2031 तक फूड प्रोसेसिंग का स्तर 25% करने का लक्ष्य, 600 अरब डॉलर के अवसर को भुनाने के लिए नई नीति पर सरकार का विचार

केंद्र सरकार ने 2031 तक देश में खाद्य प्रसंस्करण का स्तर 17% से बढ़ाकर 25% करने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए राष्ट्रीय प्रोसेसिंग मिशन या पीएलआई 2.0 जैसी नई योजना पर विचार कर रही है। डेलॉयट-फिक्की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का प्रोसेस्ड फूड उद्योग 2030 तक 600 अरब डॉलर का अवसर पैदा कर सकता है।

2031 तक फूड प्रोसेसिंग का स्तर 25% करने का लक्ष्य, 600 अरब डॉलर के अवसर को भुनाने के लिए नई नीति पर सरकार का विचार

केंद्र सरकार ने वर्ष 2031 तक देश में फूड प्रोसेसिंग का स्तर 17% से बढ़ाकर 25% करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार राष्ट्रीय प्रोसेसिंग मिशन या पीएलआई 2.0 जैसी नई नीति लाने पर विचार कर रही है। इसी बीच, डेलॉयट इंडिया और फिक्की की एक संयुक्त रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत का प्रोसेस्ड फूड उद्योग वर्ष 2030 तक करीब 600 अरब डॉलर का बाजार बन सकता है।

फिक्की द्वारा आयोजित 17वें फूडवर्ल्ड इंडिया 2026 सम्मेलन को संबोधित करते हुए खाद्य प्रसंस्करण सचिव अविनाश जोशी ने कहा कि मंत्रालय ने आंतरिक रूप से वर्ष 2031 तक खाद्य प्रसंस्करण का स्तर कम से कम 25% तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने क्रिसिल की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2010-11 में देश में खाद्य प्रसंस्करण का स्तर लगभग 10% था, जो 2023 में बढ़कर 17% हो गया है।

जोशी ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण का स्तर बढ़ने से कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन होगा, निर्यात बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था के प्राइमरी, सेकंडरी तथा टर्शियरी क्षेत्रों को समान रूप से लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मंत्रालय ने प्रधानमंत्री के समक्ष अतिरिक्त निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय प्रोसेसिंग मिशन अथवा पीएलआई 2.0 जैसी नई योजना का प्रस्ताव रखा है।

उन्होंने कहा कि 2021-22 से 2026-27 तक लागू की जा रही 10,900 करोड़ रुपये की पीएलआई योजना खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की सबसे सफल योजनाओं में से एक साबित हुई है। इस योजना ने निवेश आकर्षित करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने, निर्यात को प्रोत्साहन देने और रोजगार सृजन के सभी लक्ष्य हासिल किए हैं। उन्होंने बताया कि सभी पीएलआई योजनाओं के तहत हुए कुल रोजगार सृजन में अकेले खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 48% रही है, जो इस क्षेत्र की रोजगार सृजन क्षमता को दर्शाती है।

जोशी ने कहा कि देश के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की 90% से अधिक इकाइयां सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) श्रेणी में आती हैं। उन्होंने उद्योग जगत से उत्पादन और आपूर्ति शृंखला की अक्षमताओं को दूर कर भारत को घरेलू ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने का आह्वान किया। 

खाद्य प्रसंस्करण सचिव ने यह भी बताया कि सरकार प्रोसेस्ड फूड के लिए 'भारत' ब्रांड विकसित करने पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य भारतीय व्यंजनों और भारतीय अल्कोहलिक पेय पदार्थों को वैश्विक पहचान दिलाना है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय उद्योग के सहयोग से ऐसे कई कदम उठाएगा, जिससे भारतीय खाद्य उत्पादों और व्यंजनों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिल सके। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

इस अवसर पर जारी डेलॉयट इंडिया-फिक्की की संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मूल्य आधारित विकास के नए चरण में प्रवेश कर रहा है। बढ़ती आय, प्रीमियम उत्पादों की मांग, डिजिटल तकनीकों के विस्तार और इनोवेशन के कारण वर्ष 2030 तक यह क्षेत्र लगभग 600 अरब डॉलर का अवसर पैदा कर सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ताओं में स्वास्थ्यवर्धक, सुविधाजनक और उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। पोषण और फंक्शनल फूड श्रेणी का विस्तार सामान्य खाद्य बाजार की तुलना में लगभग दोगुनी गति से हो रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस एनालिटिक्स का उपयोग मांग के पूर्वानुमान, मैन्युफैक्चरिंग, उत्पाद विकास और मार्केटिंग में तेजी से बढ़ रहा है। भारत के 84% सीईओ जेनरेटिव एआई में निवेश बढ़ा रहे हैं, जिससे नए उत्पादों के विकास का समय 30-60% तक कम हो रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2030 तक भारत के प्रमुख महानगरों में खाने-पीने की चीजों की  खुदरा बिक्री का 25-30% हिस्सा ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों के माध्यम से होगा। वर्तमान में 70% नए खाद्य उत्पाद पहले ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लॉन्च किए जाते हैं और बाद में पारंपरिक खुदरा बाजार में पहुंचते हैं।

हालांकि भारत का खाद्य निर्यात 50 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, लेकिन इसमें प्रोसेस्ड खाद्य उत्पादों की हिस्सेदारी केवल लगभग 20% है। रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य प्रसंस्करण इन्फ्रास्ट्रक्चर, एआई, ऑटोमेशन, आईओटी, मजबूत आपूर्ति शृंखला और नियामकीय सुधारों में निरंतर निवेश से मूल्य संवर्धित निर्यात बढ़ाने और इस क्षेत्र की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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