खाद्य मंत्रालय का चीनी मिलों पर बाजार में चीनी की कृत्रिम कमी करने का आरोप, कानूनी कार्रवाई की दी चेतावनी

मंत्रालय के चीनी निदेशालय द्वारा देश की सभी चीनी मिलों को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि कई चीनी मिलों के पास उनके द्वारा घोषित मात्रा से अधिक चीनी का स्टॉक है। इसके साथ ही चीनी के सौदे होने के बाद वह आपूर्ति में देरी कर रही हैं। जिससे चीनी की कीमतों में सट्टेबाजी की बढ़ावा मिल रहा है। स्टॉक में विसंगति पाये जाने पर चीनी मिलों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के के चीनी कंट्रोल आर्डर, 2025 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी

खाद्य मंत्रालय का चीनी मिलों पर बाजार में चीनी की कृत्रिम कमी करने का आरोप, कानूनी कार्रवाई की दी चेतावनी
प्रतिकात्मक फोटो

चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान खाद्य मंत्रालय ने चीनी मिलों पर कीमतों में बढ़ोतरी के लिए सट्टेबाजी की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। मंत्रालय के चीनी निदेशालय द्वारा देश की सभी चीनी मिलों को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि कई चीनी मिलों के पास उनके द्वारा घोषित मात्रा से अधिक चीनी का स्टॉक है। इसके साथ ही चीनी के सौदे होने के बाद वह आपूर्ति में देरी कर रही हैं। जिससे चीनी की कीमतों में सट्टेबाजी की बढ़ावा मिल रहा है। स्टॉक में विसंगति पाये जाने पर चीनी मिलों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के के चीनी कंट्रोल आर्डर, 2025 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

पिछले करीब डेढ़ माह मेंं देश में चीनी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चीनी की एक्स-फैक्टरी कीमतें जुलाई के शुरू के 4200 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर अगस्त के दूसरे सप्ताह में 4800 रुपये प्रति क्विंटल को पार कर गई हैे। इसका सीधा असर बाजार में चीनी की खुदरा कीमतों पर पड़ा है और यह कीमतें 55 रुपये से 60 रुपये किलो तक पहुंच गई है। कीमतों में बढ़ोतरी से चिंतित सरकार ने जहां चीनी मिलों के स्टॉक के फिजिकल वेरिफिकेशन का ड्राइव शुरू किया है वहीं स्टॉकिस्टों के लिए 4000 क्विंटल के स्टॉक की सीमा तय कर दी है।

खाद्य मंत्रालय ने 14 अगस्त, 2026 को देश की सभी चीनी मिलों यह पत्र भेजा है जिसकी प्रति रूरल वॉयस के पास है। इस पत्र में कहा गया है कि हाल ही में चीनी मिलों के स्टॉक के फिजिकल वेरिफिकेशन के तहत कुछ मिलों के पास उनके द्वारा घोषित मात्रा से अधिक स्टॉक पाया गया है। इससे साबित होता है कि चीनी मिलें उनको मिले चीनी के कोटा की पूरी बिक्री नहीं कर रही हैं। इसके साथ ही कुछ चीनी मिलें चीनी की बिक्री महीने के शुरू में कर रही हैं जबकि इसका डिस्पेच महीने के अंत तक करती हैं। जिसके चलते बाजार में चीनी की कृत्रिम कमी पैदा होती है और उससे सट्टेबाजी गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। जिसका कीमतों पर असर पड़ता है। इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए मंत्रालय ने इस पत्र के जरिये चीनी मिलों को निर्देश दिया है कि वह चीनी की बिक्री होने के सात दिन के भीतर इस स्टॉक का डिस्पेच चीनी डीलर, एजेंट या बल्क खऱीदार को करें। ऐसा नहीं करने पर चीनी नियंत्रण आदेश, 2025 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह निर्देश 30 नवंबर, 2026 तक जारी रहेगा।

इसके साथ ही सरकार ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा चीनी मिलों के पास चीनी के स्टॉक की जांच की जाती रहेगी और किसी भी तरह की अनियमितता मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वहीं चीनी मिलों द्वारा चीनी के कम स्टॉक के मद्देनजर पिछले दिनों सरकार को चीनी मिलों में जल्दी पेराई शुरू करने की पेशकश की गई थी। इस संदर्भ में चीनी मिलों ने जीएसटी में छूट जैसी कई मांगे की थी। सरकार ने सभी मांगें तो अभी नहीं मानी है लेकिन इस पत्र में चीनी मिलों से कहा है कि अक्तूबर में होने वाले चीनी उत्पादन की बिक्री अक्तूबर और नवंबर, 2026 में की जा सकेगी। 

चालू पेराई सीजन (2025-26) में चीनी का उत्पादन शुरुआती अनुमानों से काफी कम रहा है। उद्योग के शुरुआती अनुमान 309 लाख टन चीनी उत्पादन (एथेनॉल डायवर्जन को छोड़कर) लगाया था। लेकिन उत्पादन करीब 279 लाख टन तक ही पहुंच सका है जबकि देश में करीब 285 लाख टन चीनी की सालाना खपत है। पिछले साल और चालू साल में लगातार उत्पादन घरेलू खपत से कम रहा है। वहीं अधिक उत्पादन के अनुमानों के आधार पर सरकार ने 15 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी जिसे फरवरी, 2026 में बढ़ाकर 20 लाख टन तक दिया गया। देश से करीब आठ लाख टन चीनी का निर्यात होने का अनुमान है। उत्पादन मेंं कमी और कीमतोे में बढ़ोतरी के चलते सरकार ने  मई में चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया और उसके बाद कई माह भर पहले स्टॉक लिमिट लागू की। लेकिन इसके बावजूद कीमतें बढ़ रही है। उद्योग सूत्रों का अनुमान है कि चालू सीजन के अंत में 30 सितंबर, 2026 को चीनी का बकाया स्टॉक 30 से 33 लाख टन के बीज रह सकता है जो कई दशकों में सबसे कम स्टॉक होगा। यही वजह है कि जहां चीनी मिलें उत्पादन जल्दी शुरू करने की पेशकश कर रही है और सरकार कीमतो को नियंत्रित करने के लिए कदम उठा रही है। आने वाले दिनों में त्यौहारी सीजन में चीनी की कीमतों मे बढ़ोतरी सरकार की परेशानी बढ़ा सकती हैं।

Subscribe Rural Voice Newsletter