कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने डीजल बिक्री पर लगाया अंकुश, लेकिन किसानों की बढ़ सकती है परेशानी
सरकार ने डीजल की खुदरा बिक्री को 200 लीटर प्रतिदिन प्रति ग्राहक तक सीमित करने वाला 90 दिनों का विनियमन लागू किया है। इसका उद्देश्य औद्योगिक थोक खरीदारों द्वारा खुदरा और थोक डीजल कीमतों के बीच लगभग 40 रुपये प्रति लीटर के अंतर का अनुचित लाभ उठाने पर रोक लगाना है।
पेट्रोल पंप पर अब ग्राहकों को सिर्फ वाहनों के टैंक में या पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) द्वारा अप्रूव्ड कंटेनरों में डीजल मिलेगा। शुक्रवार को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तरफ से अधिसूचित मोटर स्पिरिट एवं हाई स्पीड डीजल (खुदरा आउटलेट के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026 में यह प्रावधान है। फिलहाल यह प्रावधान 90 दिनों के लिए है। मंत्रालय का कहना है कि डीजल की जमाखोरी, दोबारा बिक्री और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। हालांकि इससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
किसानों को ट्रैक्टर के अलावा कई तरह की मशीनें चलाने के लिए भी डीजल की जरूरत पड़ती है। इन मशीनों के लिए अब वे सामान्य कैन में डीजल नहीं भरवा सकेंगे। इसके लिए उन्हें पेसो-अप्रूव्ड कैन खरीदना पड़ेगा। 20 लीटर के पेसो-अप्रूव्ड कैन की कीमत औसतन 2000 रुपये है। खेतों में ट्रैक्टर चलाने के लिए किसान अक्सर ट्रैक्टर की टंकी में तेल भरवाने के अलावा ड्रम में भी तेल भरवाते हैं, ताकि काम के दौरान जरूरत पड़े तो वहीं ट्रैक्टर में तेल भरा जा सके। लेकिन अब उन्हें हर बार ट्रैक्टर लेकर पेट्रोल पंप आना पडे़गा।
कीमतों के अंतर से डीजल की मांग में असामान्य उछाल
मंत्रालय का कहना है कि यह हस्तक्षेप खुदरा डीजल की मांग में अभूतपूर्व और असंतुलित वृद्धि को देखते हुए किया गया है। इस समय खुदरा डीजल की कीमत थोक डीजल की तुलना में लगभग 40 रुपये प्रति लीटर कम है। इस बड़े मूल्य अंतर का लाभ उठाने के लिए औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत खरीदारों ने डेडिकेटेड उपभोक्ता पंपों के बजाय सार्वजनिक खुदरा पेट्रोल पंपों से बड़े पैमाने पर डीजल खरीदना शुरू कर दिया।
यह स्थिति और गंभीर इसलिए हो गई क्योंकि मई 2026 में निजी तेल विपणन कंपनियों की ऊंची कीमतों के कारण उनके यहां हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) की बिक्री में 58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। मई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, देश के 327 जिलों में खुदरा डीजल बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि 80 जिलों में यह वृद्धि 30 प्रतिशत से भी अधिक रही।
ईंधन वितरण पर नए प्रतिबंध लागू
मंत्रालय के अनुसार, थोक स्तर पर डीजल के डायवर्जन के कारण उत्पन्न स्थानीय आपूर्ति संकट से आम नागरिकों और आवश्यक सेवाओं को बचाने के लिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) को तत्काल निम्नलिखित निर्देश लागू करने को कहा गया है:
200 लीटर की सीमाः खुदरा पेट्रोल पंप किसी भी ग्राहक या वाहन को प्रतिदिन 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं दे सकेंगे। इसके अलावा डीजल केवल वाहन के ईंधन टैंक में या पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) द्वारा अनुमोदित कंटेनरों में ही भरा जा सकेगा।
पुनर्विक्रय पर प्रतिबंधः खुदरा पेट्रोल पंपों से खरीदा गया डीजल किसी भी परिस्थिति में दोबारा बेचा नहीं जा सकेगा।
थोक उपभोक्ताओं पर रोकः औद्योगिक, संस्थागत और वाणिज्यिक खरीदारों को खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगाया गया है। उन्हें अपनी डीजल आवश्यकता डेडिकेटेड समर्पित उपभोक्ता पंपों के माध्यम से पूरी करनी होगी।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई
सरकार ने कहा कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें थोक खरीदार बड़ी मात्रा में डीजल जेरिकैनों में भरकर अवैध पुनर्विक्रय के लिए खरीद रहे थे। इन प्रतिबंधों को लागू कराने की जिम्मेदारी तेल विपणन कंपनियों और खुदरा पेट्रोल पंप संचालकों पर होगी।
राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को भी अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। नए आदेश का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई और दंडात्मक उपाय किए जाएंगे।
सरकार का आश्वासन: ईंधन की कोई कमी नहीं
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह आदेश राशनिंग व्यवस्था नहीं है, बल्कि बाजार को संतुलित करने के लिए उठाया गया एक अस्थायी सुधारात्मक कदम है। सरकार ने जनता को आश्वस्त किया है कि देश में पेट्रोल या डीजल की कोई कमी नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, 200 लीटर प्रतिदिन की सीमा किसी भी निजी कार या दोपहिया वाहन मालिक की दैनिक आवश्यकता से कहीं अधिक है। इसलिए आम उपभोक्ताओं को इस व्यवस्था से किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।

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