अमेरिका में बड़ी संख्या में किसान कृषि मंत्रालय (USDA) के साथ महत्वपूर्ण कृषि डेटा साझा करने से परहेज कर रहे हैं। यह यूएसडीए के प्रति किसानों के गहराते विश्वास संकट को दर्शाता है। इससे आधिकारिक फसल रिपोर्टों की विश्वसनीयता कमजोर पड़ने का खतरा हो गया है।
नेशनल एग्रीकल्चरल स्टैटिस्टिक्स सर्विस की तरफ से किए जाने वाले प्रमुख सर्वेक्षणों में प्रतिक्रिया दर वर्षों से लगातार गिर रही है। एजेंसी के हाल के बुवाई सर्वे में भागीदारी का स्तर ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इसमें केवल एक-तिहाई किसानों ने जवाब दिया, जबकि एक दशक पहले यह आंकड़ा करीब 60% था।
किसानों के अनुसार उनकी झिझक का कारण यह है कि USDA की रिपोर्टें अक्सर उनके आर्थिक हितों के खिलाफ काम करती हैं। लगातार बेहतर उत्पादन के बावजूद फसलों की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। अनेक किसानों को लगता है कि उनके द्वारा दिया गया डेटा बाजार संकेतों को प्रभावित करता है, उपज के दाम गिरते हैं, जिससे अंततः उनकी आय घटती है।
हाल में इसने एक रिपोर्ट में अमेरिका में मक्का उत्पादन का अनुमान रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ा दिया, जिसके बाद वायदा कीमतों में तेज गिरावट आई। ऐसे अप्रत्याशित संशोधनों ने किसानों की इस धारणा को और मजबूत किया है कि डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्थिरता की कमी है।
कई किसानों का तर्क है कि सर्वेक्षणों में भाग लेना समय लेने वाला और जटिल काम है, खासकर खेती के व्यस्त समय में। कुछ मामलों में किसान सटीक रिकॉर्ड के बजाय मोटे अनुमान के आधार पर जवाब देते हैं। इससे भी डेटा की गुणवत्ता पर और सवाल उठते हैं।
इसका प्रभाव केवल किसानों तक सीमित नहीं है। USDA का डेटा वैश्विक कृषि बाजारों के लिए एक मानक (बेंचमार्क) के रूप में काम करता है, जो फसलों की कीमतों, व्यापार प्रवाह और यहां तक कि खाद्य महंगाई को भी प्रभावित करता है। किसानों की कम भागीदारी से उस विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचने का खतरा है, जिसे लंबे समय से कृषि आंकड़ों का मानक माना जाता रहा है। किसानों के शामिल नहीं होने से USDA के अनुमानों की सटीकता और उनके प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई जाने लगी है।
इन चिंताओं को दूर करने के लिए USDA के भीतर प्रयास किए जा रहे हैं। एजेंसी ने संकेत दिया है कि वह किसानों के साथ जुड़ाव बढ़ाने और डेटा की सटीकता सुधारने पर काम कर रही है। डेटा संग्रह प्रक्रिया को सरल बनाने जैसी पहल भी शुरू की गई है, ताकि रिपोर्टिंग का बोझ कम हो और भागीदारी आसान बने। हालांकि विश्वास बहाल करना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। किसान एक अहम वर्ग हैं। बड़ी संख्या में किसान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसानों की भागीदारी नहीं बढ़ी, तो कृषि नीतियों, बाजार पूर्वानुमान और जोखिम प्रबंधन की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है। वहीं किसानों का कहना है कि भरोसा बहाल करने के लिए अधिक पारदर्शिता, डेटा के उपयोग पर स्पष्ट जानकारी और यह भरोसा जरूरी है कि रिपोर्टिंग से उनकी आजीविका पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।