आठ महीनों में खाद्य तेलों का आयात 7 प्रतिशत बढ़ा, पाम आयल की हिस्सेदारी बढ़कर 48 फीसदी हुई

चालू तेल वर्ष के पहले आठ महीनों में भारत का खाद्य तेल आयात 7 प्रतिशत बढ़कर 103.88 लाख टन पहुंच गया, जबकि कुल वनस्पति तेल आयात में 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान खाद्य तेलों के आयात में पाम तेल की हिस्सेदारी बढ़कर 48 प्रतिशत हो गई, हालांकि जून में वनस्पति तेल आयात सालाना आधार पर 29 प्रतिशत घटकर 11.47 लाख टन रह गया।

आठ महीनों में खाद्य तेलों का आयात 7 प्रतिशत बढ़ा, पाम आयल की हिस्सेदारी बढ़कर 48 फीसदी हुई

खाद्य तेलों के मामले में भारत की आयात पर निर्भरता बनी हुई है। चालू तेल वर्ष के पहले आठ महीनों (नवंबर 2025 से जून 2026) में वनस्पति तेल (खाद्य एवं अखाद्य) का कुल आयात 6 प्रतिशत बढ़कर 105.71 लाख टन तक पहुंच गया। हालांकि, जून के दौरान देश का वनस्पति तेल आयात सालाना आधार पर 29 प्रतिशत घटकर 11.47 लाख टन रह गया।

खाद्य तेल उद्योग से जुड़े संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 से जून 2026 के दौरान भारत का कुल खाद्य तेल आयात 7 प्रतिशत बढ़कर 103.88 लाख टन तक पहुंच गया। इसमें 50.12 लाख टन कच्चे पाम तेल का आयात हुआ, जो सबसे अधिक आयातित खाद्य तेल रहा। इसके बाद कच्चे एवं रिफाइंड सोयाबीन तेल का आयात 32.73 लाख टन तथा कच्चे एवं रिफाइंड सूरजमुखी तेल का आयात 20.94 लाख टन रहा।

पाम तेल की हिस्सेदारी बढ़ी

चालू तेल वर्ष के पहले आठ महीनों में पाम तेल का आयात बढ़कर 50.12 लाख टन हो गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 42.94 लाख टन था। कुल खाद्य तेल आयात में पाम तेल की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत से बढ़कर 48 प्रतिशत हो गई।

वहीं, सॉफ्ट ऑयल (मुख्यतः सोयाबीन और सूरजमुखी तेल) का आयात पिछले साल के 54.35 लाख टन से घटकर 53.76 लाख टन रह गया। इसके साथ ही कुल खाद्य तेल आयात में इसकी हिस्सेदारी 56 प्रतिशत से घटकर 52 प्रतिशत रह गई।

जून में 29 प्रतिशत घटा आयात

भारत का वनस्पति तेल (खाद्य एवं अखाद्य) आयात जून 2026 में सालाना आधार पर 29 प्रतिशत घटकर 11.47 लाख टन रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह 16.16 लाख टन था। जून के कुल आयात में 11.11 लाख टन खाद्य तेल और 35,427 टन अखाद्य तेल शामिल रहे। मासिक आधार पर भी खाद्य तेलों का आयात घटकर मई 2026 के 13.39 लाख टन से जून में 11.11 लाख टन रह गया, जिससे संकेत मिलता है कि इस दौरान आयातित खेपों में कमी आई।

यह गिरावट मुख्य रूप से पाम तेल की मांग में कमी के कारण रही। जून में पाम तेल का आयात घटकर 4.87 लाख टन रह गया, जो मई की तुलना में 10.5 प्रतिशत कम है। वहीं, सोयाबीन तेल का आयात भी 4.94 लाख टन से घटकर 3.81 लाख टन रह गया, यानी इसमें 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

एसईए के अनुसार, इसका प्रमुख कारण पाम तेल और सॉफ्ट ऑयल (जैसे सोयाबीन तेल) के बीच कीमत का अंतर लगभग समाप्त हो जाना है। पाम तेल का मूल्य लाभ (प्राइस डिस्काउंट) घटकर 50 डॉलर प्रति टन से भी कम रह गया, जिससे इसकी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त कम हो गई और आयात प्रभावित हुआ।

जैव ईंधन नीतियों से बढ़ीं वैश्विक कीमतें

एसईए का कहना है कि इंडोनेशिया, मलेशिया और अमेरिका में जैव ईंधन (बायोफ्यूल) संबंधी अनिवार्य मिश्रण (ब्लेंडिंग) नीतियों के कारण बड़ी मात्रा में वनस्पति तेल खाद्य उपयोग से ईंधन क्षेत्र की ओर जा रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में वनस्पति तेलों की कीमतों पर दबाव बना हुआ है और भारतीय आयातकों की खरीद प्रभावित हुई है।

नेपाल से रिफाइंड तेल का आयात 

नेपाल से भारत में रिफाइंड खाद्य तेल का आयात लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच नेपाल ने भारत को लगभग 3.39 लाख टन रिफाइंड खाद्य तेल का निर्यात किया। इसमें 2.98 लाख टन रिफाइंड सोयाबीन तेल, 19,911 टन रिफाइंड सूरजमुखी तेल, 18,295 टन आरबीडी पामोलीन तथा 3,081 टन रेपसीड तेल शामिल हैं।

मई 2026 में नेपाल से भारत को लगभग 54,000 टन रिफाइंड खाद्य तेल का निर्यात होने का अनुमान है, जबकि जून 2026 में यह करीब 32,000 टन रहा। इसमें मुख्य रूप से रिफाइंड सोयाबीन तेल शामिल था, जबकि कम मात्रा में रिफाइंड सूरजमुखी तेल और आरबीडी पामोलीन का भी निर्यात किया गया।

दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौते (SAFTA) के तहत नेपाल से भारत को होने वाले इन निर्यातों पर शून्य आयात शुल्क (Nil Import Duty) का लाभ मिलता है।

खाद्य तेल का घरेलू भंडार घटा

एक जुलाई 2026 तक देश के बंदरगाहों पर खाद्य तेल का भंडार 9.06 लाख टन तथा पाइपलाइन स्टॉक 11.03 लाख टन आंका गया। इस प्रकार कुल उपलब्ध स्टॉक 20.09 लाख टन रहा, जो एक जून 2026 के 22.16 लाख टन की तुलना में 2.07 लाख टन कम है। एसईए के अनुसार, जून में आयात कम रहने के कारण घरेलू स्टॉक में यह कमी आई।

कच्चे तेल का आयात बढ़ा, रिफाइंड तेल घटा

नवंबर 2025 से जून 2026 के दौरान रिफाइंड खाद्य तेल का आयात घटकर 3.69 लाख टन रह गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह लगभग 15 लाख टन था। इसके विपरीत कच्चे खाद्य तेल का आयात बढ़कर 100.19 लाख टन पहुंच गया।

इस अवधि में कुल खाद्य तेल आयात में रिफाइंड तेल की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से घटकर केवल 4 प्रतिशत रह गई, जबकि कच्चे तेल की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत से बढ़कर 96 प्रतिशत हो गई। यह बदलाव मुख्य रूप से कच्चे पाम तेल के आयात में वृद्धि के कारण हुआ।

अर्जेंटीना सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता

नवंबर 2025 से जून 2026 के दौरान अर्जेंटीना भारत को खाद्य तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा। इस अवधि में वहां से 23.39 लाख टन खाद्य तेल का आयात हुआ, जिसमें मुख्य रूप से कच्चा सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल शामिल हैं।

इसके बाद मलेशिया से 19.81 लाख टन तथा इंडोनेशिया से 19.04 लाख टन पाम तेल का आयात किया गया। रूस, ब्राजील, थाईलैंड, यूक्रेन, चीन, नेपाल और संयुक्त अरब अमीरात भी प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहे।

अंतरराष्ट्रीय कीमतों और रुपये पर दबाव

जून 2026 में पिछले वर्ष जून की तुलना में कच्चे पाम तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत 17 प्रतिशत, आरबीडी पामोलीन 18 प्रतिशत, सोयाबीन तेल 14 प्रतिशत और सूरजमुखी तेल 19 प्रतिशत महंगा रहा। वहीं, पिछले एक वर्ष में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में 11 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जिससे खाद्य तेल के आयात की लागत और बढ़ गई।

 

Subscribe Rural Voice Newsletter