5400 रुपये तक पहुंची चीनी की एक्स-फैक्ट्री कीमतें, लगातार तेजी बरकरार रहने के आसार
चीनी की एक्स-फैक्ट्री कीमतें महाराष्ट्र में 5,400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं, यह कीमत जीएसटी के बिना है, जबकि दिल्ली में थोक भाव करीब 5,800 रुपये तक पहुंच गया है। उत्पादन में कमी, निर्यात और इथेनॉल उत्पादन के बीच 30 सितंबर तक चीनी का क्लोजिंग स्टॉक 30-33 लाख टन रहने का अनुमान है, जिससे त्योहारी सीजन में घरेलू आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
देश में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। उत्तर प्रदेश की एम-ग्रेड चीनी का एक्स-फैक्ट्री दाम 18 अगस्त को 5,400 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। इस पर पांच फीसदी जीएसटी लागू होता है। कीमतों में यह तेजी आने वाले दिनों में भी बरकरार रह सकती है। चीनी की बढ़ती कीमतों ने केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
उत्पादन में कमी के बावजूद चीनी के निर्यात और इथेनॉल उत्पादन के चलते चालू सीजन के अंत में चीनी का स्टॉक रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। इसका असर घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों पर दिख रहा है। महाराष्ट्र में चीनी की एक्स-फैक्ट्री कीमतें लगभग 5,300 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं। जीएसटी जोड़ने के बाद इसका भाव 5,550-5,600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच रहा है।
दिल्ली में चीनी का स्पॉट प्राइस 5,775 रुपये और मुजफ्फरनगर में 5,754 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुका है। चीनी की एक्स-फैक्ट्री कीमतों में बढ़ोतरी का असर थोक कीमतों पर भी दिखने लगा है। दिल्ली में चीनी का थोक भाव लगभग 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। इन बढ़ी हुई कीमतों का असर जल्द ही खुदरा बाजार पर भी दिखाई देगा, जहां कीमतें पहले ही 58-60 रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुंच गई हैं। आने वाले दिनों में त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की कीमतों में और बढ़ोतरी सरकार की परेशानी बढ़ा सकती है।
लेकिन जमीनी हकीकत और सरकारी आंकड़ों में कितना विरोधाभास है, यह कीमतों का अंतर साबित करता है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग की प्राइस मॉनिटरिंग डिविजन के आंकड़ों के मुताबिक, चीनी का औसत दैनिक खुदरा मूल्य 51.68 रुपये प्रति किलो है।
दो महीने में 32 फीसदी बढ़े दाम
पिछले दो महीनों में चीनी की थोक कीमतें लगभग 4,400 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं। इस तरह थोक कीमतों में करीब 32 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जो हाल के वर्षों में अप्रत्याशित उछाल है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का यह सिलसिला जारी रहा तो उपलब्धता बढ़ाने के लिए चीनी के आयात की नौबत आ सकती है।
फिलहाल केंद्र सरकार ने चीनी के आयात पर 100 फीसदी का सीमा शुल्क लगा रखा है। इस समय वैश्विक बाजार में लंदन व्हाइट शुगर का भारत के लिए एफओबी दाम 523 डॉलर प्रति टन (4,765 रुपये प्रति क्विंटल) और न्यूयॉर्क रॉ शुगर कॉन्ट्रैक्ट 16.87 सेंट है, जो भारत के लिए एफओबी दाम के हिसाब से करीब 3,700 रुपये प्रति क्विंटल है। उद्योग सूत्रों ने रूरल वॉयस को बताया कि उत्पादन सीजन के शुरुआती आंकड़ों और वास्तविक उत्पादन के बीच भारी अंतर के चलते कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है और यह बढ़ोतरी जारी रह सकती है।
त्योहारी सीजन की चिंता
ऐसे में, जब त्योहारी सीजन शुरू हो चुका है और चीनी के दामों में तेजी बरकरार रहने के आसार हैं, सरकार के लिए परेशानी खड़ी होना तय है। इस चुनौती का सामना करने के लिए अगर सरकार को चीनी के शुल्क-मुक्त आयात का विकल्प अपनाना पड़ा तो इसका घरेलू उद्योग और गन्ना किसानों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। ऐसे में सरकार का अगला कदम काफी महत्वपूर्ण होगा।
गौरतलब है कि घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी को देखते हुए केंद्र सरकार ने जमाखोरी और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए 1 अगस्त से 30 नवंबर तक देशभर में चीनी के स्टॉक की सीमा तय की है। इससे पहले केंद्र सरकार ने चीनी मिलों के पास उपलब्ध स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराने का आदेश भी जारी किया था। लेकिन सरकार की ओर से चीनी की कीमतों को स्थिर रखने के लिए किए गए उपाय अब तक सकारात्मक परिणाम देने में विफल रहे हैं।
चीनी व्यापार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सरकार द्वारा प्रत्येक डीलर के लिए चीनी स्टॉक की सीमा 4,000 क्विंटल तय किए जाने के बाद ट्रेडर्स और बिचौलियों ने चीनी का स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया। इससे दाम कम होने के बजाय कीमतों में और तेजी आ रही है। दरअसल, चीनी व्यापार से जुड़े लोगों को संभावित तंग आपूर्ति का अंदाजा पहले से था।
जमाखोरी पर अंकुश लगाने का प्रयास
केंद्र सरकार के खाद्य मंत्रालय ने चीनी मिलों पर कीमतों में बढ़ोतरी के लिए सट्टेबाजी की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। चीनी निदेशालय द्वारा 14 अगस्त को चीनी मिलों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि कई चीनी मिलों के पास उनके द्वारा घोषित मात्रा से अधिक चीनी का स्टॉक है। इसके साथ ही, चीनी के सौदे होने के बाद मिलें उसकी आपूर्ति में देरी कर रही हैं, जिससे चीनी की कीमतों में सट्टेबाजी को बढ़ावा मिल रहा है। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि स्टॉक में विसंगति पाए जाने पर चीनी मिलों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत शुगर कंट्रोल ऑर्डर, 2025 के प्रावधानों के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पेराई जल्द शुरू करने की पेशकश
इस बीच, चीनी मिलों ने आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आगामी सीजन की पेराई जल्द शुरू करने की पेशकश की है। इसके एवज में चीनी मिलों ने जीएसटी में छूट जैसी कई रियायतें मांगी हैं। हालांकि, कई व्यावहारिक दिक्कतों के चलते चीनी मिलों के लिए समय से पहले पेराई शुरू करना आसान नहीं होगा।
उद्योग सूत्रों का अनुमान है कि चालू सीजन के अंत में 30 सितंबर, 2026 को देश में चीनी का क्लोजिंग स्टॉक 30-33 लाख टन के बीच रह सकता है, जो कई दशकों में सबसे कम क्लोजिंग स्टॉक होगा। इससे 2026-27 सीजन के शुरुआती दो महीनों में आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।
केंद्र सरकार ने 24 जुलाई को चीनी मिलों में स्टॉक के भौतिक सत्यापन का आदेश दिया था। यह प्रक्रिया 14 अगस्त तक पूरी की जानी थी। लेकिन अभी तक केंद्र सरकार ने चीनी मिलों का भौतिक सत्यापन पूरा होने के बाद चीनी स्टॉक के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं। अगर सरकार चीनी स्टॉक का आधिकारिक आंकड़ा जारी करती है, तो इससे बाजार में अटकलों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।

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