राजस्थान के 14 जिलों की 80 तहसीलों में सूखा घोषित, छह महीने तक कृषि ऋणों की वसूली पर रोक

राजस्थान सरकार ने 14 जिलों की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इनमें 69 गंभीर रूप से प्रभावित हैं। इस वजह से छह महीने तक कृषि ऋण वसूली स्थगित रहेगी और चारा डिपो खोले जाएंगे। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और गुजरात में भी सूखे का दायरा बढ़ा है।

राजस्थान के 14 जिलों की 80 तहसीलों में सूखा घोषित, छह महीने तक कृषि ऋणों की वसूली पर रोक

राजस्थान सरकार ने कम बारिश और खरीफ फसलों को हुए नुकसान को देखते हुए राज्य के 14 जिलों की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इनमें 69 तहसीलों को गंभीर और 11 को मध्यम रूप से सूखा प्रभावित श्रेणी में रखा गया है। सरकार की यह अधिसूचना अगले छह महीने तक प्रभावी रहेगी। इससे प्रभावित क्षेत्रों में किसानों और पशुपालकों को राहत देने के उपाय किए जा सकेंगे।

जोधपुर में सबसे अधिक 12 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। इसके बाद जालोर और बाड़मेर का स्थान है, जहां 10-10 तहसीलें सूखा प्रभावित हैं। राज्य सरकार ने बारिश की स्थिति और खरीफ फसलों को हुए नुकसान के आकलन के आधार पर इस संबंध में अधिसूचनाएं जारी की हैं।

सूखा घोषित होने से प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारा डिपो खोलने का रास्ता साफ होगा। इसके अलावा, सरकार ने छह महीने तक कृषि ऋणों की वसूली स्थगित करने का फैसला किया है। इससे फसल नुकसान और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे किसानों को अस्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब 2026 के खरीफ सीजन में देश के कई कृषि प्रधान राज्यों में सूखे का दायरा बढ़ रहा है। इससे फसल उत्पादन, ग्रामीण आय और पशुधन के प्रबंधन को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

महाराष्ट्र में सूखाग्रस्त तालुक की संख्या बढ़कर 305 हो गई है, जबकि राज्य में कुल 358 तालुक हैं। कर्नाटक के कुल 240 तालुक में से 226 सूखाग्रस्त हो गए हैं। तेलंगाना ने 33 में से 31 जिलों के 365 मंडलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इनमें 111 गंभीर और 254 मध्यम रूप से प्रभावित हैं। आंध्र प्रदेश में भी 21 जिलों के 388 मंडलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। इनमें 283 मंडल गंभीर और 105 मध्यम सूखा प्रभावित श्रेणी में हैं। गुजरात में देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ सहित चार जिलों को सूखा प्रभावित चिह्नित किया गया है। राज्य सरकार ने किसानों के लिए राहत उपायों की भी घोषणा की है।

विभिन्न राज्यों में सूखाग्रस्त क्षेत्रों की बढ़ती संख्या प्रतिकूल मानसूनी परिस्थितियों के कारण किसानों पर बढ़ते दबाव को दर्शाती है। किसानों की आजीविका सुरक्षित रखने और ग्रामीण संकट को कम करने के लिए फसल नुकसान पर सहायता, कृषि ऋणों में राहत और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता जैसे उपाय महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।

 

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