गुजरात में किसान आंदोलन का असर, ट्रांसमिशन लाइनों के लिए किसानों को बाजार भाव से दोगुने मुआवजे का ऐलान

गुजरात सरकार ने बिजली ट्रांसमिशन लाइनों और टावरों से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजा नीति में बड़ा बदलाव किया है। अब प्रभावित भूमि के लिए जंत्री दर के बजाय बाजार मूल्य के आधार पर दोगुना मुआवजा दिया जाएगा और पूरी राशि काम शुरू होने से पहले एकमुश्त मिलेगी।

गुजरात में किसान आंदोलन का असर, ट्रांसमिशन लाइनों के लिए किसानों को बाजार भाव से दोगुने मुआवजे का ऐलान
प्रतीकात्मक

गुजरात में पावर ट्रांसमिशन लाइनों के खिलाफ किसान आंदोलन का दायरा बढ़ने से सरकार के लिए मुश्किल खड़ी हो गई। किसानों के असंतोष को शांत करने के लिए गुजरात सरकार ने मुआवजे में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। अब ट्रांसमिशन लाइनों और टावरों के लिए किसानों को जमीन का मुआवजा सरकारी जंत्री दर के बजाय मौजूदा बाजार मूल्य के आधार पर दिया जाएगा। सरकार ने किसानों को बाजार मूल्य का दोगुना मुआवजा देने की घोषणा की है। इसके साथ ही मुआवजे का पूरा भुगतान काम शुरू होने से पहले एकमुश्त किया जाएगा।

गुजरात में पावर ट्रांसमिशन लाइनों और टावरों के लिए जमीन के मुआवजे को लेकर किसानों में असंतोष लंबे समय से था, लेकिन मौजूदा आंदोलन ने 9 जून 2026 से जोर पकड़ा और मोरबी जिले का जेतपर गांव इसका प्रमुख केंद्र बन गया। यहां 17 जून से किसानों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। आंदोलन को आसपास के कई गांवों के किसानों का समर्थन मिला।

पुरानी नीति के तहत, कृषि भूमि से गुजरने वाले बिजली की लाइनों और खंभों के लिए मुआवजे का भुगतान जंत्री मूल्य के 200 प्रतिशत पर किया जाता था। अब सरकार ने जंत्री दर के बजाय बाजार मूल्य को आधार बनाकर उसका दोगुना मुआवजा देने और भुगतान व्यवस्था में बदलाव का फैसला किया है। इस लिहाज से आंदोलन को एक बड़ी नीतिगत सफलता मिली है।

शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया, “अब तक कृषि भूमि से गुजरने वाली बिजली ट्रांसमिशन लाइनों और लगाए जाने वाले खंभों के लिए जंत्री मूल्य के 200 प्रतिशत की दर से मुआवजा दिया जाता था। किसान संगठनों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर विचार करते हुए राज्य सरकार ने फैसला किया है कि अब मुआवजे की गणना जंत्री दर के बजाय जमीन के मौजूदा बाजार मूल्य के दोगुने के आधार पर की जाएगी।”

बाजार मूल्य तय करेगी समिति

भूमि का बाजार मूल्य निर्धारित करने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार मार्केट रेट कमेटी (MRC) गठित करेगी। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें जिला कलेक्टर, प्रभावित भूमि मालिकों के प्रतिनिधि, किसानों द्वारा नामित अधिकृत बाजार मूल्यांकनकर्ता और संबंधित ट्रांसमिशन सेवा प्रदाता के प्रतिनिधि शामिल होंगे। ट्रांसमिशन लाइन के राइट ऑफ वे (RoW) कॉरिडोर के लिए भी मुआवजा MRC द्वारा निर्धारित बाजार मूल्य से जोड़ा जाएगा। 

टावर के लिए बढ़ा मुआवजा

नई नीति में बिजली ट्रांसमिशन टावर के कारण प्रभावित होने वाली भूमि के मुआवजे का दायरा भी बढ़ाया गया है। पहले केवल टावर के वास्तविक बेस एरिया के आधार पर मुआवजा तय किया जाता था। अब टावर बेस के चारों ओर एक मीटर अतिरिक्त क्षेत्र को भी मुआवजे की गणना में शामिल किया जाएगा।

काम शुरू होने से पहले मुआवजा

सरकार ने मुआवजा भुगतान की पुरानी किस्त प्रणाली भी समाप्त कर दी है। पहले किसानों को 40 प्रतिशत भुगतान नींव का काम शुरू होने पर, 40 प्रतिशत टावर खड़ा होने पर और शेष 20 प्रतिशत ट्रांसमिशन लाइन के तार बिछाए जाने के बाद दिया जाता था।

नई नीति के तहत किसानों को 100 प्रतिशत मुआवजा परियोजना का काम शुरू होने से पहले ही एकमुश्त दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे भुगतान में देरी की समस्या दूर होगी और प्रभावित किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।

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