हीटवेव से पूरे यूरोप में फसलें प्रभावित, यूरोपीय अनाज उद्योग को 22,000 करोड़ रुपये राजस्व नुकसान की आशंका

अन्य महाद्वीपों की तुलना में यूरोप अधिक तेजी से गर्म हो रहा है। इस वर्ष हीटवेव ने यूरोप में अनाज उत्पादन को भारी नुकसान पहुंचाया है। ECIU के अनुमान के मुताबिक, कम उत्पादन के कारण अनाज उद्योग को करीब 2 अरब यूरो के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। कम पैदावार के अलावा गर्मी और सूखे ने पशु चारे, जल उपलब्धता और कृषि अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ाया है।

हीटवेव से पूरे यूरोप में फसलें प्रभावित, यूरोपीय अनाज उद्योग को 22,000 करोड़ रुपये राजस्व नुकसान की आशंका

यूरोप में 2026 की गर्मियों में आई हीटवेव अब महज मौसम संबंधी आपदा नहीं रह गई है। यह महाद्वीप के अनाज उद्योग के लिए एक बड़ी आर्थिक और खाद्य सुरक्षा चुनौती बनती जा रही है। स्पेन, फ्रांस और इटली के कुछ हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने और लंबे समय तक बारिश की कमी ने फसलों को नुकसान पहुंचाया, पैदावार घटाई और पशु चारे की आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव बनाया है।

इसका तत्काल वित्तीय असर भी बड़ा है। एनर्जी एंड क्लाइमेट इंटेलिजेंस यूनिट (ECIU) ने अनुमान लगाया है कि कम उत्पादन के कारण यूरोपीय अनाज उद्योग को करीब 2 अरब यूरो के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में उद्धृत उद्योग अनुमानों के अनुसार, हीटवेव के कारण यूरोप के अनाज उत्पादन में करीब 90 लाख टन की कमी आ सकती है।

लेकिन बड़ी चिंता यह है कि नुकसान केवल इस साल की फसल तक सीमित नहीं है। गर्मी और सूखे ने बुवाई के फैसलों, फसल की गुणवत्ता, पशु चारे की उपलब्धता, सिंचाई, भंडारण और व्यापार प्रवाह को प्रभावित किया है। कुछ क्षेत्रों में साइलेज मक्का और घास के मैदान विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं। इससे पशुपालकों को अतिरिक्त चारा खरीदने या उपलब्ध अनाज का अधिक हिस्सा पशु आहार के लिए इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ सकती है। इसका असर अनाज बाजार और पूरी खाद्य श्रृंखला की लागत पर पड़ सकता है।

यह संकट यूरोप की बढ़ती जल-संकट की संवेदनशीलता को भी उजागर कर रहा है। इटली इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है, जहां लगातार सूखे और कम जल उपलब्धता ने पो नदी बेसिन को प्रभावित किया है। यह क्षेत्र यूरोप के महत्वपूर्ण कृषि और कृषि-औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है। 

यूरोप में जलवायु परिवर्तन की रफ्तार स्थिति को और गंभीर बनाती है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और कॉपरनिकस के अनुसार, यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है और यहां तापमान वैश्विक औसत की तुलना में दोगुने से अधिक तेजी से बढ़ रहा है। भूमध्यसागर से लेकर आर्कटिक तक रिकॉर्ड गर्मी और व्यापक सूखे के प्रभाव दर्ज किए गए हैं।

मुद्दा अब केवल यह नहीं है कि किसान एक असाधारण हीटवेव का सामना कर सकते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि यदि ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ती रहीं तो कृषि व्यवस्था आर्थिक रूप से टिकाऊ रह पाएगी या नहीं। जलवायु परिवर्तन यूरोप में फसलों के भौगोलिक वितरण को भी बदल रहा है। मक्का जैसी अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों का उत्पादन बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच उत्तरी यूरोप में बढ़ने की उम्मीद है। इससे महाद्वीप के पारंपरिक कृषि उत्पादन मानचित्र में धीरे-धीरे बदलाव आ सकता है।

फ्रांस द्वारा कुछ पहले प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित और अस्थायी इस्तेमाल की अनुमति देना भी इसी नीति-संबंधी दुविधा को दर्शाता है। गर्मी और जलवायु के दबाव के कारण कीट एवं रोगों का खतरा बढ़ने के साथ सरकारों पर पैदावार बचाने का दबाव बढ़ रहा है, जबकि पर्यावरणीय सुरक्षा भी बनाए रखना जरूरी है।

लू और जंगल की आग

विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 8 जुलाई को स्पेन के बार्सिलोना में 40.5°C तापमान दर्ज किया गया, जो WMO की फाब्रा वेधशाला में एक सदी से अधिक समय से दर्ज किए जा रहे आंकड़ों में सबसे अधिक है। ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में जून के दौरान 40°C तापमान दर्ज हुआ, जो शहर में जून का नया तापमान रिकॉर्ड है। पहली बार नीदरलैंड्स ने आठ प्रांतों में अत्यधिक गर्मी को लेकर रेड अलर्ट जारी किया। यहां जून में 39.4°C तापमान दर्ज हुआ, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। फ्रांस के पश्चिमी शहर पुल्लुआ (Pulluau) में तापमान 43.8°C तक पहुंच गया। देश में रात के तापमान ने भी रिकॉर्ड तोड़ते हुए 22°C का स्तर दर्ज किया। वहीं, स्विट्जरलैंड के बेसल में जून का नया तापमान रिकॉर्ड 39°C दर्ज किया गया।

इस वर्ष अब तक पूरे यूरोप में 1,528 जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। यूरोप में लगी कुछ सबसे भीषण आग ने पाइरोक्यूम्युलोनिम्बस बादलों या ‘फायर क्लाउड्स’ का निर्माण तक किया है। ये आग से उत्पन्न गरज वाले तूफानी बादल होते हैं, जो जंगल की आग को नियंत्रित करना और भी मुश्किल बना सकते हैं।

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