केंद्र ने प्याज का खरीद मूल्य बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल किया, बफर स्टॉक के लिए खरीद बढ़ने की उम्मीद
केंद्र सरकार ने 4 जुलाई से मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) के तहत प्याज की खरीद कीमत में 13% बढ़ोतरी कर इसे 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य किसानों को बेहतर मूल्य दिलाना और 2 लाख टन प्याज के बफर स्टॉक के निर्माण में तेजी लाना है।
बफर स्टॉक के निर्माण में तेजी लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण निधि (PSF) के तहत प्याज की खरीद कीमत में 13 प्रतिशत की है। खरीद मूल्य 1,875 रुपये से बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। संशोधित खरीद मूल्य 4 जुलाई से प्रभावी हो गया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और सरकारी एजेंसियां बफर के लिए निर्धारित 2 लाख टन प्याज की खरीद तेजी से कर सकेंगी।
सरकार ने नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCCF) को मूल्य स्थिरीकरण निधि (PSF) के तहत दो लाख टन प्याज की खरीद का निर्देश दे रखा है।
रूरल वॉयस ने पिछले हफ्ते ही खबर प्रकाशित की थी कि खुले बाजार में दाम अधिक मिलने के कारण बहुत कम किसान सरकारी एजेंसियों को प्याज बेचने के लिए आ रहे हैं। खुले बाजार में अच्छी क्वालिटी का प्याज 3000 रुपये क्विंटल तक के भाव बिक रहा है।
दाम अधिक मिलने के अलावा नाफेड और एनसीसीएफ की खरीद प्रक्रिया और भुगतान में देरी भी एक अहम कारण है। सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव के सचिव नरेंद्र वाधवाने ने बताया था कि सरकारी एजेंसियां 72 घंटे बाद किसानों को भुगतान करती हैं, जबकि खुले बाजार में ट्रेडर उन्हें तत्काल पैसे दे देता है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, देश में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो 2024-25 के 307.67 लाख टन उत्पादन के लगभग बराबर है। मंत्रालय का कहना है कि उत्पादन के मौजूदा अनुमान को देखते हुए फिलहाल देश में प्याज की उपलब्धता को लेकर कोई चिंता नहीं है, हालांकि सामान्य मौसमी रुझान के अनुसार कीमतों में कुछ बढ़ोतरी हो सकती है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, संशोधित खरीद मूल्य से किसानों को बेहतर आय सुनिश्चित होगी और बफर स्टॉक निर्माण को भी मजबूती मिलेगी। मंत्रालय ने बताया कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में वर्तमान भंडार पर्याप्त है और फिलहाल संग्रहीत प्याज की किसी कमी के संकेत नहीं हैं।
देशभर की मंडियों में प्रतिदिन 50,000 मीट्रिक टन से अधिक प्याज की आवक हो रही है, जबकि अकेले महाराष्ट्र में यह 30,000 मीट्रिक टन से अधिक है। बेहतर गुणवत्ता वाले प्याज का पर्याप्त भंडार अब भी गोदामों में मौजूद है, जिसे कम आपूर्ति वाले समय में बाजार में उतारे जाने की संभावना है। देश में प्याज का औसत खुदरा मूल्य वर्तमान में 31 रुपये प्रति किलोग्राम है।
मंत्रालय का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में मानसून की देर से दस्तक और सामान्य से कम वर्षा के कारण कुछ व्यापारियों द्वारा सट्टा खरीद की जा रही है, हालांकि प्रमुख उपभोक्ता बाजारों में मौजूदा कीमतों पर मांग में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं देखी गई है। इसके बावजूद महाराष्ट्र के नासिक और मध्य प्रदेश के कुछ उत्पादन क्षेत्रों में भविष्य में कीमतों में सुधार की उम्मीद के चलते सट्टा गतिविधियां बढ़ी हैं, न कि वास्तविक मांग के कारण।
मंत्रालय ने बताया कि जून 2026 के दौरान लगभग 1.50 लाख मीट्रिक टन प्याज का निर्यात हुआ, जो सामान्य स्तर पर है। हालांकि व्यापारियों का मानना है कि कुछ समय के लिए प्याज निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, क्योंकि पाकिस्तान और चीन की नई फसलें खाड़ी देशों, श्रीलंका और सुदूर पूर्व जैसे प्रमुख निर्यात बाजारों में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हैं।
इस बीच, महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में खरीफ प्याज की बुवाई लगभग 15 दिन विलंब से हुई है, जबकि कर्नाटक के चित्रदुर्ग और चल्लकेरे क्षेत्र में बुवाई सामान्य स्तर की लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

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