सीएसएसआरआई लखनऊ में मृदा स्वास्थ्य एवं जल प्रबंधन पर किसानों को पांच दिन का प्रशिक्षण

केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) और एचसीएल फाउंडेशन ने हरदोई के 30 किसानों के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया। कार्यक्रम में एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, जल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, जैविक इनपुट उत्पादन, जलवायु-अनुकूल खेती और टिकाऊ कृषि तकनीकों पर व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण देकर किसानों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

सीएसएसआरआई लखनऊ में मृदा स्वास्थ्य एवं जल प्रबंधन पर किसानों को पांच दिन का प्रशिक्षण

केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) के लखनऊ स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र एवं एच.सी.एल. फाउंडेशन के सयुंक्त तत्वाधान में किसानों के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हरदोई जनपद के किसानों के लिए यह प्रशिक्षण ‘एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के इनपुट का उत्पादन एवं एकीकृत जल प्रबंधन’ विषय पर था।

29 जून से 3 जुलाई के दौरान आयोजित इस ट्रेनिंग प्रोग्राम का मकसद इनपुट डेवलपमेंट और प्रोडक्शन के बारे में प्रैक्टिकल अनुभव और जानकारी देना था। साथ ही, इसमें सोडिक और जल-जमाव वाले इलाकों में खेत पर पानी के मैनेजमेंट, जलवायु के हिसाब से खेती के तरीकों, मिट्टी की सेहत के प्रबंधन और टिकाऊ खेती की एडवांस तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी गई।

इस ट्रेनिंग प्रोग्राम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश सरकार के सीनियर एडवाइजर डॉ. सी.पी. श्रीवास्तव ने किया। अपने उद्घाटन भाषण में, उन्होंने किसानों की क्षमता बढ़ाने और राज्य में खराब हो चुकी मिट्टी की उत्पादन क्षमता को बनाए रखने में योगदान के लिए आयोजकों की कड़ी मेहनत की तारीफ की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी पहल के अनुसार खाद का संतुलित इस्तेमाल किया जाना चाहिए और इसके साथ ही विकल्प के तौर पर उपलब्ध विभिन्न ऑर्गेनिक और बायो-इनपुट का भी इस्तेमाल करना चाहिए। 

गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर मौजूद BBAU, लखनऊ के प्रोफेसर नवीन कुमार अरोड़ा ने खेत स्तर पर बायोलॉजिकल इनपुट तैयार करने के फायदों पर रोशनी डाली। इससे केमिकल का इस्तेमाल कम होता है। साथ ही यह पर्यावरण, इंसानों और मिट्टी की सेहत के लिए सुरक्षित होता है। 

क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, लखनऊ के हेड डॉ. ए.के. दुबे ने मेहमानों और किसानों का स्वागत किया और रिसर्च स्टेशन की गतिविधियों और उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धान-गेहूं के अलावा ज्यादा कीमत वाले फलों का उत्पादन आय बढ़ाने और संसाधनों के ज्यादा इस्तेमाल से बचने में मदद कर सकता है। 

शुरुआत में, ट्रेनिंग प्रोग्राम के प्रधान वैज्ञानिक और कोर्स डायरेक्टर डॉ. संजय अरोड़ा ने प्रैक्टिकल अनुभव के साथ क्षमता निर्माण की कार्ययोजना पर प्रकाश डाला और कहा कि यह ट्रेनिंग युवा किसानों को अनुभव और वैज्ञानिक जानकारी देगी और फार्म स्तर पर एग्रो-इनपुट के लिए उद्यमिता कौशल विकसित करेगी। 

एचसीएल फाउंडेशन के सांडी प्रोजेक्ट के लीड डॉ. पंकज औदिच्य ने इस संयुक्त प्रयास के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया और क्षेत्र के किसानों की चुनौतियों और इस 5-दिवसीय कार्यक्रम में शामिल विशेषज्ञों और ट्रेनिंग प्रोग्राम से उम्मीदों के बारे में संक्षेप में बताया। 

हरदोई से फाउंडेशन के अधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों के साथ कुल 30 किसानों ने भाग लिया। सत्र का समापन ट्रेनिंग के कोऑर्डिनेटर डॉ. अर्जुन सिंह के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ संजीव कुमार, उप महा निदेशक उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान  परिषद्, लखनऊ ने किसान हित में इस तरह के कार्यक्रम के आयोजन के लिए संस्थान की सराहना की।

प्रधान वैज्ञानिक डॉ सुनील कुमार झा ने आयोजन में सहयोग करते हुए मंच संचालन किया। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. रहमान, डॉ. अनूप कुमार दीक्षित कृषि विज्ञान केंद्र, सीतापुर के अध्यक्ष डॉ. दया श्रीवास्तव एवं एचसीएल के तौफीक अहमद, अजाज आलम, राहुल एवं राकेश कुमार मौजूद रहे।

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