चीनी की अधिकतम बिक्री दर 5,000 रुपये तय करने का निर्देश वापस, बिजनौर डीसीओ ने रद्द किया पत्र

चीनी की बिक्री दर 5,000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक न रखने का निर्देश बिजनौर डीसीओ ने वापस ले लिया है। 3 सितंबर को चीनी मिलों को जारी पत्र निरस्त कर दिया गया है।

चीनी की अधिकतम बिक्री दर 5,000 रुपये तय करने का निर्देश वापस, बिजनौर डीसीओ ने रद्द किया पत्र

चीनी की कीमतों पर अंकुश लगाने को लेकर उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में जारी 5,000 रुपए प्रति क्विंटल की अधिकतम बिक्री दर का निर्देश वापस ले लिया गया है। जिला गन्ना अधिकारी, बिजनौर की ओर से 3 सितंबर 2026 को जारी नए पत्र में पहले जारी पत्र को “त्रुटिवश जारी” बताते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।

जिला गन्ना अधिकारी बी.के. पटेल की ओर से 3 सितंबर 2026 को जारी पत्र में कहा गया कि कार्यालय द्वारा उसी दिन जारी पत्र संख्या 2067 गलती से जारी हो गया था। इसलिए उक्त पत्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है।

5,000 रुपये की सीमा अब लागू नहीं

पहले जारी पत्र में जिले की चीनी मिलों को निर्देश दिया गया था कि वे चीनी की बिक्री दर किसी भी दशा में 5,000 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक न रखें, अन्यथा आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।

हालांकि, नए पत्र निरस्त के बाद यह निर्देश प्रभावी नहीं रहा। नए पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी बिजनौर, लखनऊ के गन्ना आयुक्त कार्यालय और मुरादाबाद के उप गन्ना आयुक्त समेत संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।

गन्ना विभाग की बैठक के बाद भेजा पत्र

बिजनौर डीसीओ की ओर से जनपद की चीनी मिलों को यह पत्र गुरुवार को चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव द्वारा आयोजित वर्चुअल समीक्षा बैठक के बाद भेजा गया था। लेकिन शासन स्तर से इस तरह का कोई आदेश जारी नहीं हुआ। इस बीच, पत्र को लेकर चीनी उद्योग और व्यापारियों में हड़कंप मंच गया। 

चीनी उद्योग में मचा हड़कंप

चीनी की बिक्री दर 5 हजार रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा न रखने के आदेश पर चीनी उद्योग और ट्रेडर्स ने कड़ी आपत्ति जताई थ चीनी बिक्री की दर जिला स्तर पर तय किए जाने के प्रावधान और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 के तहत कार्रवाई की चेतावनी पर सवाल उठे थे। मामले की गूंज लखनऊ से लेकर दिल्ली तक पहुंची। 

किसानों ने भी किया था विरोध 

पहले जारी आदेश पर किसान संगठनों की ओर से भी सवाल उठाए गए थे। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के युवा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिगंबर सिंह ने चीनी की कीमत पर इस तरह की पाबंदी को किसान हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार से आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की थी।

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