बासमती धान के दाम 5,000 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंचे, निर्यात मांग से किसानों को मिल रहा बेहतर भाव
खाड़ी देशों में भारी निर्यात मांग के कारण प्रीमियम बासमती धान (1121 किस्म) का भाव 5,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। इस जोरदार उछाल ने पिछले कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिससे किसानों को पिछले साल के मुकाबले 1,000 से 1,500 रुपये प्रति क्विंटल तक अधिक दाम मिल रहा है।
इस साल धान की खेती के रकबे में गिरावट और फसल पर मौसम की मार के बीच किसानों के लिए अच्छी खबर है। बासमती धान की बेहतर कीमत मिलने से किसानों को राहत मिली है।
पंजाब और हरियाणा की मंडियों में बासमती की प्रीमियम किस्मों के भाव 5,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गए हैं। कुछ मंडियों में 1121 किस्म का भाव 5,500 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज किया गया है। किसानों को बासमती धान का भाव करीब 4,500 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच मिल रहा है। पिछले साल इसी समय किसानों को बासमती धान के लिए करीब 3,500 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहे थे। पानीपत की मतलौडा मंडी में बासमती धान का अधिकतम दाम 5,551 रुपये और हिसार की बरवाला मंडी में 5,471 रुपये तक पहुंचा।
इस साल हरियाणा और पंजाब में किसानों को बासमती धान का भाव पिछले साल के मुकाबले 1,000 से 1,500 रुपये प्रति क्विंटल तक अधिक मिल रहा है। इसकी प्रमुख वजह पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों से बढ़ती मांग है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। आयातक देश बासमती का स्टॉक बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे भारतीय बासमती की मांग और कीमतों को समर्थन मिल रहा है।
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (AIREA) के अध्यक्ष सतीश गोयल ने रूरल वॉयस को बताया कि बासमती धान का भाव 5,000 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मांग अधिक होने के कारण निर्यातक किसानों को बेहतर भाव दे पा रहे हैं। ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच खाड़ी देशों से बढ़ी मांग ने कीमतों को समर्थन दिया है। हालांकि, निर्यातकों को मालभाड़े में वृद्धि और समुद्री परिवहन मार्गों से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बासमती चावल की निर्यात मांग अधिक होने का फायदा इस साल किसानों को मिल रहा है। भारतीय किसान यूनियन (शहीद भगत सिंह) के नेता और हरियाणा के अंबाला जिले के किसान तेजवीर सिंह ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्थितियों को देखते हुए इस साल बासमती के दाम अधिक रहने का अनुमान था। इसलिए बहुत से किसान तुरंत बासमती बेचने की बजाय स्टॉक कर रहे हैं। अभी धान कटाई की शुरुआत है। दिसंबर में कीमतें और अधिक बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।
बासमती चावल की कीमतों में भी उछाल
बासमती धान की कीमतों में तेजी के चलते बासमती चावल के भाव में भी उछाल आया है। दिल्ली में बासमती 1121 चावल की कीमत 10,600 से 10,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है, जबकि हरियाणा के करनाल में इस किस्म के चावल का भाव 9,525 से 9,725 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है। निर्यात में तेजी के चलते मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों पर बासमती 1121 चावल का निर्यात मूल्य एक सप्ताह में करीब 6 फीसदी बढ़कर 1,156 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया है।
65 लाख टन से अधिक बासमती का निर्यात
भारत के बासमती निर्यात में पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों की बड़ी हिस्सेदारी है। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 65.21 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया, जिसका कुल मूल्य 5.67 अरब डॉलर यानी करीब 50,138 करोड़ रुपये रहा।
सऊदी अरब, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारतीय बासमती के प्रमुख खरीदार हैं। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और खाद्य आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण इन देशों में चावल का स्टॉक बढ़ाने की कोशिशें हो रही हैं। इससे बासमती चावल की कीमतों में तेजी है, जिसका लाभ किसानों को भी मिल रहा है।
हालांकि, निर्यातकों का कहना है कि घरेलू बाजार में बासमती धान की कीमतें बहुत अधिक बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चावल की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है। महंगे भारतीय बासमती चावल के विकल्प के तौर पर आयातक देश सस्ते गैर-बासमती चावल और अन्य अनाज की ओर भी रुख कर सकते हैं।

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