राजस्थान के 14 जिलों की 80 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित, 69 पर सूखे की गंभीर मार

राजस्थान सरकार ने बारिश में कमी की मार झेल रहे 14 जिलों की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इनमें 69 तहसीलें गंभीर और 11 मध्यम सूखा प्रभावित हैं। मानसून सीजन के दौरान राज्य में सामान्य से 17.4 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई, जिससे खरीफ फसलों और किसानों की आजीविका पर असर पड़ा है।

राजस्थान के 14 जिलों की 80 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित, 69 पर सूखे की गंभीर मार

राजस्थान में मानसून की बेरुखी और खरीफ फसलों को हुए नुकसान के बीच राज्य सरकार ने 14 जिलों की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इनमें 69 तहसीलों को गंभीर और 11 को मध्यम सूखा प्रभावित श्रेणी में रखा गया है। सरकार के इस फैसले से प्रभावित क्षेत्रों में किसानों और पशुपालकों के लिए राहत उपाय किए जाने का रास्ता खुला है।

आपदा प्रबंधन, राहत एवं नागरिक सुरक्षा विभाग ने 24 और 25 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में अधिसूचनाएं जारी कीं। नए आदेश में बीकानेर को शामिल किए जाने के बाद सूखाग्रस्त घोषित जिलों की संख्या 13 से बढ़कर 14 हो गई। ये घोषणाएं अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से छह महीने तक प्रभावी रहेंगी।

जोधपुर में सबसे ज्यादा 12 तहसीलें प्रभावित

सरकारी अधिसूचनाओं के अनुसार, जोधपुर जिले की 12 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। बाड़मेर और जालोर की 10-10, बालोतरा की 9 तथा पाली की 8 तहसीलें इस सूची में शामिल हैं।

डूंगरपुर, जैसलमेर और फलोदी की 7-7 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित की गई हैं। इसके अलावा बांसवाड़ा की 3, चूरू और ब्यावर की 2-2 तथा बीकानेर, नागौर और सिरोही की एक-एक तहसील को इस सूची में रखा गया है।

कम बारिश और फसल नुकसान के आधार पर फैसला

राज्य सरकार ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों की पहचान के लिए बारिश के आंकड़ों के साथ-साथ कई मानकों का आकलन किया। इनमें सतही जल और भूजल स्तर, फसलों की स्थिति तथा केंद्र सरकार के सूखा निगरानी पोर्टल से प्राप्त जानकारी शामिल है। कृषि विभाग की गिरदावरी और संबंधित वैज्ञानिक आकलन इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं।

मानसून के दौरान बारिश की कमी के कारण खेतों में पर्याप्त नमी नहीं रह पाई। इसका सीधा असर फसलों की बढ़वार और उत्पादन पर पड़ा है। कई क्षेत्रों में फसलें सूखने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। 

राजस्थान में सामान्य से 17.4 फीसदी कम बारिश

इस साल मानसून सीजन के दौरान राजस्थान में 1 जून से 30 सितंबर के बीच 350.83 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य वर्षा 424.71 मिलीमीटर है। इस तरह राज्य में सामान्य से 73.88 मिलीमीटर, यानी करीब 17.4 फीसदी कम बारिश हुई। मानसूनी बारिश में कमी का असर खासतौर पर पश्चिमी राजस्थान के इलाकों पर साफ दिखाई दे रहा है।

मौसम विभाग के अनुसार, इस बार सबसे कम बारिश पाली और जैसलमेर जिले सामान्य से 58 और 54 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। जालोर जिले में 50 और बांसवाड़ा जिले में 39 फीसदी कम बारिश हुई है। इसके अलावा सिरोही जिले में सामान्य से 36 फीसदी, जोधपुर में 27 फीसदी, बालोतरा में 28 फीसदी और डूंगरपुर में 24 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई।

जल संसाधन विभाग की निगरानी में शामिल राज्य के 693 बांधों में जल भंडारण भी पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा। 30 सितंबर को इन बांधों में कुल क्षमता का 62.16 फीसदी पानी उपलब्ध था, जबकि पिछले वर्ष इसी तारीख को यह स्तर 90.19 फीसदी था।

किसानों और पशुपालकों को राहत की उम्मीद

सूखाग्रस्त घोषित किए जाने से प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन को सूखे से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाने में मदद मिलेगी। प्रभावित इलाकों में पशुओं के लिए चारा डिपो खोलने और चारे-पानी की व्यवस्था करने जैसे उपायों पर ध्यान दिया जाएगा।

हालांकि, किसानों को मिलने वाली सहायता और अन्य राहत उपायों का वास्तविक स्वरूप संबंधित सरकारी नियमों, पात्रता तथा आगे जारी होने वाले निर्देशों पर निर्भर करेगा।

Subscribe Rural Voice Newsletter