वैश्विक विकास बैंकों का उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला मजबूत बनाने के लिए संयुक्त कार्रवाई पर जोर

छह प्रमुख वैश्विक विकास संस्थानों ने भविष्य के संकटों से खाद्य सुरक्षा को बचाने के लिए वैश्विक उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने का आह्वान किया है। प्रस्तावित रोडमैप के तहत उत्पादन, भंडारण और लॉजिस्टिक्स में निवेश बढ़ाने के साथ उर्वरक दक्षता, स्वस्थ मिट्टी, लचीली खाद्य प्रणालियों और छोटे किसानों को समर्थन दिया जाएगा।

वैश्विक विकास बैंकों का उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला मजबूत बनाने के लिए संयुक्त कार्रवाई पर जोर

बहुपक्षीय विकास बैंकों (MDBs) और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों (IFIs) ने वैश्विक उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत और लचीला बनाने के लिए व्यापक सहयोग तथा निवेश बढ़ाने का आह्वान किया है। संस्थानों ने कहा कि लगातार सामने आए वैश्विक संकटों ने उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला की संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर किया है, जिसका सबसे अधिक असर छोटे किसानों और कम आय वाले परिवारों पर पड़ा है।

संयुक्त बयान में छह प्रमुख विकास संस्थानों ने कहा कि उर्वरकों की उपलब्धता वैश्विक खाद्य सुरक्षा के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल उर्वरकों की आपूर्ति बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। उर्वरकों के अधिक कुशल उपयोग, पोषक तत्वों के स्रोतों में विविधता, स्वस्थ मिट्टी और अधिक लचीली खाद्य प्रणालियों पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।

संयुक्त बयान पर अफ्रीकी डेवलपमेंट बैंक ग्रुप, एशियाई विकास बैंक, यूरोपियन बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट, इंटर-अमेरिकन डेवलपमेंट बैंक समूह, इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट (IFAD) और विश्व बैंक समूह ने हस्ताक्षर किए हैं।

इन संस्थानों ने G20 देशों, विकास साझेदारों और निजी क्षेत्र के सहयोग से ‘उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने के लिए MDB रोडमैप’ विकसित करने का प्रस्ताव रखा है। इस रोडमैप के तहत वित्त पोषण, नीतिगत संवाद, तकनीकी सहायता, अनुसंधान और नवाचार को साझा एजेंडे के तहत आगे बढ़ाया जाएगा।

प्रस्तावित पहल का उद्देश्य उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, ब्लेंडिंग, भंडारण और परिवहन तक पूरी उर्वरक मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना है। इन संस्थानों के अनुसार महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और आर्थिक गलियारों में निवेश बढ़ाकर देश भविष्य में होने वाले आपूर्ति व्यवधानों के जोखिम को कम कर सकते हैं और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध करा सकते हैं।

उर्वरकों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देना भी इस पहल का प्रमुख हिस्सा होगा। संस्थानों ने मिट्टी की जांच, बेहतर उर्वरक की सिफारिश, सटीक पोषक तत्व प्रबंधन, डिजिटल कृषि और किसान सलाहकारी सेवाओं को महत्वपूर्ण उपाय बताया है। इनसे उर्वरकों की बर्बादी कम करने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

संयुक्त बयान में व्यापक खाद्य प्रणालियों की कमजोरियां दूर करने पर भी जोर दिया गया है। बेहतर मृदा एवं जल प्रबंधन, प्रकृति आधारित समाधान, मजबूत कृषि मूल्य श्रृंखला, नवीन तकनीक और निजी क्षेत्र के अधिक निवेश को भविष्य की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।

संस्थानों ने कमजोर परिवारों और छोटे किसानों के लिए खाद्य सुरक्षा संबंधी सहायता जारी रखने की प्रतिबद्धता भी जताई है। किसानों और कृषि-खाद्य उद्यमों की वित्त, कृषि इनपुट, लॉजिस्टिक्स और बाजारों तक पहुंच बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

यह पहल 2022 के वैश्विक खाद्य संकट के बाद शुरू किए गए ‘IFI Action Plan to Address Food Insecurity’ पर आधारित है। इसके अलावा, G20 चर्चाओं में मजबूत खाद्य एवं उर्वरक मूल्य श्रृंखलाओं की जरूरत पर जोर दिया गया है। प्रस्तावित G7+ कार्ययोजना में भी उर्वरक संकट और खाद्य प्रणाली की मजबूती के लिए बेहतर निगरानी, पूर्व चेतावनी प्रणाली, समन्वय और समय पर वित्त पोषण की आवश्यकता रेखांकित की गई है।

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