राजस्थान: 20 साल बाद सुलझा पांचना बांध जल विवाद, नहरों में पूरा पानी देख किसानों में खुशी की लहर
करीब 20 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद राजस्थान के करौली स्थित पांचना बांध से कमांड एरिया की नहरों में पूरे वेग से पानी छोड़ा गया। जल विवाद के समाधान और गेट की मरम्मत के बाद शुरू हुए इस प्रवाह से करौली और सवाई माधोपुर के हजारों किसानों में नई उम्मीद जगी है।
राजस्थान के करौली स्थित पांचना बांध से आखिरकार करीब दो दशक बाद कमांड एरिया की नहरों में पूरे वेग से पानी छोड़ा गया। वर्षों से जल विवाद, आंदोलन और इंतजार के बाद यह पल करौली और सवाई माधोपुर के हजारों किसानों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं था। टेस्ट रन के दौरान नहरों में पानी आता देखकर किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में किसान नहरों के किनारे पहुंचे और इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।
करीब दो दशक से चले आ रहे जल विवाद और तकनीकी बाधाओं के कारण कमांड एरिया के किसानों को नहरों से सिंचाई का लाभ नहीं मिल पा रहा था। अब विवाद का समाधान होने के बाद उम्मीद जगी है कि किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए पूरा पानी पहुंचेगा। इससे क्षेत्र की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं राजस्थान युवाशक्ति एकीकृत महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मनोज मीणा ने इसे कमांड एरिया के किसानों के 20 वर्षों के लंबे संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने कहा कि इस दौरान कई धरने-प्रदर्शन और आंदोलन हुए तथा अनेक किसानों पर मुकदमे भी दर्ज किए गए।
क्या है पांचना बांध विवाद?
पांचना बांध करौली जिले में गंभीर नदी पर बना एक प्रमुख सिंचाई परियोजना बांध है। इसका उद्देश्य करौली और सवाई माधोपुर के कमांड क्षेत्र की लगभग 10 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना था। हालांकि, वर्ष 2006 के बाद से नहरों में नियमित रूप से पानी नहीं छोड़ा जा सका क्योंकि जल बंटवारे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था।
एक ओर 39 गांवों के लोग करौली में पांचना बांध पर पहरा देकर पानी रोकने पर अड़े हुए थे, वहीं दूसरी ओर सवाई माधोपुर जिले के 35 गांवों के किसान हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर खंडीप गांव में धरने पर बैठ गये। इस विवाद ने गुर्जर और मीणा समुदायों के बीच टकराव का रूप ले लिया था। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों को सही ठहराते रहे, जिससे विवाद लगातार गहराता गया।
विवाद की मुख्य वजह यह थी कि बांध के डूब क्षेत्र के गांवों के लोग पहले अपने लिए लिफ्ट सिंचाई व्यवस्था की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि बांध निर्माण के दौरान उनकी जमीनें डूब क्षेत्र में चली गईं, इसलिए पानी पर पहला अधिकार उनका होना चाहिए।
दूसरी ओर, कमांड एरिया के किसान नहरों में पानी छोड़ने की मांग पर अड़े थे। उनका कहना था कि वर्ष 1992 से 2005 तक उन्हें नहरों के माध्यम से नियमित सिंचाई का पानी मिलता था, जिसे बाद में बंद कर दिया गया।
कैसे निकला समाधान?
पांचना बांध की नहरों में सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने का मुद्दा पिछले दो दशकों से विवाद और गतिरोध का कारण बना हुआ था। हाईकोर्ट द्वारा समय-समय पर आदेश दिए जाने के बावजूद इसका स्थायी समाधान नहीं निकल पाया था।
मई 2026 में हाईकोर्ट ने पांचना बांध का पानी शीघ्र कमांड क्षेत्र की नहरों में छोड़ने का निर्देश दिया। इसके बाद गंगापुर सिटी के खंडीप गांव में किसान हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार तत्काल पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर महापड़ाव पर बैठ गए।
विवाद के समाधान के लिए राज्य सरकार ने गुर्जर और मीणा समाज के प्रतिनिधियों से कई दौर की वार्ता की। लगातार संवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जल संसाधन विभाग नहरों में पानी छोड़ने के लिए एक व्यवस्थित शेड्यूल तैयार करेगा।
24 जून को कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा खंडीप गांव में चल रहे किसान महापड़ाव में पहुंचे और विवाद सुलझाने का प्रयास किया। सरकार की ओर से एक सप्ताह के भीतर कमांड एरिया की नहरों में पानी छोड़े जाने का आश्वासन दिया गया, जिसके बाद किसान महापड़ाव समाप्त कर दिया गया।
इसी प्रकार करौली जिले में पांचना बांध पर चल रहे धरने को भी प्रशासन और किसानों के बीच वार्ता के बाद समाप्त कराया गया। समाधान की राह खोलने में सामाजिक सद्भाव और किसान एकता के प्रयासों की भी अहम भूमिका रही।
समझौते के तहत डूब क्षेत्र के गांवों के लिए लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने तथा कमांड एरिया की नहरों में तकनीकी परीक्षण के बाद पानी छोड़ने पर सहमति बनी। पांचना बांध क्षेत्र में लिफ्ट सिंचाई परियोजना शुरू करने के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया जा चुका है और इसका कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
तकनीकी खराबी बनी बाधा
समझौते के अनुसार कमांड एरिया की नहरों में जुलाई के पहले सप्ताह में पानी पहुंचना था। हालांकि, तय समय पर पानी नहीं छोड़े जाने से किसानों में असंतोष बढ़ने लगा। इसके बाद पांचना बांध के गेटों की मरम्मत पूरी होने पर 6 जुलाई को पहली बार परीक्षण के तौर पर पानी छोड़ा गया, लेकिन कुछ ही देर बाद एक स्लूस गेट में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे पर्याप्त जल निकासी नहीं हो सकी।
इसके बाद जल संसाधन विभाग ने बांध के सभी स्लूस गेटों की मरम्मत पूरी की और सफलतापूर्वक टेस्ट रन किया। प्रशासन और किसानों की मौजूदगी में हुए इस सफल परीक्षण के बाद अब नहरों में पूरे वेग से पानी छोड़ा गया है, जिससे सिंचाई व्यवस्था बहाल होने की उम्मीद मजबूत हुई है।
हालांकि, विवाद का स्थायी समाधान तभी संभव होगा, जब डूब क्षेत्र के गांवों के लिए घोषित लिफ्ट सिंचाई परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से पूरी हों और नहरों का संचालन पारदर्शी एवं वैज्ञानिक जल प्रबंधन के आधार पर किया जाए, ताकि भविष्य में दोबारा विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
किसानों को उम्मीद है कि यदि पांचना बांध से नियमित रूप से पानी मिलता रहा तो करौली और सवाई माधोपुर के कमांड एरिया में खेती फिर से समृद्ध होगी और क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

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