कैमरून में आज से विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 14वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) शुरू हो रहा है। इससे पहले एक विशेषज्ञ समूह ने मौजूदा कृषि व्यापार नियमों पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई है। इनका कहना है कि वर्तमान ढांचा आधुनिक चुनौतियों का सामना करने में लगातार विफल हो रहा है।
“एग्रीमेंट ऑन एग्रीकल्चर री-इमैजिन्ड” (AoA ReI) नामक इस पहल ने चेतावनी दी है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था की सीमाओं को उजागर कर दिया है। इसके अनुसार, मौजूदा प्रणाली खाद्य सुरक्षा, स्थिरता और लचीलापन सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं है।
इस पहल का मुख्य प्रस्ताव “सस्टेनेबल फूड सिस्टम्स के लिए कृषि व्यापार पर मॉडल संधि” है। यह ढांचा डब्ल्यूटीओ के मौजूदा “एग्रीमेंट ऑन एग्रीकल्चर” को बदलने या व्यापक रूप से पुनर्गठित करने की बात करता है, जो पिछले लगभग 30 वर्षों से वैश्विक कृषि व्यापार का आधार रहा है।
AoA ReI की को-लीडर कैरोलिन डोमेन के अनुसार, छोटे-मोटे सुधार अब पर्याप्त नहीं हैं। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कृषि व्यापार को संचालित करने के लिए साहसिक और संरचनात्मक बदलाव जरूरी हैं।
डब्ल्यूटीओ के भीतर सुधार वार्ताएं लगातार ठप रही हैं। वर्ष 2024 में आयोजित पिछली मंत्रिस्तरीय बैठक में भी सदस्य देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी थी। प्रमुख कृषि निर्यातकों, उभरती अर्थव्यवस्थाओं और खाद्य आयातक देशों के बीच मतभेदों के कारण घरेलू सब्सिडी, सार्वजनिक भंडारण और निर्यात प्रतिबंध जैसे अहम मुद्दों पर प्रगति रुक गई है।
इंस्टीट्यूट फॉर एग्रीकल्चर एंड ट्रेड पॉलिसी की कार्यकारी निदेशक और पहल की को-लीडर सोफिया मर्फी ने कहा कि मौजूदा नियम बाजार विस्तार को प्राथमिकता देते हैं, जबकि आज की जरूरत स्थिरता और लचीलापन है। उन्होंने कहा कि वैश्विक खाद्य प्रणाली जलवायु अस्थिरता, जैव विविधता ह्रास, आपूर्ति श्रृंखला संकट और बढ़ती असमानताओं से जूझ रही है।
पहल की को-लीडर लिसा बुर्गी बोनानोमी ने कहा कि व्यापार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे स्थानीय खाद्य उत्पादन का पूरक होना चाहिए। वहीं, अर्थशास्त्री बिस्वजीत धर ने चेतावनी दी कि यदि वर्तमान ढांचा विफल होता रहा, तो वैश्विक कृषि व्यापार में नीतिगत शून्य उत्पन्न हो सकता है।
प्रस्तावित मॉडल संधि का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर चर्चा को बढ़ावा देना है, जिसमें टिकाऊ खाद्य प्रणालियों, समान आर्थिक परिणामों और मानवाधिकार व विकास लक्ष्यों के अनुरूप व्यापार सिद्धांतों को प्राथमिकता दी जाए।