CNH ने फसल अवशेष प्रबंधन कार्यक्रम का किया विस्तार, लुधियाना में खोला पार्ट्स वेयरहाउस
CNH ने फसल अवशेष प्रबंधन कार्यक्रम का विस्तार 11 राज्यों के 25 स्थानों तक किया है। इसके तहत 60,000 टन धान की पराली की बेलिंग की गई और अनुमानित 97,000 टन कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन रोका गया। कंपनी ने लुधियाना में नया वेयरहाउस भी खोला है।
कृषि मशीनरी निर्माता कंपनी CNH ने फसल अवशेष प्रबंधन और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों का विस्तार किया है। कंपनी ने अपनी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) पहल के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर पंजाब के लुधियाना में एक समर्पित स्पेयर पार्ट्स वेयरहाउस भी शुरू किया है। इससे पंजाब और हरियाणा के किसानों को कृषि मशीनरी के पुर्जे समय पर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
अक्टूबर 2017 में पंजाब के कल्लर माजरी गांव से शुरू हुई फसल अवशेष प्रबंधन पहल अब 11 राज्यों के 25 स्थानों तक पहुंच गई है। कंपनी के अनुसार, कल्लर माजरी में लगातार 10 वर्षों से पराली नहीं जलाई जा रही है।
इस कार्यक्रम के तहत अब तक लगभग 60,000 टन धान की पराली की गांठें (बेल्स) बनाई गई हैं। इससे करीब 39,900 एकड़ कृषि भूमि पर फसल अवशेष को जलाने से बचाया गया है। कंपनी के मुताबिक इस पहल से 7,500 से अधिक किसानों को सीधे लाभ मिला है और अनुमानित 97,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन को रोकने में मदद मिली है। इसके अलावा लगभग 16,000 से 20,000 परिवारों और ग्रामीणों को परोक्ष लाभ भी पहुंचा है।
कंपनी ने देश के 25 स्थानों पर प्रदर्शनी आयोजित की जिनमें 3,000 से 4,000 किसानों ने हिस्सा लिया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को पराली प्रबंधन के टिकाऊ विकल्पों से परिचित कराया गया।
पंजाब से शुरू हुआ यह कार्यक्रम अब हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तराखंड सहित कई राज्यों में फैल चुका है। हाल के वर्षों में इसका विस्तार कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु तक भी हुआ है।
नया वेयरहाउस किसानों को समय पर उपलब्ध कराएगा पुर्जे
लुधियाना में स्थापित नया वेयरहाउस CNH के बड़े ट्रैक्टरों और बेलर मशीनों के लिए असली स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। खास तौर पर धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच कम समय को देखते हुए यह सुविधा महत्वपूर्ण है। वेयरहाउस सप्ताह के सातों दिन काम करेगा।
कंपनी के अनुसार, GPS सक्षम बेड़े और वास्तविक समय में निगरानी की सुविधा के माध्यम से अधिकांश ग्राहक स्थलों तक 24 घंटे के भीतर पुर्जे पहुंचाने का लक्ष्य है। इससे डिलीवरी में लगने वाला समय और महत्वपूर्ण कृषि सीजन में मशीनों के बंद रहने की अवधि कम करने में मदद मिलेगी। यह वेयरहाउस भारत में CNH के मौजूदा नेटवर्क को मजबूत करेगा, जिसमें 600 से अधिक डीलर और 1,000 से ज्यादा ग्राहक संपर्क केंद्र शामिल हैं।
CNH इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नरिंदर मित्तल ने कहा कि फसल अवशेषों के बिना जलाए प्रबंधन के लिए सही मशीनरी और समय पर उसके पुर्जों की उपलब्धता जरूरी है। धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच सीमित समय होने के कारण यह जरूरत और बढ़ जाती है।
फसल अवशेषों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर
CNH के फसल अवशेष प्रबंधन पोर्टफोलियो में न्यू हॉलैंड ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर, स्क्वायर और राउंड बेलर, गायरो रेक, मल्चर, चॉपर और फॉरेज हार्वेस्टर शामिल हैं। कंपनी के अनुसार, उसका न्यू हॉलैंड ब्रांड वर्ष 1998 से भारत में फसल अवशेषों की बेलिंग को बढ़ावा देने में अग्रणी रहा है।
कंपनी का कहना है कि मशीनरी, बिक्री के बाद की सेवाओं और किसानों के प्रशिक्षण के माध्यम से पराली जलाने के विकल्पों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य फसल अवशेषों के उपयोग को प्रोत्साहित करना, कृषि उत्पादकता में सुधार करना और पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को कम करना है।

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