखते हुए यूरोपीय संघ (EU) और ब्रिटेन के लिए वर्ष 2026 के अनाज उत्पादन का विशेष संशोधित अनुमान जारी किया है। इसके अनुसार कुल अनाज उत्पादन 28.66 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.34 करोड़ टन कम है।
गेहूं उत्पादन का अनुमान घटाकर 14.08 करोड़ टन कर दिया गया है, जबकि 2025 में यह 14.98 करोड़ टन था। मक्का उत्पादन का अनुमान भी घटाकर 5.27 करोड़ टन कर दिया गया है, जो पहले 5.72 करोड़ टन रहने का अनुमान था। फ्रांस में अत्यधिक गर्मी के कारण फसल प्रभावित हुई है और वहां दो दशक से अधिक समय का सबसे कम मक्का उत्पादन होने की आशंका है। जौ उत्पादन में भी उल्लेखनीय गिरावट का अनुमान है, जबकि रेपसीड उत्पादन में मामूली कमी की संभावना जताई गई है।
ब्लैक सी क्षेत्र में निर्यात बाधित होने और यूरोप में मौसम जनित उत्पादन गिरावट के कारण वैश्विक अनाज बाजार में अगले कुछ महीनों तक अस्थिरता बनी रह सकती है। आयात पर निर्भर देशों को ऊंची कीमत पर खरीद करनी पड़ सकती है। यदि आपूर्ति संबंधी बाधाएं लंबे समय तक जारी रहती हैं तो खाद्य महंगाई बढ़ने का जोखिम भी बना रहेगा।

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