भारत का चीनी उत्पादन 280 लाख टन तक पहुंचना भी मुश्किल, यूपी में करीब 2.75 लाख टन की गिरावट

भारत में वर्ष 2025–26 के दौरान चीनी उत्पादन 275.28 लाख टन तक पहुंचा है, जो पिछले साल से अधिक होने के बावजूद शुरुआती अनुमानों से कम है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में उत्पादन बढ़ा है, जबकि उत्तर प्रदेश में गिरावट दर्ज की गई है। उद्योग ने बढ़ती लागत और बकाया भुगतान के दबाव के बीच शुगर MSP बढ़ाने और इथेनॉल ब्लेंडिंग का दायरा बढ़ाने की मांग की है।

भारत का चीनी उत्पादन 280 लाख टन तक पहुंचना भी मुश्किल, यूपी में करीब 2.75 लाख टन की गिरावट

चालू चीनी वर्ष 2025–26 के दौरान देश की लगभग सभी चीनी मिलों में पेराई कार्य पूरा हो चुका है। उद्योग संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, 30 अप्रैल तक भारत का चीनी उत्पादन (इथेनॉल डायवर्जन को छोड़कर) 275.28 लाख टन हो गया है, जो पिछले साल इसी अवधि के 256.49 लाख टन से करीब 7 प्रतिशत अधिक है, लेकिन शुरुआती अनुमान के मुकाबले काफी कम है।

फिलहाल देश में तमिलनाडु की पांच चीनी मिलों में पेराई चल रही है, जबकि 539 में से 534 मिलों में पेराई समाप्त हो चुकी है। पिछले साल इसी समय 19 मिलों में पेराई जारी थी।

इस वर्ष महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक रहा है, जहां उत्पादन पिछले साल के 80.93 लाख टन से बढ़कर 99.20 लाख टन तक पहुंच गया। हालांकि, पेराई सीजन की शुरुआत में राज्य में लगभग 110 लाख टन उत्पादन का अनुमान लगाया गया था, लेकिन गन्ने पर प्रतिकूल मौसम के प्रभाव के कारण उत्पादन 100 लाख टन तक भी नहीं पहुंच सका।

देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश की स्थिति और भी कमजोर रही। पर्याप्त गन्ना आपूर्ति न होने के कारण राज्य का चीनी उत्पादन घटकर 89.65 लाख टन रह गया, जो पिछले साल के 92.40 लाख टन के मुकाबले करीब 2.75 लाख टन यानी लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। हालांकि, इस वर्ष गन्ने की रिकवरी दर में सुधार हुआ, अन्यथा उत्पादन में और अधिक कमी हो सकती थी।

देश के तीसरे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य कर्नाटक में उत्पादन पिछले साल के 40.40 लाख टन से बढ़कर 48.01 लाख टन तक पहुंच गया। वहीं, गुजरात में चीनी उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है।

शुगर MSP बढ़ाने की मांग
चीनी उद्योग की ओर से चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) में संशोधन की मांग लगातार उठ रही है। बढ़ती उत्पादन लागत और चीनी की अपेक्षाकृत कम कीमतों के कारण मिलों के कैश फ्लो पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे गन्ना भुगतान का बकाया भी बढ़ता जा रहा है।

अकेले महाराष्ट्र में अप्रैल के मध्य तक गन्ना भुगतान का बकाया 2,130 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले सीजन की इसी अवधि के 752 करोड़ रुपये से काफी अधिक है। उद्योग का कहना है कि मौजूदा लागत संरचना को देखते हुए MSP में बढ़ोतरी मिलों की वित्तीय स्थिति सुधारने और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। इससे सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा।

इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने पर जोर
चीनी उद्योग ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बदलते जियोपॉलिटिकल हालात को देखते हुए इथेनॉल ब्लेंडिंग में तेजी लाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। देश में लगभग 2,000 करोड़ लीटर इथेनॉल की अनुमानित उत्पादन क्षमता को देखते हुए E20 से आगे बढ़कर E22, E25, E27 और E85/E100 जैसे उच्च मिश्रण स्तरों की दिशा में बढ़ने की मांग की जा रही है।

गन्ने से बनने वाले इथेनॉल की खरीद कीमतों में समय पर संशोधन न होने और इस क्षेत्र को कम आवंटन मिलने के कारण स्थापित डिस्टिलेशन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। इससे उद्योग पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। उद्योग ने सरकार से फीडस्टॉक के बीच संतुलन बनाए रखने, क्षमता उपयोग बढ़ाने और कीमतों में समय पर संशोधन करने की मांग की है, ताकि किसानों का बकाया भुगतान समय पर किया जा सके।

चीनी उत्पादन की स्थिति

YTD

30th April’2026

30th April’2025

 

Number of Factories

Sugar Production (Lakh Tons)

Number of Factories

Sugar Production (Lakh Tons)

ZONE

Started

Closed

Operating

Started

Closed

Operating

U.P.

121

121

0

89.65

122

112

10

92.40

Maharashtra

210

210

0

99.20

200

199

1

80.93

Karnataka

81

81

0

48.01

80

80

0

40.40

Gujarat

14

14

0

7.20

15

15

0

8.92

Tamil Nadu

30

25

5

5.38

30

22

8

4.76

Others

83

83

0

25.84

88

88

0

29.08

ALL INDIA

539

534

5

275.28

535

516

19

256.49

स्रोत: इस्मा (चीनी उत्पादन के आंकड़े इथेनॉल उत्पादन के अतिरिक्त)

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