होर्मुज गतिरोध के बीच ब्रेंट क्रूड फिर 111 डॉलर के पार; कच्चे तेल की मांग में आ सकती है स्थायी गिरावट

वैश्विक तेल बाजारों पर दबाव लगातार बना हुआ है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की लंबी नाकेबंदी और अमेरिका-ईरान वार्ता के ठप पड़ने के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत एक बार फिर 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। गतिरोध लंबा खिंचता देख विश्लेषकों ने तेल की मांग में स्थायी गिरावट की चेतावनी दी है।

होर्मुज गतिरोध के बीच ब्रेंट क्रूड फिर 111 डॉलर के पार; कच्चे तेल की मांग में आ सकती है स्थायी गिरावट
वैश्विक तेल बाजारों पर गंभीर दबाव बना हुआ है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड एक बार फिर 111 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। इसका मुख्य कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का लंबे समय से बंद रहना और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तेल की मांग में दीर्घकालिक गिरावट को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं। इस बीच, चीन घरेलू भंडार बढ़ने के कारण ईंधन निर्यात फिर से शुरू करने पर विचार कर रहा है।
 
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.4% बढ़कर 111.9 डॉलर प्रति बैरल (भारतीय समय के अनुसार शाम 5:30 बजे) पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 4.7% बढ़कर 100.9 डॉलर प्रति बैरल हो गया। यह तेजी बाजार की चिंता को दर्शाती है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की लगातार नाकेबंदी को लेकर है। इस मार्ग से पहले वैश्विक दैनिक तेल और LNG प्रवाह का लगभग 20% गुजरता था।
 
यह व्यवधान अब नौवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जो विश्लेषकों की शुरुआती उम्मीदों से कहीं अधिक है। पहले अनुमान लगाया गया था कि यह मार्ग अप्रैल तक फिर से खुल जाएगा। लेकिन अमेरिका-ईरान वार्ता में कोई प्रगति न होने से स्थिति खराब हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि जब तक ईरान अपनी सभी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को नहीं छोड़ता, तब तक वार्ता फिर से शुरू नहीं होगी, जिससे किसी त्वरित समाधान की उम्मीद और कम हो गई है।
 
इसके बाद प्रमुख वित्तीय संस्थानों ने कच्चे तेल को लेकर अपने पूर्वानुमानों को बढ़ा दिया है। ING ने दूसरी तिमाही के लिए ब्रेंट का औसत मूल्य अनुमान 96 डॉलर से बढ़ाकर 104 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जबकि चौथी तिमाही के लिए 92 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान लगाया है। गोल्डमैन सैक्स ने भी अपना अनुमान बढ़ाते हुए 2026 की अंतिम तिमाही में ब्रेंट का औसत मूल्य 90 डॉलर प्रति बैरल और WTI का 83 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद जताई है।
 
मांग में स्थायी गिरावट
 
इस बीच, आपूर्ति संकट के कारण तेल की मांग में स्थायी गिरावट को लेकर चेतावनियां बढ़ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा सुरक्षा संकट के कारण वैश्विक बाजार पहले ही प्रतिदिन लगभग 1.3 करोड़ बैरल तेल आपूर्ति खो चुके हैं। कुछ विश्लेषक अब तक 1 अरब बैरल तक की आपूर्ति हानि लगभग तय मान रहे हैं।
 
ईंधन की ऊंची कीमतें पहले ही देशों को अपनी ऊर्जा रणनीतियां बदलने के लिए मजबूर कर रही हैं। जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशियाई देश LNG के महंगा और दुर्लभ होने के कारण कोयले के उपयोग को बढ़ा रहे हैं। कई सरकारें तेल पर निर्भरता कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और इलेक्ट्रिक परिवहन में निवेश भी तेज कर रही हैं।
 
हालांकि, विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें पेट्रोकेमिकल लागत भी बढ़ाती हैं, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल और पवन ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर अधिक महंगे हो जाते हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर मांग में गिरावट तभी आएगी जब तेल की कीमत 200 से 250 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाए।
 
चीन फिर शुरू कर सकता है ईंधन निर्यात
 
इस पृष्ठभूमि में, चीन अगले महीने पेट्रोल और डीजल का निर्यात फिर से शुरू कर सकता है, क्योंकि कमजोर मांग और पहले लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों के कारण उसका घरेलू ईंधन भंडार बढ़ गया है। सरकारी रिफाइनर कंपनियों जैसे सिनोपेक और CNPC ने निर्यात परमिट के लिए आवेदन किया है। वैश्विक स्तर पर डीजल आपूर्ति सख्त होने के बीच, चीन का यह कदम एशियाई ईंधन बाजारों को कुछ राहत दे सकता है, हालांकि व्यापक ऊर्जा संकट अभी भी समाप्त होने से काफी दूर है।

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