एनबीए ने कृषि जैव विविधता विशेषज्ञ समिति का पुनर्गठन किया, पद्मश्री डॉ. पी. एल. गौतम बने अध्यक्ष

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने कृषि जैव विविधता विशेषज्ञ समिति का एक वर्ष के लिए पुनर्गठन किया है। कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. पी. एल. गौतम को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह समिति कृषि जैव विविधता संरक्षण, आनुवंशिक संसाधनों के प्रबंधन और सतत कृषि संबंधी नीतिगत मामलों पर मार्गदर्शन देगी।

एनबीए ने कृषि जैव विविधता विशेषज्ञ समिति का पुनर्गठन किया, पद्मश्री डॉ. पी. एल. गौतम बने अध्यक्ष

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत कृषि जैव विविधता विशेषज्ञ समिति का पुनर्गठन किया है। इस समिति के अध्यक्ष के रूप में प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. पी. एल. गौतम को नियुक्त किया गया है। इस समिति एक वर्ष के लिए बनाई गई है। इसे कृषि जैव विविधता के संरक्षण, सतत उपयोग तथा एक्सेस एवं लाभ-साझेदारी (ABS) से जुड़े मामलों सहित अन्य संबंधित विषयों पर मार्गदर्शन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (पीपीवीएफआरए) के चेयरमैन समिति के सह-अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे।

डॉ. गौतम राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और पीपीवीएफआरए दोनों के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। कृषि विज्ञान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें हाल ही पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। उनकी नियुक्ति से कृषि आनुवंशिक संसाधनों और जैव विविधता संरक्षण से जुड़े उभरते मुद्दों पर समिति की भूमिका और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

वर्ष 2005 में स्थापित यह समिति एनबीए की एक महत्वपूर्ण सलाहकार संस्था रही है और कृषि एवं जैव विविधता क्षेत्र में बदलती चुनौतियों के अनुरूप समय-समय पर इसका पुनर्गठन किया जाता रहा है। वर्षों से इस समिति में देश के प्रमुख वैज्ञानिकों, नीति विशेषज्ञों, विधि विशेषज्ञों तथा कृषि एवं अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाता रहा है।

समिति ने जैव विविधता अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके तहत खाद्य एवं कृषि के लिए पादप आनुवंशिक संसाधनों पर अंतरराष्ट्रीय संधि (ITPGRFA), बीजों एवं पशु आनुवंशिक सामग्री के निर्यात से जुड़े एबीएस के मुद्दे, पारंपरिक पादप प्रजनन गतिविधियां तथा जैविक संसाधनों से संबंधित सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाओं की स्वीकृति जैसे विषयों पर विशेषज्ञ सिफारिशें प्रदान की गई हैं।

पुनर्गठित समिति में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), राष्ट्रीय पादप, पशु एवं मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय नवाचार प्रतिष्ठान, नालसर विधि विश्वविद्यालय तथा अन्य प्रमुख अनुसंधान एवं शैक्षणिक संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल हैं।

समिति कृषि क्षेत्र में जैव विविधता संबंधी दृष्टिकोण को मुख्यधारा में शामिल करने, सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने, जैव विविधता अधिनियम के अंतर्गत बीज क्षेत्र से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करने तथा जैविक संसाधनों से संबंधित अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान के दिशा-निर्देशों का परीक्षण करने का कार्य करेगी। इसके अलावा समिति संकटग्रस्त देसी फसल किस्मों और पशुधन नस्लों के संरक्षण एवं सतत उपयोग के उपाय सुझाएगी।

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