अर्जेंटीना में गेहूं उत्पादन 23% घटने का अनुमान तो ब्लैक सी में युद्ध से निर्यात बाधित; वैश्विक आपूर्ति पर बढ़ा दबाव
वैश्विक गेहूं बाजार पर दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर अर्जेंटीना का गेहूं उत्पादन पिछले वर्ष के रिकॉर्ड स्तर की तुलना में 23% घटने का अनुमान है, वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण ब्लैक सी से गेहूं का निर्यात लगातार बाधित है। इससे अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति बाधित हो रही है और कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
वैश्विक गेहूं बाजार एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर रहा है। दुनिया के प्रमुख गेहूं निर्यातकों में शामिल अर्जेंटीना में 2026-27 मार्केटिंग वर्ष के दौरान गेहूं उत्पादन में भारी गिरावट आने की संभावना है। दूसरी ओर, रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते ब्लैक सी क्षेत्र से गेहूं की आवाजाही लगातार बाधित हो रही है। इन दोनों घटनाक्रमों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
अर्जेंटीना में कम उत्पादन और ब्लैक सी क्षेत्र से निर्यात में रुकावट के कारण आयातक देशों को अब वैकल्पिक स्रोतों से गेहूं खरीदना पड़ रहा है। इससे उपलब्ध गेहूं के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और वैश्विक कीमतों को समर्थन मिल रहा है। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) इस वर्ष अमेरिका का गेहूं उत्पादन 1970 के बाद सबसे कम रहने का अंदेशा पहले ही जता चुका है।
अमेरिकी कृषि विभाग की फॉरेन एग्रीकल्चरल सर्विस (FAS) के अनुसार, अर्जेंटीना का गेहूं उत्पादन 2026-27 में 2.16 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के रिकॉर्ड उत्पादन की तुलना में 23 प्रतिशत कम होगा। हालांकि एजेंसी ने अप्रैल के अपने अनुमान की तुलना में इस बार 6 लाख टन की बढ़ोतरी की है, क्योंकि गेहूं का रकबा अपेक्षा से अधिक बढ़ा और मौसम भी अनुकूल रहा। फिर भी उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 63 लाख टन कम रहने का अंदेशा है। 2025-26 में अनुकूल मौसम के कारण रिकॉर्ड पैदावार हुई थी। इस बार जुलाई के मध्य तक 90 प्रतिशत से अधिक बुवाई पूरी हुई थी।
उत्पादन घटने के बावजूद अर्जेंटीना का गेहूं निर्यात 1.55 करोड़ टन रहने का अनुमान है। वहीं घरेलू खपत बढ़कर 76.5 लाख टन तक पहुंच सकती है। इसका एक कारण निम्न गुणवत्ता वाले गेहूं का पशु चारे के रूप में बढ़ता उपयोग भी माना जा रहा है।
उधर, रूस-यूक्रेन युद्ध वैश्विक गेहूं व्यापार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। दोनों देशों के बंदरगाहों, अनाज भंडारण ढांचे और मालवाहक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों से ब्लैक सी क्षेत्र से गेहूं की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। रूस और यूक्रेन दुनिया के सबसे बड़े गेहूं निर्यातकों में शामिल हैं।
मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण यूक्रेन की ब्लैक सी के रास्ते अनाज निर्यात क्षमता लगभग एक-तिहाई घट गई है। वहीं रूस के लिए भी आजोव (Azov) सागर के रास्ते गेहूं भेजना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि वहां भी हमलों के कारण बंदरगाह और शिपिंग मार्ग प्रभावित हुए हैं। क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिम के चलते शिपिंग कंपनियां ब्लैक सी क्षेत्र में जहाज भेजने से बच रही हैं। बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई लागत में भी तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे गेहूं का निर्यात और महंगा तथा जोखिमपूर्ण हो गया है।
इन परिस्थितियों में रूस का बड़ा गेहूं भंडार देश के भीतर ही फंसने की आशंका बढ़ गई है, क्योंकि वैकल्पिक परिवहन मार्गों की क्षमता सीमित है। USDA के अनुसार, रूस का 2026-27 में गेहूं उत्पादन 8.85 करोड़ टन और निर्यात 4.7 करोड़ टन रहने का अनुमान है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इस गेहूं को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
ब्लैक सी से आपूर्ति घटने के कारण कई आयातक देश अब यूरोपीय संघ, कनाडा, अमेरिका और कजाकिस्तान जैसे अन्य निर्यातकों की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि वहां भी आपूर्ति की स्थिति बहुत मजबूत नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में भी इस वर्ष अपेक्षाकृत कम फसल का अनुमान है, यूरोपीय संघ पिछले वर्ष की रिकॉर्ड फसल के बाद सामान्य स्तर पर लौट रहा है और अमेरिका में 1970 के बाद सबसे कम गेहूं उत्पादन की आशंका जताई जा रही है। इन परिस्थितियों का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिखाई देने लगा है। जुलाई के दौरान गेहूं वायदा कीमतें 2024 के बाद के अपने उच्चतम स्तर तक पहुंच गईं।

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