कुछ वर्षों में दोगुना हो सकता है भारत का दलहन आयात, मौजूदा वर्ष में अब तक आयात में 62 प्रतिशत वृद्धि
भारत का दलहन आयात अगले कुछ वर्षों में मौजूदा करीब 60 लाख टन से बढ़कर 100-120 लाख टन तक पहुंच सकता है। वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-जुलाई में आयात 62 प्रतिशत बढ़कर 17 लाख टन हो गया। मसूर और पीली मटर के आयात में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई।
भारत में दलहन की बढ़ती खपत और घरेलू उत्पादन को लेकर चिंता के बीच अगले कुछ वर्षों में देश का सालाना दलहन आयात बढ़कर 100-120 लाख टन तक पहुंच सकता है। यह मौजूदा करीब 60 लाख आयात के लगभग दोगुना होगा। कनाडा के हैलिफैक्स में आयोजित 2026 पल्स एंड स्पेशल क्रॉप्स कॉन्फ्रेंस में टॉर्क इंडिया की सीईओ गरिमा जैन ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि भारत फिलहाल सालाना करीब 300 लाख टन दलहन की खपत करता है, जो 2035 तक बढ़कर 450 लाख टन हो सकती है। उन्होंने कहा कि खपत बढ़ने के साथ भारत का आयात भी बढ़ेगा और देश में प्रोटीन की मांग तेजी से बढ़ने वाली है।
कनाडा भारत के लिए पहले से ही दलहन का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है, खासकर मसूर और पीली मटर के मामले में। भारत फिलहाल अफ्रीका से करीब 15 लाख टन बीन्स, ब्राजील और म्यांमार से 10 लाख टन साबुत उड़द, ऑस्ट्रेलिया से 12.5 लाख टन चना, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से 10 लाख टन लाल मसूर तथा करीब 12 लाख टन पीली मटर का आयात करता है। पीली मटर की आपूर्ति में कनाडा की महत्वपूर्ण भूमिका है।
जैन ने कहा कि भारत धीरे-धीरे ऐसी नीति से आगे बढ़ रहा है, जिसमें मुख्य जोर आपूर्ति की कमी को पूरा करने पर था। अब मांग भी नीतिगत फैसलों को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक बन रही है। द वेस्टर्न प्रोड्यूसर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कनाडा के किसानों को दलहन का उत्पादन बढ़ाते रहने की सलाह दी, क्योंकि भारतीय बाजार में मांग बढ़ने की संभावना है।
दलहन आयात में पहले ही तेजी
ताजा व्यापार आंकड़े भी भारत की बढ़ती आयात निर्भरता की ओर संकेत करते हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-जुलाई के दौरान भारत का दलहन आयात सालाना आधार पर 62 प्रतिशत बढ़कर 17 लाख टन हो गया। इस दौरान आयात का मूल्य 32 प्रतिशत बढ़कर 0.97 अरब डॉलर रहा। घरेलू उत्पादन में संभावित कमी की आशंका के बीच कारोबारियों ने विदेशों से खरीद बढ़ाई है।
दालों में मसूर का आयात सबसे अधिक बढ़ा। अप्रैल-जुलाई में इसका आयात 227 प्रतिशत बढ़कर 5.7 लाख टन हो गया। पीली मटर का आयात 91 प्रतिशत बढ़कर 5.2 लाख टन रहा। तुअर का आयात 7 प्रतिशत बढ़कर 3.1 लाख टन हुआ, जबकि उड़द का आयात 20 प्रतिशत घटकर 1.8 लाख टन रह गया।
हालांकि ट्रेडर्स का मानना है कि आने वाले महीनों में आयात की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है, क्योंकि पीली मटर और मसूर की वैश्विक कीमतों में हाल के सप्ताहों में तेज बढ़ोतरी हुई है। रूस-यूक्रेन संघर्ष से जुड़ी लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण रूस से आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
फसल का अनुमान आयात नीति के लिए अहम
भारत में फिलहाल पीली मटर पर 30 प्रतिशत और मसूर पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क है। जैन के अनुसार, सरकार आयात नीति में बदलाव से पहले आगामी रबी फसल की स्थिति का स्पष्ट आकलन करना चाहेगी। इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से 15 प्रतिशत कम रहा है, जिससे खरीफ दलहन उत्पादन पर दबाव पड़ने की आशंका है। इससे घरेलू आपूर्ति में कमी और कीमतों में बढ़ोतरी की स्थिति में आयात की जरूरत बढ़ सकती है। जैन ने कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार आयात शुल्क में राहत पर विचार कर सकती है, खासकर पीली मटर के मामले में, जो अपेक्षाकृत सस्ती दाल है।
भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर भी बातचीत चल रही है। इससे भी भविष्य में दोनों देशों के बीच दलहन व्यापार पर असर पड़ सकता है।

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