अमेरिका का इथेनॉल निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर, भारत प्रमुख बाजारों में एक
2026 में अमेरिका का इथेनॉल निर्यात रिकॉर्ड गति पर बना हुआ है। जून तक निर्यात मात्रा में 12 प्रतिशत और मूल्य में 21 प्रतिशत बढ़ा। पिछले दो वर्षों में भारत ने अमेरिका से काफी इथेनॉल आयात किया है। वर्ष 2021-25 के बीच भारत में इथेनॉल खपत तीन गुना से अधिक हुई है।
अमेरिका का इथेनॉल निर्यात लगातार बढ़ रहा है। सितंबर 2026 की USDA रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक अमेरिकी इथेनॉल निर्यात वर्ष 2025 की रिकॉर्ड गति की तुलना में मात्रा के लिहाज से 12 प्रतिशत और मूल्य के लिहाज से 21 प्रतिशत अधिक रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर इथेनॉल की बढ़ती मांग, ब्लेंडिंग संबंधी नियमों में बदलाव और ब्राजील से कम निर्यात प्रतिस्पर्धा ने इस वृद्धि में योगदान दिया है। भारत भी वैश्विक इथेनॉल मांग बढ़ाने वाले प्रमुख बाजारों में शामिल है। हालांकि अमेरिका से भारत को होने वाला इथेनॉल निर्यात मुख्य रूप से औद्योगिक और रासायनिक उपयोग के लिए है।
वर्ष 2025 में अमेरिकी इथेनॉल निर्यात लगातार दूसरे साल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। यह बढ़कर 8.4 अरब लीटर हो गया, जिसका मूल्य 4.7 अरब डॉलर था। 2024 में निर्यात 7.4 अरब लीटर और मूल्य 4.3 अरब डॉलर था। USDA ने भारत के अलावा कनाडा, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, कोलंबिया और फिलीपींस को भी प्रमुख इथेनॉल आयातक बाजारों में शामिल किया है।
भारत में इथेनॉल खपत तीन गुना से अधिक
USDA की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को अमेरिकी औद्योगिक इथेनॉल निर्यात 2024 में रिकॉर्ड 71.8 करोड़ लीटर रहा था, जो 2025 में मामूली घटकर 71.1 करोड़ लीटर रह गया। रिपोर्ट में भारत में इथेनॉल की मजबूत मांग को ऊंची ब्लेंडिंग दर, पेट्रोल की बढ़ती खपत और घरेलू इथेनॉल उत्पादन में वृद्धि से जोड़ा गया है।
भारत में 2021 से 2025 के बीच ईंधन इथेनॉल की खपत तीन गुना से अधिक बढ़ी, जबकि औसत इथेनॉल ब्लेंडिंग दर करीब 8 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत हो गई। फीडस्टॉक के विविधीकरण सहित घरेलू उत्पादन में विस्तार ने नवंबर 2025 तक E20 लक्ष्य पूरा करने के लिए उपलब्ध आपूर्ति बढ़ाने में मदद की।
भारत में आयातित इथेनॉल को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है। USDA के अनुसार, घरेलू इथेनॉल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा जब ईंधन ब्लेंडिंग की ओर स्थानांतरित हुआ, तो औद्योगिक और रासायनिक उपयोग के लिए उपलब्ध आपूर्ति कम हुई। अमेरिकी इथेनॉल निर्यात ने इन उपयोगों के लिए उपलब्ध मात्रा की भरपाई में मदद की।
ब्राजील के कम निर्यात से अमेरिका को फायदा
ब्राजील से कम निर्यात प्रतिस्पर्धा ने भी अमेरिकी निर्यात की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2025 में वैश्विक इथेनॉल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 64 प्रतिशत रही, जबकि 2020-23 के दौरान यह 48 प्रतिशत थी। इसी अवधि में ब्राजील की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत से घटकर 12 प्रतिशत रह गई।
ब्राजील में घरेलू इथेनॉल खपत मजबूत रहने के कारण उसके उत्पादन का बड़ा हिस्सा घरेलू बाजार में खप गया। ब्राजील ने अगस्त 2025 में पेट्रोल में अनिवार्य इथेनॉल ब्लेंडिंग दर E27 से बढ़ाकर E30 कर दी, जिससे घरेलू मांग को और बढ़ावा मिला।
हालांकि, USDA ने 2026 के लिए ब्राजील को एक प्रमुख अनिश्चितता बताया है। मक्का आधारित इथेनॉल उत्पादन में तेजी से हो रहे विस्तार और 2026 के अंत तक अतिरिक्त 3 अरब लीटर उत्पादन क्षमता जुड़ने के अनुमान से ब्राजील का निर्यात बढ़ सकता है और अमेरिकी निर्यातकों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
नए ब्लेंडिंग नियमों से नए बाजार
नए जैव ईंधन नियम भी वैश्विक इथेनॉल आयात मांग बढ़ा रहे हैं। वियतनाम ने जून 2026 में देशभर में E10 ब्लेंडिंग अनिवार्य किया। इसके परिणामस्वरूप 2026 में वहां इथेनॉल खपत पिछले वर्ष की तुलना में आठ गुना से अधिक रहने का अनुमान है। 2026 के पहले छह महीनों में वियतनाम को अमेरिकी इथेनॉल निर्यात 7.3 करोड़ लीटर पहुंच गया, जो 2025 की पूरी मात्रा से आठ गुना अधिक है। USDA के अनुसार, जैव ईंधन नीतियों में बदलाव, व्यापार समझौते, ऊर्जा कीमतें और भू-राजनीतिक घटनाक्रम 2026 के बाकी महीनों में अमेरिकी इथेनॉल निर्यात की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे।

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