बायोगैस के लिए भारत-जापान की नई पहल, देशभर में स्थापित होंगे 1,000 सीबीजी और जैविक उर्वरक संयंत्र
भारत और जापान ने डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से देशभर में 1,000 बायोगैस और जैविक उर्वरक संयंत्र स्थापित करने की पहल शुरू की है। यह कार्यक्रम गोबरधन योजना को मजबूत करेगा, ग्रामीण आजीविका बढ़ाएगा, अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करेगा, ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा और स्वच्छ ऊर्जा तथा टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देगा।
भारत और जापान ने ऊर्जा सुरक्षा, ग्रामीण आजीविका और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देशभर में 1,000 कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और जैविक उर्वरक संयंत्र स्थापित करने की महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है। यह दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह पहल "इंडिया-जापान कोऑपरेटिव बायोगैस फॉर ग्रोथ (CBG) इनिशिएटिव" के तहत शुरू की गई है। जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की भारत यात्रा के दौरान घोषित 16 प्रमुख परिणामों में यह भी शामिल था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर में फैली डेयरी सहकारी समितियों के व्यापक नेटवर्क का उपयोग करते हुए बायोगैस उत्पादन और जैविक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देना है।
संयुक्त प्रेस वक्तव्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भारत और जापान आर्थिक सुरक्षा तथा ऊर्जा सुरक्षा के महत्व को पूरी तरह समझते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा पर संयुक्त रोडमैप को अपनाया है, जिसके माध्यम से सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाया जाएगा।
ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-जापान बायोगैस पहल के तहत देशभर में 1,000 बायोगैस और जैविक उर्वरक संयंत्र स्थापित करने के लिए सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे केंद्र सरकार की गोबरधन (GOBARdhan) पहल को और मजबूती मिलेगी।
प्रस्तावित संयंत्रों में गोबर, कृषि अवशेषों तथा अन्य जैविक अपशिष्टों से स्वच्छ बायोगैस और जैविक खाद का उत्पादन किया जाएगा। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा और सर्कुलर कृषि व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
इस पहल से डेयरी किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए आय के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। कृषि एवं पशुधन से निकलने वाले अपशिष्ट का मूल्य संवर्धन होगा, जैविक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, मिट्टी की उर्वरता में सुधार होगा और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सहयोग भारत के गांवों में सतत विकास, समृद्धि और ग्रामीण आजीविका को नई गति देगा। डेयरी सहकारी समितियों को रिन्यूएबल एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर से जोड़कर यह कार्यक्रम स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का विकेंद्रीकृत मॉडल विकसित करेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित होगी।
दोनों देशों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में संभावित व्यवधानों, विशेषकर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए ऊर्जा रेजिलिएंस पहल भी शुरू की है। इसके साथ ही बैटरी, हरित हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।
भारत और जापान ने आर्थिक सुरक्षा को साझा रणनीतिक प्राथमिकता बताते हुए महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और ऊर्जा परिवर्तन से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई। दोनों देशों का उद्देश्य साझा नीतिगत दृष्टिकोण को ठोस परिणामों में बदलना है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो, जलवायु लक्ष्यों को गति मिले और दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को नई मजबूती प्राप्त हो।
यह बायोगैस पहल भारत की रिन्यूएबल एनर्जी यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, जैविक अपशिष्टों का बेहतर उपयोग, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने के राष्ट्रीय प्रयासों को भी बल मिलेगा।

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